भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?
October 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

। इस दौरान सबसे दिल दहलाने वाली घटनाएं महिलाओं के साथ हुई। अनुमान के अनुसार 1 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। एक से दो लाख महिलाओं का या तो अपहरण हुए या फिर उन्हें जबरन पाकिस्तान में रोक लिया गया

Written byमुनीश त्रिपाठीमुनीश त्रिपाठी
Aug 15, 2026, 02:03 pm IST
inभारत
भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

14 अगस्त 1947 को भारतीय पुण्यभूमि खंडित हुई और पाकिस्तान बना। भारत विभाजन की विभीषिका इतनी गहरी थी जिसकी कल्पना आज भी रोंगटे खड़े कर देती है। विभाजन की भूमिका का बीज सबसे पहले 1909 में मारले मिंटो सुधार के तहत विधान परिषदों में मुसलमानों के लिये पृथक निर्वाचन अधिनियम में पड़ा था। पहले कांग्रेस ने इसका प्रखर विरोध किया, लेकिन 1916 में कांग्रेस ने लीग के साथ लखनऊ समझौते में स्वीकार कर लिया। यहीं से कांग्रेस ने मुस्लिम साम्प्रदायिकता के आगे घुटने टेक कर सैद्धांतिक स्वीकृत दे दी और मुस्लिम साम्प्रदायिकता के आगे भारत के खंडित होने तक लगातार झुकती रही ।

खिलाफत आंदोलन के बाद दंगे

सन् 1920 में असहयोग आंदोलन में तुर्की के अपदस्थ खलीफा के समर्थन में खिलाफत को भी इस आंदोलन में गांधी जी के प्रभाव में जोड़ दिया गया, जिसका भारतीय भूमि से कोई लेना-देना नहीं था। इंदुलाल याज्ञिक ने अपनी किताब ‘गांधी एज आई न्यू हिम’ के पेज 129 में लिखा कि “हमने गांधी जी यह सौदा कभी नहीं किया था कि हम उनके साथ किसी धार्मिक या धार्मिक राजनैतिक आंदोलन में शामिल होंगे।” आंदोलन की समाप्ति के बाद पूरे देश के छोटे-बड़े शहरों में दंगे हुए। मालाबार में तो मुस्लिम मोपलाओं ने हिंदुओ का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया। कांग्रेस कार्यसमिति में इस कुकृत्य की खुलकर निंदा नही हुईं। बाबा साहेब आंबेडकर ने अपनी किताब ‘पाकिस्तान औऱ भारत विभाजन ‘ के पेज 148 में लिखा कि महात्मा गांधी ने नरसंहार करने वाले मोपलाओं के बारे में कहा कि” मोपला धर्मभीरु वीर लोग हैं जो उनके विचार से धर्म सम्मत है।” पाकिस्तान के हिंदुओ ने सिंध को तत्कालीन बम्बई प्रान्त से अलग न करने की मांग को लेकर गांधीजी से कहा कि ऐसा करने से वे अल्पसंख्यक हो जाएंगे उनके जीवन पर पहले से अधिक खतरा हो जाएगा। इस पर गांधी जी ने 10 फरबरी 1940 के अपने हरिजन समाचार पत्र के द्वारा कहा, ” हिंदुओ को अपनी जानमाल की हिफाजत करने का तरीका खुद खोजना होगा। ” नतीजा सिंध, बंबई प्रान्त से अलग हुआ और हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक हो गए। उन पर हमलों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।

