‘सैफ्रन सर्ज’ विमोचन: संघ के 100 वर्षों की यात्रा और सेवा कार्यों पर डॉ. शैलेंद्र का संबोधन
August 21, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत उत्तराखंड

‘सैफ्रन सर्ज’ विमोचन: संघ के 100 वर्षों की यात्रा और सेवा कार्यों पर डॉ. शैलेंद्र का संबोधन

देहरादून में तरुण विजय की पुस्तक ‘सैफ्रन सर्ज’ का विमोचन समारोह। आरएसएस प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने पूर्वोत्तर में सेवा गतिविधियों, रामसेतु और कुंभ के कार्यों का जिक्र किया। अनिल रतूड़ी ने सभ्यतागत अस्मिता पर जोर दिया।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Aug 21, 2026, 09:27 am IST
inउत्तराखंड

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि ‘सैफ्रन सर्ज’ में संघ की संगठनात्मक यात्रा, संघर्ष, सेवा गतिविधियों और भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक संघ के सामाजिक विस्तार से लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक के विभिन्न पक्षों को समझने का प्रयास करती है।

डॉ. शैलेंद्र गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में ‘सैफ्रन सर्ज’ के विमोचन समारोह को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। करीब 299 पृष्ठों की पुस्तक में हिंदुत्व, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक परिवर्तन और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े प्रसंगों के साथ विभिन्न ऐतिहासिक एवं समकालीन व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख किया गया है। डॉ. शैलेंद्र ने पुस्तक के उन अध्यायों का उल्लेख किया, जिनमें बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में संघ के संगठनात्मक प्रयासों को रेखांकित किया गया है। उन्होंने असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम सहित विभिन्न क्षेत्रों में संघ से जुड़े संगठनों की सेवा गतिविधियों का उल्लेख किया। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से राहत एवं सेवा कार्य किए जाने की बात भी उन्होंने कही।

उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरण से जुड़े कार्यों तथा वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। असम में कार्यकर्ताओं के अपहरण और हत्या तथा ओडिशा में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद सेवा और सामाजिक गतिविधियां जारी रहीं। उन्होंने रामसेतु आंदोलन, प्रयागराज कुंभ और कांवड़ यात्रा के दौरान संचालित सेवा गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि नेत्र कुंभ, पर्यावरण संरक्षण, समरसता कुंभ और युवा कुंभ जैसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संघ और उससे जुड़े संगठनों द्वारा देशभर में दो लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा गतिविधियां संघ के लिए नई नहीं हैं और भविष्य में इन्हें और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्र हैं बौद्धिक विरासत

डॉ. शैलेंद्र ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, उज्जैन और कांची जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों को भारत की बौद्धिक विरासत का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भाषा, शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की वैश्विक भूमिका और वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति और विचारों पर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चर्चा का उल्लेख किया। उन्होंने युवा शक्ति, मातृशक्ति, संत समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अपनी सभ्यतागत जड़ों से जुड़ना जरूरी: अनिल रतूड़ी

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि भारत की सभ्यतागत अस्मिता को समझने और मजबूत करने के लिए भाषा, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मूल विचारों से जुड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के पुनर्जागरण में विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने पुस्तक में भारत की दीर्घ सभ्यतागत यात्रा के विभिन्न पड़ावों को सामने रखे जाने की बात कही। बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के सामरिक महत्व का भी उन्होंने उल्लेख किया।

अनिल रतूड़ी ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक परिस्थितियों और औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था के प्रभाव से समाज का एक वर्ग अपनी पारंपरिक भाषाओं और ज्ञान परंपरा से दूर हुआ। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक आजादी के साथ सांस्कृतिक और मानसिक स्तर पर औपनिवेशिक प्रभावों को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने हिंदुत्व को केवल कर्मकांड तक सीमित करके नहीं देखने की बात कही और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे व्यापक मानवीय मूल्यों का उल्लेख किया। उन्होंने नई पीढ़ी से भारतीय सभ्यतागत विरासत और उसके मूल विचारों को समझने का आह्वान किया।

पुस्तकों से राष्ट्रवादी विचार एवं राष्ट्रीय चेतना नई पीढ़ी तक पहुंचेगी: महेंद्र भट्ट

कार्यक्रम के  विशिष्ट अतिथि और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि भारत में पूजा-पद्धतियां, भाषाएं, बोलियां, पहनावे और खान-पान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रति साझा भावना समाज को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि भारत के मानबिंदुओं को प्रतिष्ठित करने का कार्य हो रहा है और पुस्तकों के माध्यम से राष्ट्रवादी विचार एवं राष्ट्रीय चेतना नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा सकती है।

