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देश में हर साल अकेले तंबाकू उत्पाद लगभग 13.5 लाख लोगों की जान लील जाते हैं, WHO की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि 13.5 लाख टूटते-बिखरते परिवारों, दम तोड़ते सपनों और खिलने से पहले ही मुरझा जाने वाले चेहरों की अनकही दास्तान है। हम हर साल 13.5 लाख ऐसे मानव संसाधनों को खो रहे हैं जो राष्ट्र निर्माण और भारत के विकास में भागीदार हो सकते थे।
WHO के अनुसार वैश्विक स्तर पर तंबाकू से हर साल 80 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जिनमें से 13 लाख मौतें केवल सेकेंड हैंड स्मोक के कारण होती हैं। भारत में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या 26.7 करोड़ से अधिक है, और GATS-2 के अनुसार 28.6% युवा/व्यस्क किसी-न-किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें से हर साल 13.5 लाख लोग असमय मौत के मुँह में चले जाते हैं। आर्थिक मोर्चे पर देखें तो भारत को तंबाकू जनित बीमारियों के कारण सालाना 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है, जो GDP का लगभग 1% है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है: क्या तंबाकू की बिक्री से व्यवसाय करने वालों को होने वाला मुनाफा और सरकारों को मिलने वाला लगभग 53,000 करोड़ का कर-राजस्व, 13.5 लाख जिंदगियों और 1.77 लाख करोड़ के आर्थिक नुकसान से अधिक कीमती है? क्या तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 85% चित्रात्मक चेतावनी चस्पा कर देने मात्र से राज्य और समाज की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? यह एक ऐसा जहर है जिसे रंगीन पैकेटों में, चांदी की परत चढ़ाकर और OTT व सोशल मीडिया पर सरोगेट विज्ञापनों के सहारे सरेआम बेचा जा रहा है। COTPA-2003 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, नाबालिगों को बिक्री पर रोक और विज्ञापन पर पाबंदी जैसे तमाम कानून अक्सर कागजों से बाहर झांक ही नहीं पाते। हर गली, हर नुक्कड़, हर उम्र के लोगों के लिए सर्वसुलभ यह नशा -उत्पाद अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि भारत की पूरी स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता हुआ एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
समस्या केवल यह नहीं कि लोग इसके आदी हो गए हैं। असली समस्या हमारे नीतिगत, औद्योगिक और आर्थिक ढांचे में निहित है और व्यापक सामाजिक जागरूकता की कमी हैं? जब तक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर कठोर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक माँग घटाने के सारे प्रयास अधूरे रहेंगे। समाधान के सुझावात्मक पहलुओं पर गौर करें तो-
कर संरचना: WHO के अनुसार तंबाकू उत्पादों पर कर को कुल खुदरा मूल्य का 75% तक ले जाने से खपत में भारी कमी आती है। भारत में अभी यह 53% के आसपास है।
विकल्प और पुनर्वास: तंबाकू की खेती से जुड़े 60 लाख किसानों और बीड़ी उद्योग में कार्यरत 45 लाख श्रमिकों के लिए चरणबद्ध पुनर्वास नीति और वैकल्पिक आजीविका मिशन चलाना होगा। तभी हम तंबाकू मुक्त भारत बना सकते हैं।
कड़ा प्रवर्तन: ई-सिगरेट पर प्रतिबंध 2019 में लगा, पर हुक्का बार, हुक्का कैफे, पान-मसाला में तंबाकू मिलाना और ऑनलाइन बिक्री हर जगह धड़ल्ले से जारी है। एक शोध के अनुसार, आधुनिक हुक्का बार में एक घंटा हुक्का पीना लगभग 100 सिगरेट पीने के बराबर है।
युवा पीढ़ी को बचाना: वर्तमान युवा पीढ़ी, जिसमें लड़के-लड़कियाँ दोनों शामिल हैं, तेजी से निकोटीन पाउच, वेप और फ्लेवर्ड हुक्का के दलदल में धंसती जा रही है। देश में 13 से 15 वर्ष के 8.5% छात्र तंबाकू/नशा का सेवन करते हैं।
WHO की 2019 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में शराब के सेवन से हर साल लगभग 3.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है, जबकि तंबाकू उत्पादों के सेवन से मरने वालों का आँकड़ा इससे चार गुना अधिक है। देश में और भी अनेकों तरह के नशे है जो दुश्मन देशों की आतंकी साजिस की तरह है. ‘स्वस्थ भारत, समर्थ भारत, सक्षम भारत एवं विकसित भारत’ का सपना हम तभी साकार कर पाएंगे जब हम हर साल नशा/तंबाकू के कारण असमय काल के गाल में समाने वाले 13.5 लाख लोगों को बचा पाएँगे। इसके लिए केवल चेतावनी नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति, कड़ा कानून, आर्थिक पुनर्गठन और सामाजिक जागरूकता, चारों का समन्वय व सबकी साँझा हिस्सेदारी चाहिए। इन्हीं सब पहलुओं के मध्येनजर माननीय मोदी जी ने नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान की शुरुआत का आगाज 2 अगस्त से एक करोड़ युवाओं के संकल्प के साथ शुरू किया गया. देशभर में 28 हजार जगहों पर जागरूकता के कार्यक्रमों के साथ 10 हजार से अधिक जगहों पर युवाओं द्वारा शपथ ली जाएगी. हम सब जानते हैं कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं. काशी से उठा यह कल्याणकारी अभियान अब राष्ट्र अभियान बन युवाओं के मन को छूने वाला है. हम सबको नशे/तम्बाकू के सेवन से ना केवल खुद दूर रहना है बल्कि इस व्यापक सामाजिक अभियान का हिस्सा बनना है.
हमें अब और चुप्प एवं अन्य मौतों का गवाह नहीं बनना हैं । नशा मुक्त युवा व तंबाकू मुक्त भारत ही 2047 के विकसित भारत की प्रमुख शर्त है। पूरे देश मे 100 सप्ताह तक संकल्पों की यह यात्रा चलेगी. 100 रविवार देश में 100 मजबूत कदम साबित होगें. नशा मुक्त युवा व भारत अभियान की शुरुआत मोदी जी के नेतृत्व मे हो चुकी हैं. आज एक करोड़ युवाओं द्वारा यह शुभ संकल्प लिया हैं कि विकसित भारत के लिए नशे को ख़ारिज करना हैं और भारतीय युवा जीवन को नशा मुक्त बनाना है. हम सब जानते है कि युवा भारत की अमृत पीढ़ी है जो 2047 के विकसित भारत का रसपान करने वाली है. हम बखूबी जानते है कि हर तरह का नशा राष्ट्र कि शक्ति को कमजोर करता है, परिवार टूटते है और समाज पतन कि ओर जाता है. इसलिए हर सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक संस्था व संगठनों की जिम्मेदारी है कि वो इस नशा मुक्त युवा फोर विकसित भारत, अभियान का सक्रिय हिस्सा बने एवं नेतृत्व करे. “पी एम ने ठाना है, युवाओं को नशे से बचाना है “.
जय भारत
विकसित भारत
नशा मुक्त भारत