साम्प्रदायिकता के आगे गांधी जी विवश हुए

गांधीजी ने खेड़ा, चंपारण, असहयोग, सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वारा भारतीय जन समुदाय को स्वतंत्रता की चेतना से जोड़ दिया परन्तु साम्प्रदायिकता के आगे वह लगातार घुटना टेकते रहे। जिससे मुस्लिम लीग को ताकत मिलती गयी और वह लगातार मजबूत होती चली गई। जाने-माने इतिहासकार विपिन चंद्रा जिन्हें आमतौर पर गांधीवादी इतिहासकार माना जाता है, उन्होंने अपनी किताब ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ में गांधी युग की कांग्रेस पर साम्प्रदायिकता से लड़ने में असफल बताकर कांग्रेस की खुलकर आलोचना की। उन्होंने अपनी किताब भारत का स्वतंत्रता संग्राम में 353, 387, 395 पेज पर लिखा कि ” कांग्रेस ने साम्प्रदायिकता से संघर्ष नहीं किया और उसके मूल कारणों को नहीं समझा, जिससे मुस्लिम लीग और जिन्ना मजबूत होते गए। कांग्रेस स्वतंत्रता की चेतना का प्रसार तो कर सकी परन्तु राष्ट्र से नहीं जोड़ सकी खासकर मुसलमानों को । यह कांग्रेस की बड़ी कमजोरी थी।” भारतीय भूभाग को अलग होने और पाकिस्तान बनने की प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी नहीं हुई यह लंबे कुटिल, कुत्सित प्रयासों और राष्ट्रवादी विचारों की दीर्घकालीन असफलताओं के चलते हुआ है।

प्रोफेसर ए एन बाली ने क्या लिखा

अविभाजित भारत लाहौर के रहने वाले प्रोफेसर ‘ए एन बाली’ जिन्होंने खुद बंटवारे को देखा था । उन्होंने इसके पीछे की कुटिलताओं और राष्ट्रीय असफलताओं को भी देखा था। उन्होंने बंटवारे पर ‘नाउ इट कैन बी टोल्ड’ नामक पुस्तक लिखी है। उन्होंने इस किताब के पेज 34 में लिखा कि ” कैसे लाहौर जो कि हिन्दू बाहुल्य 1941 तक था । मुस्लिम लीग ने एक हिन्दू पार्षद के वोट के समर्थन के चलते लाहौर नगर निगम में बहुमत प्राप्त कर नगर निगम द्वारा ग्रामीण मुस्लिम इलाकों को मिलाकर लाहौर को मुस्लिम बाहुल्य बना दिया था। ” बंटवारे तय होने के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने अंतिम समय तक यह तय नही किया था कि लाहौर, कलकत्ता और दिल्ली पाकिस्तान में रहेगा या भारत में । हिंदुओं के बहुमत के कारण कलकत्ता और दिल्ली तो भारत को मिल गए परन्तु प्रभु श्रीराम के पुत्र लव का बसाया शहर लाहौर, हिंदू अल्पसंख्यक हो जाने के कारण पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। प्रोफेसर ‘बाली’ लिखते है कि जब तत्कालीन नेहरू कांग्रेस सरकार मुस्लिम दंगाइयों को रोक पाने में असफल थी आरएसएस कार्यकर्ताओं ने अपनी जान पर खेलकर न केवल हिंदू और सिखों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया बल्कि दंगाइयों से बलपूर्वक सशस्त्र मुकाबला कर उन्हें खदेड़ा भी। वह कहते हैं कि जान की परवाह किये बिना पंजाब के प्रत्येक मुहल्ले में उन्होंने मोर्चा संभाला और राहत कार्य करने के बाद में ही स्वयं पाकिस्तान छोड़ा। यहां तक कि तमाम कांग्रेसी लोगों ने भी अपने परिवार की सुरक्षा के लिए संघ कार्यकर्ताओं से ही गुहार की जिस पर संघ कार्यकर्ताओं ने उन्हें निराश नहीं किया।

मुस्लिम लीग तख्तापलट करना चाहती थी

लेखक गुरुदत भी विभाजन के चश्मदीद थे। उन्होंने ‘विश्वासघात’ और ‘देश की हत्या’ किताब लिखी। इसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आर्य समाज के कार्यकर्ताओं के अमूल्य योगदान की सराहना की। बंटवारे के बाद सितंबर 1947 में मुस्लिम लीग ने दिल्ली में भारी मात्रा में असलाह, बारूद इकठ्ठा कर दिल्ली सरकार का तख्तापलट करने की योजना बनाई थी। तब संघ के जागरूक कार्यकर्ताओं ने नेहरू और पटेल को इस आशय की सूचना पहुंचाई थी जिस पर सरकार ने छापा डालकर भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद जब्त कर लीग की योजना पर पानी फेर दिया था। संघ के तत्कालीन सरसंघचालक गोलवरकर जी ने विभाजन के दौरान हिंदुओं, सिखों की सहायता के लिए पंजाब का सघन प्रवास किया था।