पुस्तक विचारों को दिशा देती है: नरेश बंसल

विशेष मान्य अतिथि व राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि पुस्तक केवल पढ़कर अलमारी में रखने की वस्तु नहीं होती, बल्कि वह विचारों को दिशा देने और व्यक्ति को किसी उद्देश्य के प्रति प्रेरित करने का माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में प्रकाशित ‘सैफ्रन सर्ज’ से संघ की सौ वर्ष की यात्रा और इस दौरान हुए सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा।बंसल ने पुस्तक का हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किए जाने की आवश्यकता बताई और लेखक तरुण विजय से क्षेत्रीय भाषाओं में इसके संस्करण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

‘सैफ्रन सर्ज’ सांस्कृतिक चेतना में बदलाव का संकेत : तरुण विजय

पुस्तक के लेखक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि ‘सैफ्रन सर्ज’ आरएसएस, हिंदुत्व और हिंदू सांस्कृतिक चेतना के बढ़ते प्रभाव को समझने का प्रयास है। उन्होंने संघ स्वयंसेवकों के संघर्ष और बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अनेक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों ने अपने सामाजिक एवं वैचारिक कार्य जारी रखे। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं, धार्मिक प्रतीकों और औपनिवेशिक दौर से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए अपने वैचारिक दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य भारतीय सभ्यता, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना के संदर्भ में बदलते सामाजिक परिदृश्य को सामने रखना है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘सैफ्रन सर्ज’ को संघ के संगठनात्मक विस्तार, सेवा कार्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक बदलाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का एक प्रयास बताया। कार्यक्रम का समापन भारत की सांस्कृतिक भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक एवं मुख्यमंत्री के जनसम्पर्क अधिकारी राजेश सेठी ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए युवाओं से ‘सैफ्रन सर्ज’ पुस्तक में निहित राष्ट्रीय भाव और विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक युवाओं को राष्ट्र, संस्कृति और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देती है।  मांचीसन  अतिथियों में प्रकाशक आलोक गोस्वामी उपस्थित रहे और कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र  खंडूडी ने किया।

इस मौके पर क्षेत्र सह प्रचार प्रमुख तपन, प्रांत व्यवस्था प्रमुख नीरज मित्तल, विभाग प्रचारक धनंजय, विभाग कार्यवाह रविंद्र चौहान, अरुण शर्मा, मनीष बागड़ी  सहित बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

 

Topics: महेंद्र भट्टराष्ट्रीय स्वयं सेवक संघसैफ्रन सर्ज विमोचनतरुण विजय पुस्तकडॉ शैलेंद्र आरएसएसअनिल रतूड़ी
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

CM Pushkar Singh Dhami Media Briefing Dehradun BJP Office PM Modi

उत्तराखंड: सीएम धामी बोले- देश अब नारों पर नहीं, काम पर देता है वोट

bjp national president nitin navin-uttarakhand election strategy 2027

उत्तराखंड: ‘विचार परिवार’ का करें विस्तार, हारी हुई सीटों पर फोकस- राष्ट्रीय अध्यक्ष ने MP-MLA को दिया जीत का मंत्र

“पहले मैं स्वयंसेवक हूँ”: अटल बिहारी वाजपेयी का संघ से जुड़ा जीवन और विरासत

उत्तराखंड : एक साथ हजारों लोगों ने एक सुर में गाया वंदे मातरम

dr Bhairappa died

प्रख्यात लेखक डॉ एसएल भैरप्पा का निधन, संघ से था गहरा नाता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जताया शोक

उत्तराखंड : नकल जिहादियों पर खिलाफ लगेंगी सख्त कानूनी धाराएं – सीएम धामी

Load More

ताज़ा समाचार

Rajasthan Mausam

Rajasthan Weather: राजस्थान में मानसून ने फिर बदली चाल, 15 जिलों में बारिश का अलर्ट

Supreme Court

उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, UGC बोला-नियमों पर हो रहा पुनर्विचार

PoJK protest

POJK में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा ऐलान, अब पाक सरकार को नहीं देंगे टैक्स

कमल आनंद

विभाजन की विभीषिका : घर छूटा पढ़ाई भी

‘सैफ्रन सर्ज’ विमोचन: संघ के 100 वर्षों की यात्रा और सेवा कार्यों पर डॉ. शैलेंद्र का संबोधन

pakistan ex PM Imran khan

अदियाला जेल से शिफा अस्पताल शिफ्ट हुए पूर्व पाकिस्तान PM इमरान खान: जानिए क्या है पूरा मामला?

बंटवारे के दाैरान भारत की सीमा की ओर बढ़ते हिदू शरणार्थी

#विभाजन : बरसों की सुनियोजित परिणति

प्रतीकात्मक तस्वीर

ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने गंदे पानी और नमक से बनाया हाइड्राजीन केमिकल

सर्जियो गोर लद्दाख पहुंचे: जम्मू-कश्मीर के बाद लद्दाख का पहला अमेरिकी राजनयिक दौरा

इजरायल में आतंकियों के लिए तैयार किया जा रहा फांसी का फंदा

इतामार बेन-ग्विर का वीडियो: आतंकियों के लिए फांसी की संरचना का निर्माण शुरू, क्यों मच गया है बवाल ?

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies