नेपाल में एक आंदोलन चल रहा है जिसमें लोग देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग में युवा वर्ग, खासकर Gen-Z कहे जाने वाले नए युवा, काफी सक्रिय दिख रहे हैं। महाराजगंज से विश्वदीपक त्रिपाठी की रिपोर्ट के मुताबिक, शाही युवा शक्ति संगठन इस अभियान को चला रहा है।
संगठन के हस्ताक्षर अभियान में अब तक 18.54 लाख लोग अपने समर्थन के रूप में हस्ताक्षर कर चुके हैं। इनमें ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके शामिल हैं। संगठन का लक्ष्य है कि देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी तक यह संदेश पहुंचे। युवा अपनी प्रोफाइल फोटो में सनातन धर्म की ध्वजा लगा रहे हैं और ‘म हिंदू हो’ या ‘गर्वले बन्नुहोस्, हामी हिन्दू हों’ जैसे नारे लिख रहे हैं। ये नारे नेपाली में हैं और इनका मतलब है कि गर्व से कहो, हम हिंदू हैं।
कांवड़ियों और मदरसे से जुड़े लोगों के बीच विवाद
जुलाई में सुनसरी जिले में कांवड़ियों और एक मदरसे से जुड़े लोगों के बीच विवाद हुआ था। यह विवाद सांप्रदायिक रूप ले चुका था और इसकी चर्चा नेपाल के पहाड़ी इलाकों से लेकर भारतीय सीमा से सटे करीब 27 जिलों तक पहुंच गई। इन जिलों में भी नेपाल को फिर हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठने लगी। Gen-Z युवाओं की भागीदारी से यह मांग तेजी से फैल रही है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने दिया ‘म हिंदू हूँ’ का नारा
पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के काठमांडू में आयोजित नेपाली कांग्रेस के एक सम्मेलन में ‘म हिंदू हूँ’ का नारा लगा। इसके बाद युवाओं ने इस नारे को सोशल मीडिया पर और ज्यादा फैलाना शुरू कर दिया। बहुत से लोग अपनी प्रोफाइल तस्वीरें बदलकर सनातन ध्वजा और ये नारे लगा रहे हैं। शाही युवा शक्ति, नेपाल के अध्यक्ष पशुपति खडका ने बताया कि हस्ताक्षर अभियान में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरफ से समर्थन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जाता, युवाओं का यह आंदोलन जारी रहेगा। संगठन के धर्मराज विश्वकर्मा का कहना है कि सनातन उनकी पहचान है और वे इसे वापस लाना चाहते हैं।
नेपाली कांग्रेस पार्टी में भी इस बीच कुछ हलचल दिख रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को लेकर पार्टी दो गुटों में बंटी हुई है। दो से पांच अक्टूबर तक काठमांडू में पार्टी का केंद्रीय महाधिवेशन होने वाला है। इसमें देउबा की पार्टी में भूमिका को लेकर चर्चा हो सकती है। इस पूरे माहौल में युवा अपनी पहचान को खुले तौर पर जाहिर कर रहे हैं। जो पहले सनातन पहचान छिपाते थे, वे अब गर्व से इसे सामने रख रहे हैं। हस्ताक्षर अभियान और सोशल मीडिया के जरिए यह संदेश फैल रहा है। नेपाल की कई जगहों पर लोग इस मांग का समर्थन कर रहे हैं।
















