गत 21 जुलाई को रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम परिसर में शबरी वाचनालय का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने किया। उन्होंने कहा कि शबरी वाचनालय जैसी पहल समाज के उत्थान और संस्कृति के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने अत्यंत पिछड़ी जनजातियों के संरक्षण, उनकी संस्कृति के संवर्धन और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए सतत प्रयासों पर बल दिया। साथ ही उन्होंने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीरांगनाओं, विशेषकर रानी दुर्गावती के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। समारोह की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप ने की।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अतुल जोग मुख्य वक्ता थे। उन्होंने औपनिवेशिक मिथ्या प्रचार को चुनौती दी और बताया कि जनजातीय समाज पारस्परिक सहयोग, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण है।
श्री जोग ने आश्रम से निकली अनेक बालिकाओं के डॉक्टर, प्रोफेसर, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, सेना और महिला कमांडो के रूप में देश सेवा में योगदान का उल्लेख किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

















