हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान के शुद्धिकरण को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस की ओर से इसे वंचित विरोधी मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, शुद्धिकरण कराने वाले श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरे मामले को जातीय रंग देना वास्तविक उद्देश्य से भटकाने वाला है।
न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने कहा कि शुद्धिकरण का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। रामलीला मैदान में राजनीतिक कार्यक्रम के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं ने वहां सफाई की और इसके पश्चात यज्ञ का आयोजन किया। मैदान में रैली के बाद गंदगी और पेशाब से भरी बोतलें भी मिली थी। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान धर्म विशेष से जुड़े नारे लगाए जाने का भी आरोप लगाया।
गिरीश पांडे ने कहा कि शुद्धिकरण और यज्ञ को वंचित वर्ग का विरोधी बताना उचित नहीं है, क्योंकि स्वयं न्यास से जुड़े अनुसूचित जाति समाज के कई लोग इस आयोजन में शामिल रहे। आयोजन में अंकित पाल, नंदकिशोर आर्य, विनोद आर्य और मोहित आर्य समेत अनुसूचित जाति समाज के लोगों की सहभागिता रही।
यज्ञ में शामिल अंकित पाल ने कहा कि वे स्वयं अनुसूचित जाति समाज से आते हैं और धार्मिक स्थल की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित यज्ञ में सहभागी बने। झूठ बोलकर कांग्रेस ने पूरे समाज का अपमान किया है।
गिरीश पांडे ने कहा कि कांग्रेस को किसी भी आरोप को राजनीतिक मुद्दा बनाने से पहले आयोजन में शामिल लोगों और पूरे घटनाक्रम के तथ्यों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि मैदान की सफाई और धार्मिक परंपरा के अनुरूप यज्ञ करना था।
न्यास ने कांग्रेस से इस झूठ के लिए वंचित वर्ग से माफी मांगने की मांग की है क्योंकि इस संगठन से बहुत से दलित वर्ग से जुड़े लोग भी मौजूद थे।

















