रामपुर से 'मिनी CM' तक: जानिए आजम खान का उदय, अपराध का इतिहास और जौहर यूनिवर्सिटी का काला सच
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रामपुर से ‘मिनी CM’ तक: जानिए आजम खान का उदय, अपराध का इतिहास और जौहर यूनिवर्सिटी का काला सच

Azam Khan Jauhar University Case: रामपुर में नवाब परिवार के खिलाफ राजनीति से लेकर मिनी CM बनने वाले आजम खान का पूरा इतिहास। जानिए जौहर यूनिवर्सिटी पर क्यों कसा आयकर व RDA का शिकंजा।

Written byमहावीर प्रसाद जैन, अध्येतामहावीर प्रसाद जैन, अध्येता — edited by Shivam Dixit
Aug 18, 2026, 09:09 pm IST
inविश्लेषण, मत अभिमत, उत्तर प्रदेश
Azam Khan Political Rise Crime History Jauhar University Demolition Notice Income Tax Panchjanya

सपा नेता आजम खान और पुत्र अब्दुल्ला खान

आजम खान की प्रेरणा के स्रोत मोहम्मद अली जौहर हैं, जिनके घोषित आदर्श अंग्रेजों के प्रति स्वामिभक्ति, हिन्दुओं  के प्रति तीव्र कटुता और  द्वि-राष्ट्रवाद के स्तम्भ सय्यद अहमद खां थे।  इन दोनों को  पाकिस्तान में पाकिस्तान के निर्माताओं में स्थान दिया जाता है।

आजम खान का उत्कर्ष

आजम खान का जन्म रामपुर में एक मामूली परिवार में हुआ था। उनके पिता टाइपिस्ट थे, लेकिन उन्होंने आजम के लिए अच्छी शिक्षा का प्रबंध किया। उन्होंने 1974 में अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीए किया। मार्च 1974 में जय प्रकाश नारायण का आंदोलन प्रारम्भ हुआ । जून 1975 में आपातकाल की घोषणा हुई । वे आपातकाल समाप्त होने तक लगभग 18 महीने जेल में रहे।

आजम ने जेल से बाहर आने के बाद राजनीति में कदम रखा। अलीगढ़ कॉलेज में विधार्थी काल में वे 1974-75 के दौरान छात्र परिषद् में महासचिव रह चुके थे।  जेल से मुक्त होने के पश्चात् उन्होंने गरीब मजदूरों के नेतृत्व के बल पर रामपुर के नवाब परिवार के वर्चस्व को समाप्त करने में सफलता प्राप्त की। इस शुरुआत से अपने नेतृत्व को परवान चढ़ाते हुए उन्होंने 2012 से 2017 की अखिलेश यादव सरकार काल में उत्तर प्रदेश के “मिनी-मुख्यमंत्री” कहे जाने तक का सफर तय  किया ।

1977 के विधान सभा चुनाव रामपुर निर्वाचन क्षेत्र में नवाब परिवार के प्रत्याशी के हाथों उनकी  हार हुई। 1980 के चुनाव में वे यहां से गरीबों और मजदूरों के मतों के बल पर जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। इसके बाद वे लगातार 10 बार रामपुर से विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों को  403 में से 325 निर्वाचन स्थलों पर विजय मिली थी तब भी आजम ने  रामपुर से बहुत बड़े अंतर से विजय प्राप्त की । 2019 के संसदीय चुनाव में उन्होंने मोदी लहर के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी जयाप्रदा को पराजित किया। आजम खां अंतिम  बार मार्च 2022 में रामपुर से उत्तर प्रदेश विधान सभा के लिए चुने गए। यह रामपुर से दसवीं बार विजय थी। उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को भी सुआर से विजय मिली। हालांकि 2019 में उसका चुनाव नामांकन के समय 25 वर्ष से कम आयु होने के कारण निरस्त हो गया। उसने 2017 के चुनाव में पात्रता के लिये दूसरा जन्म प्रमाण पत्र ले लिया था।

आजम खान को मई  2009 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया गया। इसका कारण  यह था कि उन्होंने  संसदीय चुनाव में जयाप्रदा को उनकी इच्छा के विरुद्ध रामपुर से प्रत्याशी बनाये जाने, मुलायम सिंह द्वारा बाबरी तोड़ने के समय मुख्यमंत्री, कल्याण सिंह के साथ समझौता करने के कारण उन्होंने पार्टी का अनुशासन तोड़ा था।  किन्तु मुसलमानों में उनके प्रभाव के कारण दिसंबर 2010 में उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया।

जहरीले बोल के लिए कुख्यात हैं आजम खान

आजम खान ने 2019 के संसदीय चुनाव के समय जया प्रदा पर बहुत ही शर्मनाक टिप्पणी की थी। अप्रैल 2019 में रामपुर में जिला मजिस्ट्रेट, प्रधानमंत्री की माता और मुख्यमंत्री योगी जी के लिए अभद्र भाषा के प्रयोग के लिए उनपर मुकदमा दायर हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग के दिशानिर्देश और भारतीय न्याय संहिता उल्लंघन करते हुए अभद्र भाषा के प्रयोग के कारण उन्हें कानूनी और राजनैतिक चुनौतियों  का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1989 में जब वे मुलायम सरकार में मन्त्री थे भारत माता को डायन कहा था। दिसंबर 2015 में जब वे उत्तर प्रदेश में सबसे शक्तिशाली मन्त्री  थे तब कहा  “मैंने भारत मां को डायन कहा है। मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूं…।” 7 अप्रैल 2014 को आजम खान ने कहा कि कारगिल युद्ध में मुसलमान सैनिको की बहादुरी से विजय मिली। उन्होंने नारा-ए- तकबीर और अल्लाह हू अकबर के नारों साथ दुश्मन पर आक्रमण किया था ।

आजम खां उनके पुत्र और पत्नी पर आपराधिक गतिविधियों के लिए मुक़दमे और सज़ा

फरवरी 2013 में आजम खान और पुत्र अब्दुल्ला खान को विशेष एम.पी./एम.एल.ए कोर्ट ने 2008 के एक सड़क जाम करने के अपराध के लिए दो वर्ष की सज़ा सुनाई। उन पर लगभग 100 आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं जो अधिकतर 2017 के बाद के हैं और जौहर यूनिवर्सिटी के लिए भूमि हथियाने से सम्बंधित हैं। उन पर किसानों की भूमि हथियाने से लेकर, पुस्तकें और जानवर चुराने, उत्पीड़न करने, डकैती, जानलेवा हमले करने, झूठे जन्म प्रमाण-पत्र बनाने और घृणास्पद भाषण देने जैसे आरोप लगे।

2022 में न्यायालय द्वारा दंडित किये जाने के कारण वे विधान सभा से निष्कासित किये गए।  अलग -अलग उद्देश्यों के लिए दो पृथक स्थानों से  अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण -पत्र बनवाने के अपराध के लिए आजम खान, उनकी पत्नी फातिमा और पुत्र अब्दुल्ला को अक्टूबर 2023 में 7  वर्ष की सजा सुनाई गई। एक प्रमाण -पत्र में जन्म, रामपुर में 1 जनवरी 1993 और दूसरे में लखनऊ में 30 सितम्बर 1990 दिखाया गया था। इनका उपयोग वर्षों तक अलग-अलग जाली दस्तावेज़, जैसे पैन-कार्ड और एक पासपोर्ट, बनाने के लिए किया गया था। उच्च न्यायालय द्वारा आजम खान की सजा पर रोक लगा दी गई पर यह सुविधा पत्नी और पुत्र को नहीं दी गई।

समाजवादी पार्टी के शासन में काल 2016  में रामपुर के समीप डूंगरपुर गांव में ‘आसरा’ नाम से एक सरकारी बस्ती के लिए जमीन हथियाने को लेकर उन पर हमला करवाने और सम्पत्ति को हानि पहुंचाने के लिए मई 2014 में एक मुकदमा दायर हुआ और उन्हें और उनके पुत्र को 10 वर्ष की सजा मिली, जिससे उनके पुत्र को विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा। सितम्बर 2019 में आजम खान की पत्नी तंजीम पर झूठे जन्मपत्र से सम्बन्धित मुकदमे के अतिरिक्त अपने पुत्र के साथ मिलकर किसानों की जमीन पर अतिक्रमण और बिजली चुराने के लिए भी एफआईआर दर्ज हुई। इस समय वह दोहरे पैन-कार्ड के जुर्म में नवंबर 2025 से 7 वर्ष की सजा काट रहे हैं । इसके साथ ही उन्हें मई 2026 में 2019 के घृणास्पद भाषण के जुर्म में दो वर्ष की सजा दी गई है।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट: स्थानीय प्रशासन की कार्यवाही

अपने  इस्लामी नजरिये के कारण आजम खान जौहर यूनिवर्सिटी के लिए हर तरह के उपाय अपनाने को तैयार हो गए। उन्होंने 2003 में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट गठित  किया। इसके द्वारा 2006 में  मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण किया गया। इसके उद्गाटन समारोह में समाजवादी सरकार के सारे मंत्री उपस्थित हुए। इसे मई 2013 में  नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजुकेशन द्वारा अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा किया गया।  इस यूनिवर्सिटी के लिए प्रारम्भ में 400 एकड़ जमीन की योजना बनी। इस  समय इसके पास कागजों में 250 एकड़ जमीन है। इसमें से सरकार ने 170 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया है।

रामपुर विकास प्राधिकरण के इंजीनियर ने 28 जून 2026 को मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के रजिस्ट्रार को 8 जुलाई तक यूनिवर्सिटी के 38 भवनों की योजना की स्वीकृति के दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए नोटिस दिया। जौहर यूनिवर्सिटी से उत्तर आने के रामपुर विकास प्राधिकरण के वाइस-चेयरमन 15 जुलाई को इस निर्णय पर पहुंचे कि विवादित भवन बिना स्वीकृति प्राप्त किये बने हैं और अकादमिक तथा मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त अन्य भवनों को उन्हें ध्वस्त किये जाने का आदेश जारी किया।

प्राधिकरण ने ट्रस्ट को विवादित भवनों को 15  दिन में तोड़ने का निर्देश दिया और सूचित किया कि  ऐसा  नहीं करने पर प्राधिकरण द्वारा उन्हें ध्वस्त कर सारा खर्च भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किया जायगा।

यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने मुरादाबाद  सम्भागीय आयुक्त के न्यायालय के  समक्ष रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील की। 27 जुलाई को सम्भागीय आयुक्त के द्वारा   भवनों के तोड़े जाने पर 10 अगस्त को अगली सुनवाई होने तक अन्तरिम  रोक लगा दी गई।  उन पर जौहर यूनिवर्सिटी के लिये जमीन हथियाने और लीज की शर्तों और श्रमिक कल्याण उपकर (जो सामान्यतया कुल लागत का 1% होता है) के लिए किसानों ने 26 मुक़दमे दायर किए। आजम ने  2012 में यूनिवर्सिटी का कार्यालय बनाने के लिए  30 वर्ष के लिए   100 रुपये प्रति वर्ष की दर से  लीज पर जमीन  ली थी। अक्टूबर 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने आजम पर जौहर ट्रस्ट के लिए जमीन लीज में प्राप्त करने को “पद का दुरुपयोग” बताते हुए फटकार लगाई। उत्तर प्रदेश सरकार जी ने लीज में नियमों की अनदेखी के आधार पर इसे निरस्त कर दिया।  जौहर ट्रस्ट के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई पर हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश को वैध ठहराया।

आयकर विभाग की कार्यवाही

जौहर ट्रस्ट 2003 मे 50 हजार रुपये के साथ स्थापित हुआ था, लेकिन आज जौहर ट्रस्ट के पास अरबों की संपत्ति के साथ कई बड़े संसाधन हैं। सितंबर 2023 को आयकर विभाग ने जांच-पड़ताल की थी। इस दौरान आयकर विभाग ने कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। 23 जून 2023 की रिपोर्ट में आयकर विभाग जौहर ट्रस्ट के बहीखातों में दर्ज कई दानदाता फर्मों को बोगस मान चुका है।

आजम पर आयकर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। आजम के जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल पंजीकरण रद्द करने के बाद आयकर विभाग ने अब एक और नोटिस भेजा है। इसमें करोड़ों रुपये देने वाली 11 संदिग्ध फर्मों के पूरे पते, दान से संबंधित राशि, रसीद, बहीखाता, आयकर रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे गये हैं।