तुष्टीकरण की नीति के चलते भारत का विभाजन

साम्प्रदायिकता से नतमस्तक होने और तुष्टीकरण की नीति के चलते भारत का दुखद विभाजन हुआ। जनमानस ने विभाजन की ऐसी विभीषिका झेली, जिसका वर्णन करना मुश्किल है। विभाजन के दौरान ब्रिटिश अधिकारी ‘मोसले’ जिसने विभाजन को देखा था, उसने बताया था कि पाकिस्तान से भारत में आने वाला एक जत्था 73 मील का था । ये लम्बे जत्थे इसलिये चलते थे क्योकि जत्थों में शामिल लोगों को लगता था कि बड़े जत्थे के साथ चलना उनके लिये ज्यादा सुरक्षाजनक हो सकता है। फिर भी हालात इतने बुरे थे पाकिस्तान के मुस्लिम बलवाई जत्थों पर हमला करके सामान, महिलाओं, युवतियों को लूट लेते थे फिर भी जत्था रुकता नहीं था और चलता ही जाता था। विस्थापित हो रहे परिजन और पीड़ित असहाय होकर हमेशा के लिये स्वजनों से बिछड़ जाते थे। विभाजन की विभीषिका का वर्णन किताब ‘फ्रीडम मिडनाइट चिल्ड्रन’ तथा लेखक गुरुदत्त की कई पुस्तकों में जिन्होंने विभाजन स्वयं झेला था सहित कई किताबों में वर्णित है । ज्ञात इतिहास में मात्र छह महीनों में इतनी बड़ी त्रासदी आधुनिक दुनिया में शायद ही कहीं हुई हो। हिटलर ने जरूर तीस लाख यहूदियों का कत्ल करवा दिया था परंतु उसे ऐसा करवाने में काफी समय लगा था। 14 अगस्त 1947को देश ने बंटवारे का दर्द झेला था। पाकिस्तान जहां इसे अपनी आजादी के दिन के रूप में मनाता है, वहीं भारत में अभी भी लाखों लोग हैं जिनके दिलों में बंटवारे का जख्म आज भी ताजा है। लाखों लोग अपना घर, परिवार और रिश्तेदार को छोड़कर भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से यहां आए।

सबसे दिल दहलाने वाली घटनाएं महिलाओं के साथ

देश के बंटवारे के समय करीब ढ़ाई करोड़ लोग दोनों तरफ से विस्थापित हुए। त्रासदी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान 15- 20 लाख लोग मारे गए। बंटवारे का दर्द लेकर लाखों लोग शरणार्थी बनकर भारत आए। इस दौरान सबसे दिल दहलाने वाली घटनाएं महिलाओं के साथ हुई। अनुमान के अनुसार 1 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। एक से दो लाख महिलाओं का या तो अपहरण हुए या फिर उन्हें जबरन पाकिस्तान में रोक लिया गया। सबसे ज्यादा प्रताड़ना हिन्दू समाज के वंचित वर्ग की हुई क्योंकि अज्ञानता, निर्धनता के कारण ज्यादातर ये पाकिस्तान से आ ही नहीं सके। उन्हें वहां के मुसलमानों ने अपनी गुलामी करवाने के लिये बंधक बना लिया था। बाबा साहेब आंबेडकर और गांधी जी ने पाकिस्तान से मार्मिक अपील भी की थी यह अलग बात है कि पाकिस्तान पर इस अपील का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था। यहां सवाल यह भी है कि अखंड भारत के प्रबल समर्थक समाजवादी पुरोधा डा. राममनोहर लोहिया के आज के अनुयाई समाजवाद का दम्भ भरने वाले क्या लोहिया जी के इस विचार का समर्थन करेंगे ? जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सबसे बड़ा सपना अखंड भारत की स्थापना का ही है। भारतीय भूभाग को अलग होने और पाकिस्तान बनने की प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी नहीं हुई, यह लंबे कुटिल प्रयासों और राष्ट्रवादी विचारों की दीर्घकालीन असफलताओं के चलते हुआ है।

 

Topics: विभाजन पर किताबेंकांग्रेस और भारत विभाजनराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमहात्मा गांधीविभाजन की विभीषिकाभारत का विभाजनविभाजन विभीषिकाभारत का बंटवारा
मुनीश त्रिपाठी
मुनीश त्रिपाठी
मुनीष त्रिपाठी पत्रकार, इतिहासकार और साहित्यकार हैं। हाल ही में प्रकाशित चर्चित पुस्तक 'आंबेडकर, हिंदुत्व और भारत' के लेखक। उन्हें उनकी पुस्तक' विभाजन की त्रासदी'के लिये यूपी हिंदी संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित "केएम मुंशी" पुरस्कार दिया गया है। औरैया जनपद प्रशासन ने उन्हें पत्रकारिता और साहित्य में 'औरैया रत्न' से विभूषित किया है। 'भरतपुर का सूरजमल' , the line which divided bharat अन्य प्रसिद्ध पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

पंचम धर्म संसद को संबोधित करते हुए श्री अशोक सिंहल

जन्मशताब्दी पर विशेष: कर्मयोगी अशोक जी

“भगवा ओढ़कर बदनाम करने की साज़िश?” – ABVP ने कनॉट प्लेस प्रदर्शन पर उठाए सवाल

भाई-बहन ने 100 उपनिषद लिखकर एक शानदार मिसाल कायम की है

पहले रामचरितमानस, अब 100 उपनिषद… जालोर के इन भाई-बहन की कहानी हर किसी को जाननी चाहिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहुंचीं शिंजो आबे की पत्नी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचीं शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से हुई चर्चा

राहुल गांधी, कांग्रेस नेता

‘कायरता की काफी दिलचस्प परिभाषा है, मिस्टर गांधी’, राहुल गांधी को Friends of RSS ने ‘कुछ अध्याय’ दिलाए याद

Veteran Actor Nana Patekar Passes Away RSS Chief Mohan Bhagwat Condolence Panchjanya

अभिनेता नाना पाटेकर का निधन: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी व सरकार्यवाह जी ने जताया शोक, RSS ने जारी किया संदेश

Load More

ताज़ा समाचार

ऊर्जा संघर्षविराम के बाद यूक्रेन में स्टारलिंक बंद: जेलेंस्की ने ट्रंप पर लगाया धोखा देने का आरोप

आज का श्लोक : न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।

आज का राशिफल

15 अक्टूबर राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल

एसीपी भगत ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराया मुकदमा

अभिजीत दीपके, रांका, सौरव दास और पत्रकार के खिलाफ ACP भगत ने दी शिकायत, SC/ST का केस दर्ज

पंचम धर्म संसद को संबोधित करते हुए श्री अशोक सिंहल

जन्मशताब्दी पर विशेष: कर्मयोगी अशोक जी

टिक्कर स्थित आश्रम, जहां सुरक्षित रखी गई मां शारदा की छतरी और चांदी का मुकुट

विस्थापन का दर्द और आस्था की वापसी: मां शारदा का छत्र और चांदी का मुकुट 37 साल बाद घाटी में फिर स्थापित

पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी

‘लाइव शो में ट्यूशन लीक हो गया’, भाजपा ने वीडियो शेयर ​कर राहुल गांधी की संवाद शैली पर निशाना साधा

JNU के मुख्य द्वार पर अभाविप कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन।

JNU में ABVP का प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की गिरफ्तारी की मांग

Alarming Wave Of One Piece: From Nepal To Bangladesh, FRANCE To India

Alarming Wave Of One Piece : देश अलग-अलग, लेकिन झंडा एक, सत्ता-विरोधी आंदोलन और अमेरिकी डीप स्टेट!

कल का पंचांग

कल का पंचांग: मां स्कंदमाता की पूजा, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies