
कार्यक्रम में पुष्कर सिंह धामी के साथ सम्मानित बुजुर्ग और अन्य वरिष्ठ जन
गत 14 अगस्त को हरिद्वार के प्रेम आश्रम में विभाजन विभीषिका स्मृति सम्मान समारोह आयोजित हुआ। ‘उत्तरांचल पंजाबी महासभा’ और उत्तराखंड संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। उन्होंने अविभाजित भारत में जन्म लेने वाले बुजुर्गों का सम्मान किया और उनकी यादों को सहेज कर रखने के लिए पंजाबी समुदाय की प्रशंसा की।
श्री धामी ने भावुक होते हुए कहा कि बंटवारे का दर्द न भूलेंगे और न ही भूलने देंगे। लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त, 1947 को एक ओर जहां देश आजादी का जश्न मना रहा था, वहीं दूसरी ओर देश के विभाजन का भी हमने दर्द सहा। देश का विभाजन भारत के लिए किसी विभीषिका से कम नहीं था। इस दर्द की टीस आज भी है, जो इसे झेलने वाले लोगों की आंखों को नम कर देती है।
उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन केवल एक भूभाग का विभाजन नहीं था, पीढ़ियों से साथ रह रहे लोगों के बीच नफरत और सांप्रदायिकता की लकीर खींच दी गई थी। वर्षों से साथ रहने वाले लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे, हर जगह क्रूरता नजर आ रही थी, जीवन मूल्यहीन हो गया था। मानव विस्थापन का इससे भयानक और विकराल रूप दुनिया में पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि भारत के बंटवारे ने सामाजिक एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया था।
विभाजन के दौरान वैमनस्य और दुर्भावना का दृढ़तापूर्वक सामना करने वाले, प्रत्येक व्यक्ति के साथ मेरी सहानुभूति है। हम सभी का यह दायित्व है कि हमारी युवा पीढ़ी, उस तथ्य को जाने कि यह आजादी हमने किन हालातों में प्राप्त की थी? उन्होंने कहा कि देश आज आजादी के अमृत वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इस अमृतकाल में हमारा कर्तव्य है कि हम देश को स्वतंत्र कराने वाले और देश के विभाजन की यातनाएं झेलने वाले मां भारती के प्रत्येक सपूत के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।