सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की 20 अगस्त को मौत हो गई। सिख पीड़ितों के खून से लाल हाथों वाली कांग्रेस के नेताओं ने सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताया है। भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार जी के निधन की खबर दुःखद है। देश के राजनीतिक परिदृश्य की अपूरणीय क्षति हुई है, उन्हें देशभर में एक ‘रोल मॉडल’ (आदर्श) की तरह देखा जाता था। वहीं कांग्रेस के नेता उदित राज ने सज्जन कुमार के निधन को पार्टी के लिए “बड़ी क्षति” बताते हुए कहा कि उन्होंने विशेष रूप से गरीबों के लिए बहुत काम किया था।
भाजपा नेता आरपी सिंह ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए एक हत्यारा “रोल मॉडल” हो सकता है तो फिर उस पार्टी से और क्या उम्मीद की जा सकती है, जिसके अपने प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिल्ली में करीब 3,000 निर्दोष सिखों की हत्या को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश की थी “जब बड़ा पेड़ गिरता है, धरती हिलती है।” जिन परिवारों ने अपने बेटे, पति, पिता और भाई खोए, जिनके अपनों को जिंदा जला दिया गया उनके लिए यह “धरती का थोड़ा सा हिलना” नहीं था; यह उनकी पूरी जिंदगी का उजड़ जाना था। और आज जब कांग्रेस के नेता 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के दोषी सज्जन कुमार को “रोल मॉडल” और “अपूरणीय क्षति” बताते हैं, तो वे साफ दिखा रहे हैं कि कांग्रेस 1984 को किस नजर से देखती है।
आरपी सिंह ने कहा कि जब दोषियों का महिमामंडन किया जाए और पीड़ितों को भुला दिया जाए, तो उस पार्टी से और क्या उम्मीद की जा सकती है, जिसके नेताओं पर 1984 के हत्याकांड में शामिल होने के आरोप लगे? सिख 1984 को कभी नहीं भूलेंगे। दिल्ली में करीब 3,000 निर्दोष सिखों की हत्या हुई थी। उनका खून और उनके परिवारों का दर्द किसी राजनीतिक श्रद्धांजलि से मिटाया नहीं जा सकता। 1984 के हत्याकांड के दोषियों का महिमामंडन करके कांग्रेस कोई विरासत का सम्मान नहीं कर रही वह पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।
कांग्रेस का घिनौना चेहरा सामने आया
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि आज कांग्रेस का घिनौना चेहरा सामने आया है। उन्होंने कहा कि 1984 के सिख नरसंहार के गुनहगार सज्जन कुमार की वकालत करके कांग्रेस और गांधी परिवार ने एक बार फिर सिखों के जख्मों पर नमक छिड़का है। जिस दरिंदे को अदालतों ने बेगुनाह सिखों के खून का गुनहगार माना और सलाखों के पीछे भेजा, कांग्रेस के नेता उसे अपना ‘आइकॉन’ बता रहे हैं और उसके जाने पर मातम मना रहे हैं! यह बेहद शर्मनाक और घिनौना है। दिल्ली की जिस मिट्टी में 1984 में हजारों बेकसूर सिखों का खून बहाया गया था, आज उसी मिट्टी की दुहाई देकर मैं कहता हूँ – कांग्रेस का असली डीएनए ही सिख-विरोधी है। गांधी परिवार की रगों में सिखों के प्रति जो नफरत दौड़ रही है, वह आज फिर उनके नेताओं की भाषा में बाहर आ गई है।
सज्जन कुमार जैसे कातिल कांग्रेस के ‘आदर्श’ हो सकते हैं, लेकिन दिल्ली की जनता और सिख समाज इस नीच मानसिकता को कभी माफ नहीं करेगा। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक ऐसी मानसिकता को जड़ से उखाड़ न फेंका जाए।
सज्जन कुमार को हुई थी उम्रकैद की सजा
सज्जन कुमार पर साल 1984 के सिख विरोधी दंगें में भीड़ को उकसाने और हत्या के आरोप लगे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को पालम कॉलोनी मामले में उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार मामले में भी दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा दी।
उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक नवंबर से दिल्ली समेत कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे। दंगों के 21 साल बाद 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में माफी मांगते हुए कहा था कि इस घटना से उनका सिर शर्म से झुक जाता है।
















