मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक बार फिर संदिग्ध विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई हैं। क्राइम ब्रांच द्वारा तीन महिलाओं और तीन बच्चों सहित 13 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई उन लगातार सामने आ रही घटनाओं की कड़ी है, जिनमें पिछले एक दशक से अधिक समय में मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी इस्लामिक नागरिकों के पकड़े जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये लोग भारत में कैसे पहुंचे, किन लोगों ने इन्हें शरण दी और क्या इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। दरअसल, क्राइम ब्रांच को खुफिया सूचना मिली थी कि शहर के कुछ सीमावर्ती और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके पास भारतीय नागरिकता या वैध निवास से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार सुबह तीन स्थानों पर एक साथ छापेमारी की और 13 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों में सात पुरुष, तीन महिलाएं और तीन नाबालिग बच्चे शामिल हैं। प्रारंभिक पूछताछ में वे आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र अथवा भारत में वैध रूप से रहने के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। फिलहाल उनकी नागरिकता, भारत में प्रवेश के तरीके, यहां रहने की अवधि तथा स्थानीय संपर्कों का सत्यापन किया जा रहा है।
बांग्लादेश के विभिन्न जिलों से जुड़े होने का दावा
पुलिस के अनुसार पूछताछ में इन लोगों ने स्वयं को बांग्लादेश के खुलना, ढाका और अन्य क्षेत्रों का निवासी बताया है। इनमें शकील खान, काजल खान, यूसुफ शेख, सलमा शेख, जमाल मुल्ला, जुम्मन मुल्ला, मोहम्मद मलिक, मोहम्मद नुबेर और रेहान खान सहित अन्य लोग शामिल हैं। इनके साथ तीन छोटे बच्चे भी मिले हैं।
फर्जी पहचान और स्थानीय नेटवर्क पर जांच का फोकस
पुलिस संदिग्धों के मोबाइल फोन, उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय संपर्कों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि यदि इनके पास फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य पहचान पत्र बने हैं तो उन्हें किसने तैयार कराया। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या कोई स्थानीय गिरोह या एजेंट इन्हें रोजगार, किराए के मकान अथवा पहचान उपलब्ध करा रहा था। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसे नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है जो अवैध घुसपैठियों को देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने का काम करते हैं।
डिटेंशन सेंटर भेजने की तैयारी
इस संबंध में ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में ये लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिक पाए जाते हैं, तो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डिटेंशन अथवा होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन को भी आवश्यक पत्र भेजा गया है।
अक्टूबर 2025 में भी हुआ था बड़ा खुलासा
यह पहला अवसर नहीं है जब ग्वालियर में इस प्रकार की कार्रवाई हुई हो। अक्टूबर 2025 में हरियाणा पुलिस से प्राप्त इनपुट के आधार पर ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र से आठ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया था। उस समय भी उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया था तथा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की जांच की थी। वर्तमान कार्रवाई को उसी श्रृंखला की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में समय-समय पर विभिन्न जिलों से अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। भोपाल में कई अवसरों पर फर्जी आधार कार्ड और किराए के मकानों में रह रहे संदिग्ध विदेशी नागरिकों को पुलिस ने हिरासत में लिया।इंदौर में दस्तावेजों की जांच के दौरान संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों तथा फर्जी पहचान पत्र तैयार कराने वाले गिरोहों का खुलासा हुआ।
जबलपुर और खंडवा में रेलवे तथा मजदूरी से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले कुछ संदिग्ध विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।रतलाम तथा बुरहानपुर जैसे सीमावर्ती संपर्क मार्गों पर भी समय-समय पर अवैध रूप से प्रवेश करने वालों के संबंध में जांच अभियान चलाए गए। अब ग्वालियर में अक्टूबर 2025 में आठ संदिग्ध बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी के बाद अब अगस्त 2026 की यह कार्रवाई राज्य की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में गिनी जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासन के सामने चुनौती
भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रणजीत सांगले कहते हैं, “मामला सिर्फ ग्वालियर में पकड़े गए 13 संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों तक सीमित नहीं है, देश भर से लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं और बड़े स्तर पर लगभग हर राज्य से घुसपैठिए पकड़े जा रहे हैं। हमारा संगठन पिछले 12 सालों से केंद्र सरकार से बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर करने की मांग कर रहा है, आज उसके परिणाम भी दिखते हैं, लेकिन इसके लिए भारत के मूल समाज के साथ विशेष समुदाय यानी कि भारतीय मुसलमानों को आगे आना होगा, ये बांग्लादेशी वास्तव में भारतीयों के रोजगारों पर कब्जा कर रहे हैं, इसके लिए एक व्यापक जनअभियान चलाए जाने की जरूरत है।”
अधिवक्ता सांगले का मानना यह भी है, “अवैध घुसपैठ सिर्फ कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसांख्यिकीय संतुलन, पहचान तंत्र की विश्वसनीयता और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग से भी जुड़ा मुद्दा है। यदि कोई विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेज बनवाकर वर्षों तक देश में रह रहा है, तो यह स्थानीय प्रशासन एवं प्रशासनिक तंत्र की कई स्तरों पर सामने आई कमजोरी भी है। इसलिए इस विषय को सभी को गंभीरता से लेना होगा।”
हालांकि वह यह भी मानते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों ने पिछले कुछ वर्षों में किराएदार सत्यापन, दस्तावेजों की डिजिटल जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संयुक्त अभियान तेज कर दिया है, जिसके कि देशहित में इन दिनों आ रहे परिणाम दिखाई दे रहे हैं। वहीं, भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गंगाधर लेंडे का कहना है कि देश में घुसपैठ का विरोध आमलोगों का विरोध बनना चाहिए, यह एक अभियान बने, तभी देश भर में जहां भी घुसपैठिए होंगे उसकी पहचान आसान हो सकेगी।













