रक्षा

भारत ने ओडिशा के चांदीपुर से अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया, क्या है इसकी खासियत?

भारत ने गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से अग्नि-4 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड के अधीन हुए इस परीक्षण में मिसाइल के सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर सही पाए गए। रेंज 3500-4000 किमी।

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कुलदीप सिंह

भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करता जा रहा है। इसमें DRDO बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में भारत ने बीते दिन गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। परीक्षण स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड के अधीन हुआ और इसमें मिसाइल के सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर्स सही निकले।

परीक्षण कैसे हुआ

मिसाइल को चांदीपुर से लॉन्च किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार लॉन्च पूरी तरह सफल रहा। इसमें मिसाइल की तैयारियां, उड़ान और लक्ष्य से जुड़े सभी पैरामीटर्स चेक किए गए। परीक्षण का मकसद मिसाइल की ऑपरेशनल रेडीनेस यानी युद्ध के समय इस्तेमाल के लिए तैयार होने की जांच करना था। मिसाइल प्रोडक्शन लॉट से रैंडम चुनी गई थी। DRDO ने लॉजिस्टिक्स सपोर्ट दिया।

स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड भारत के न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी का हिस्सा है। यह देश के न्यूक्लियर हथियारों और उनकी डिलीवरी सिस्टम का प्रबंधन देखता है।

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अग्नि-4 की क्या है खासियत

अग्नि-4 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी रेंज करीब 3500 से 4000 किलोमीटर तक है। यह दो स्टेज वाली सॉलिड प्रोपेलेंट मिसाइल है। यह न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के पेलोड ले जा सकती है। अधिकतम पेलोड क्षमता करीब 1000 किलोग्राम है। मिसाइल रोड-मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी जाती है। इससे इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और जल्दी तैनात किया जा सकता है। यह प्री-एम्प्टिव अटैक से बचने में मददगार है।

इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगा है। रिंग लेजर गायरो बेस्ड इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) की मदद से यह लक्ष्य पर काफी सटीकता से पहुंचती है। सर्कुलर एरर प्रॉबेबल 100 मीटर से कम बताया जाता है।

लंबाई करीब 20 मीटर और लॉन्च वेट लगभग 17 टन है। यह भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

पिछली टेस्टिंग

इससे पहले 6 सितंबर 2024 को भी अग्नि-4 का सफल परीक्षण चांदीपुर से ही हुआ था। उस समय भी सभी पैरामीटर्स वैलिडेट हुए थे। 4 अप्रैल 2024 को अग्नि-प्राइम नाम की नई जेनरेशन मिसाइल का फ्लाइट टेस्ट स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड और डीआरडीओ ने मिलकर किया था।

अग्नि सीरीज में अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 जैसी मिसाइलें पहले से शामिल हैं। अग्नि-4 इनके बीच की रेंज वाली मिसाइल है।

रणनीतिक महत्व

अग्नि-4 को भारत के पूर्वोत्तर इलाकों से लॉन्च करने पर मुख्य भूमि चीन के बड़े हिस्से तक पहुंच बताया जाता है। इसकी रेंज दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों को भी कवर करती है। यह मिसाइल डीआरडीओ द्वारा विकसित है। नियमित यूजर ट्रायल से यह सुनिश्चित होता है कि सिस्टम ऑपरेशनल कंडीशन में भरोसेमंद रहे। मोबाइल होने की वजह से इसे ट्रैक करना और टारगेट करना मुश्किल होता है।

परीक्षण के दौरान सीनियर DRDO अधिकारी और भारतीय नौसेना व वायुसेना के प्रतिनिधि मौजूद रहे। रक्षा सचिव और डीआरडीओ चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने भी मॉनिटरिंग की।

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