अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर दिल्ली प्रदेश (विद्यालय शिक्षा) इकाई के बैनर तले शिक्षकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री, केरलम के राज्यपाल तथा केरलम के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केरलम के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी सोशल साइंस फ्रीडम क्विज में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने पर शिक्षक श्री गुरु प्रसाद के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं वीर सावरकर
प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पालीवाल ने कहा कि वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए कठोर दंड तथा अंदमान की सेलुलर जेल में उनके कारावास का अध्ययन इतिहास का स्वाभाविक हिस्सा है। सावरकर पर प्रश्न पूछना न अपराध है, न अनुशासनहीनता और न किसी राजनीतिक मत का प्रचार। उनके विचारों से सहमति-असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को इतिहास से बाहर नहीं किया जा सकता।

प्रदेश महामंत्री डॉ.अजय कुमार सिंह ने कहा कि यदि संबंधित प्रश्नावली उप जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर पर अनुमोदन के बाद विद्यालयों में प्रसारित की गई थी, तो किसी कथित त्रुटि के लिए केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। प्रश्न की तैयारी, स्रोत, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई शिक्षक समुदाय में भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण पैदा कर सकती है।

उन्होंने कहा कि एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न को लेकर शिक्षक का निलंबन वैचारिक एवं राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका उत्पन्न करता है। शिक्षा को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना आवश्यक है। शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को किसी विचारधारा की ओर ले जाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रश्न करने, तर्क करने, प्रमाणों की जांच करने और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने के लिए सक्षम बनाना है।
किसी राजनीतक दल की संपत्ति नहीं स्वतंत्रता आंदोलन
शैक्षिक महासंघ ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल अथवा विचारधारा की संपत्ति नहीं है। गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, श्री अरविंद, सावरकर सहित असंख्य राष्ट्रभक्तों के योगदान से भारत की स्वतंत्रता की राष्ट्रीय गाथा निर्मित हुई है। विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं और प्रमुख व्यक्तित्वों का तथ्याधारित एवं समग्र अध्ययन कराया जाना चाहिए।

महासंघ ने यह भी कहा कि स्वतंत्र भारत में विभिन्न सरकारों और राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा वीर सावरकर को सार्वजनिक जीवन में ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार किया गया है। पोर्ट ब्लेयर स्थित हवाई अड्डे का नाम वीर सावरकर के नाम पर है, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया था तथा संसद भवन में उनका चित्र स्थापित है। ऐसे में विद्यालयी क्विज में सावरकर का नाम आ जाना गंभीर शैक्षिक अपराध कैसे बन गया, यह विचारणीय है।
शिक्षकों को भयमुक्त वातावरण मिलना जरूरी
महासंघ का स्पष्ट मत है कि प्रमुख व्यक्तित्वों और घटनाओं को इतिहास से हटाने के बजाय तथ्यों, प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, तर्कशीलता और राष्ट्रबोध विकसित करना है। शिक्षकों को भय और राजनीतिक दबाव से मुक्त वातावरण मिलना आवश्यक है।

धरना-प्रदर्शन के बाद महासंघ ने श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल एवं अविलंब वापस लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करने तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। धरना-प्रदर्शन में जिले के बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शैक्षिक महासंघ के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
