आय कर विभाग के द्वारा  सितम्बर 2023 में आजम खान और जौहर ट्रस्ट के विरुद्ध कार्यवाही प्रारम्भ की गई थी।  13 सितंबर 2023 को रामपुर, लखनऊ, गाजियाबाद,मेरठ, सहारनपुर, सीतापुर आदि नगरों और कस्बों में आजम खान और उससे सम्बद्ध लोगों के 30 से अधिक परिसरों पर छापे डाले  गए । तलाशी के बाद, विभाग ने ट्रस्ट से कथित अनियमितताओं के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा । अधिकारियों के अनुसार, ट्रस्ट निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा, जिसके कारण विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 12 ए/12 एबी के तहत जो, धर्मार्थ और शैक्षणिक ट्रस्टों को आयकर भुगतान से छूट प्रदान करती है,उसकी कर-मुक्त स्थिति रद्द कर दी। विभाग ने आगे आरोप लगाया कि रिसर्च हेतु आबन्टित भूमि और भवनों का उपयोग आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए एक सीबीएसई स्कूल चलाने के लिए किया गया था। ट्रस्ट की घोषित आय और उसके बैंक जमाओं के लगभग 59.25 करोड़ रुपये कम पाई गई।

जौहर ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी निर्माण पर करीब  46 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया, जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इसका मूल्यांकन करीब 494 करोड़ आंका। इस आधार पर आयकर विभाग ने आयकर छूट के लिए प्रदत्त जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण 23 जून 2026 को रद्द कर दिया गया। जौहर ट्रस्ट ने करोड़ों के दान मिलने के मामले में 11 फर्मों का जिक्र किया, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दे सका था। इसके बाद आयकर विभाग ने 24 जुलाई को ट्रस्ट को नोटिस भेजकर विस्तृत जानकारी मांगी है ।

विभाग ने ट्रस्ट पर और भी कई आरोप लगाए। जैसे ट्रस्ट ने फर्जी दान स्वीकार किए और ऐसे “नकली ट्रस्टी” नियुक्त किए जिन्हें ट्रस्ट की गतिविधियों के बारे में बहुत कम या बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। ट्रस्ट वास्तविक जन कल्याणकारी गतिविधियों को करने में विफल रहा; विश्वविद्यालय भवनों के निर्माण में सरकारी धन दुरुपयोग किया गया; शैक्षिक प्रयोजनों के लिए विशेष रूप से निर्धारित भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया; विश्वविद्यालय परिसर के भीतर समाजवादी पार्टी के कार्यालय का एक भवन भी बनाया गया इत्यादि ।
आय कर विभाग द्वारा आज़मख़ाँ पर बड़े पैमाने पर कर-वंचन, वित्तीय अनियमितताओं, और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से सम्बन्धित कोष के अनुचित उपयोग   का दोषारोपण किया गया है।

पुलिस विभाग द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और न्यायालय में आजमखान के विरुद्ध मुकदमों की जानकारी, संभावित काले धन को सफ़ेद किये जाने की खोज के लिए प्रवर्तन निदेशालय को भेजी गई है ।

आजम खान प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी हैं किन्तु प्रतीत होता है कि उन्होंने अपनी प्रतिभा और क्षमता का जिस तरह उपयोग किया किया है, समाज का एक बड़ा वर्ग उसे आपत्तिजनक मानता है।

जौहर यूनिवर्सिटी उनकी दृष्टि में उनके जीवन की उपलब्धि  है। इसके नामकरण से ही स्पष्ट है कि आजम खान मुसलमानों के प्रथकतावादी सोच के प्रतिनिधि हैं। इसके निर्माण के पीछे उद्देश्य अलीगढ़ जैसा ही संस्थान खड़ा करना है, जहां  सदियों से पनप रहे इस्लामी पृथकतावादी सोच को बल प्राप्त हुआ।

कतिपय इतिहासकार सय्यद अहमद खां, मोहम्मद इकबाल, मोम्मद अली जौहर या जिन्ना जैसे मुस्लिम नेतृत्व को मुसलमानों की अलगाव की निति के लिए  जिम्मेदार मानते हैं किन्तु असलियत में इसका जन्म तभी हो गया था जब दार-उल -हर्ब को दार-उल इस्लाम में बदलने का विचार प्रारम्भ हुआ।

भारत में ऐसे सोच का एक बड़ा स्तम्भ शेख़ अहमद सरहिंदी (1564-1624) हुआ था। आजम खान जैसे लोग उसी सोच की ज्वाला को बुझने नहीं देते हैं।

Topics: Rampur NewsSamajwadi PartyPanchjanya newsJauhar UniversityAzam KhanUttar Pradesh crime news
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