अयोध्या। श्री राम सत्संग भवन धर्म मंडपम, मणिराम दास छावनी में संत मंडल अयोध्या धाम की संगोष्ठी गुरुवार को संपन्न हुई। संगोष्ठी के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मंच संचालन महंत श्री रामानन्द दास जी महाराज ने किया।
महंत डॉ. रामानन्द दास जी का संबोधन
संचालन करते हुए महंत डॉ. रामानन्द दास जी ने कहा कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना दिया। उनके कारण पूरे देश में अयोध्या का सम्मान बढ़ा है। प्रत्येक समाज में अच्छे-बुरे लोग होते हैं। श्रीराम जन्मभूमि के एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंग का दुष्प्रचार करके राजनीतिक लोगों ने देशभर में भ्रम फैला दिया है। परन्तु गोस्वामी जी ने कहा है कि-
“संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि बारि बिकार।”
संतजन नीर-क्षीर विवेक से जल का त्याग करके दुग्ध ग्रहण करते हैं। आज विरोधी तत्वों को अयोध्या और देश का विकास अच्छा नहीं लग रहा है। वे भांति-भांति के उपद्रव करते हैं। महापुरुष ऐसी शक्तियों को सफल नहीं होने देंगे। आगामी चुनाव में भी वे इन षड्यंत्रों को विफल करेंगे।

प्रस्तावना : अधिकारी श्री राजकुमार दास जी महाराज
अयोध्या धाम सप्तपुरियों में प्रथम मोक्षदा पुरी है। श्री अयोध्या धाम सात मोक्षदा पुरियों में मुख्यतम है। यह केवल आध्यात्मिक ही नहीं, अपितु मानवीय आदर्शों का भी केंद्र है। संत इसके अनादिसिद्ध प्रक्ता हैं। अयोध्या के पूज्य संत ही अयोध्या के गौरव के प्रमाण हैं। हमें अपनी पूर्वाचार्य-परंपरा के अनुरूप अपने इष्टधाम के गौरव बोध के लिए सतत सजग रहना ही चाहिए। यह कितना आश्चर्यजनक एवं त्रासद है कि जिनकी व्यवस्था में चोरी हुई, जो इस दुर्घटना के पीड़ित हैं, उन्हें ही अपराधी बनाने का खेल चल पड़ा।
यह वास्तव में श्रीराम मंदिर से संगठित और एकात्म हुए हिंदू समाज की आस्था को छलने का दुष्चक्र था, जिसमें विपक्षियों को काफी सफलता भी प्राप्त हुई। क्योंकि इस दुष्प्रचार को रोकने में हम-आप वैसे सक्रिय नहीं हो सके, जैसे विरोधी हुए। अभद्र टिप्पणियां, व्यक्तिगत लांछन तथा निराधार आरोपों के बवंडर ने सहज श्रद्धा को तार-तार करने का काम किया। हमें समझना होगा कि यह आंदोलन चोरी के विरुद्ध नहीं, बल्कि श्रीराम मंदिर से निर्मित हुई धार्मिक-सांस्कृतिक एकजुटता के विरुद्ध है। देश-दुनिया में बसे भारत-भाव के शत्रु हमारी धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता को आहत करने के लिए संसद से सड़क तक सक्रिय हैं। वास्तव में यह हमारे सचेत होने का समय है। उन्होंने तुलसीदास जी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा—
“जाके प्रिय न राम वैदेही, तजिए ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही।”
महंत राघवेश दास जी महाराज का संबोधन
अपने संबोधन में महंत राघवेश दास जी महाराज ने कहा कि आज के दौर में कुछ षड्यंत्रकारी श्रीराम मंदिर पर कुचक्र चला रहे हैं। वे लोग कभी कल्पना नहीं करते थे कि श्रीराम मंदिर का निर्माण होगा, लेकिन विहिप एवं आरएसएस के अथक प्रयत्न से यह संभव हुआ। चम्पत राय जी गलत नहीं हैं। हाँ, कुछ चूक हुई है, पर हमें एकजुट होकर सब ठीक करना है।
रामायणी श्री रामकृष्ण दास जी का वक्तव्य
रामायणी श्री रामकृष्ण दास जी ने कहा कि वास्तव में इस प्रकरण से अयोध्या की जो छवि बनी थी, उसमें कुछ विकृतियां आई हैं। उनके परिहार के लिए हम सबको लगना होगा। पाँच सदस्यीय संत-महंतों का धार्मिक समिति में चयन हुआ है। इससे संतों का नेतृत्व प्रमुख होगा और सभी विघ्न-बाधाएं दूर होंगी।

रामायणी श्री कमला दास जी का संबोधन
रामायणी श्री कमला दास जी ने कहा—
“काल सुभाव करम बरिआईं। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई॥”
अच्छे लोग भी कभी काल के प्रभाव से चूक जाते हैं। पर महापुरुष उस चूक को सुधार देते हैं। ट्रस्ट में जिन पर अंगुलियां उठाई जा रही हैं, वे निर्दोष हैं। दुष्प्रचार को दूर करने के लिए हमें संगठित होना होगा। संत समाज का नेतृत्व होने से सबका समाधान होगा।
महंत वैदेही वल्लभशरण जी महाराज का वक्तव्य
महंत वैदेही वल्लभशरण जी महाराज ने ट्रस्ट में संतचरणों के चयन पर सभी को साधुवाद देते हुए कहा कि जिन्होंने राम को कभी स्वीकार नहीं किया, वे आज राम मंदिर में महापुरुषों पर लांछन लगा रहे हैं। हमें ऐसे कालनेमियों को पहचानना चाहिए। हम सब सदैव रामभक्त सरकार के साथ रहे हैं और रहेंगे। विहिप और आरएसएस ने सभी संतों को एक मार्ग पर लाने का कार्य किया।

महंत शशिकांत दास जी महाराज का संबोधन
महंत शशिकांत दास जी महाराज, आंजनेय सेवा संस्थान ने कहा कि श्रीराम मंदिर के विषय में जो अनर्गल प्रलाप चल रहा है, वह पूर्णतया निराधार है। पंच परमेश्वर के माध्यम से इसे दूर करने का प्रयास चल रहा है। जिन्होंने रामजन्मभूमि के लिए संघर्ष किए, उन्हें ही आज कुचक्र चलाकर बदनाम किया जा रहा है। ऐसे दोषियों को किसी प्रकार से बख्शा नहीं जाएगा।
श्री रामदास जी महाराज (नाका हनुमानगढ़ी)
श्री रामदास जी महाराज ने कहा कि संवाद से बड़े-बड़े विवाद हल हो जाते हैं। उन्होंने धार्मिक समिति के सभी चयनित पाँचों महापुरुषों को हार्दिक बधाई दी। वे बोले कि आज अयोध्या के सभी धर्मावलंबी समाज को अपने संबंधों के आधार पर यहां के दूषित वातावरण को अच्छे विचारों द्वारा सुधारने की आवश्यकता है।
डॉ. भरतदास जी महाराज का वक्तव्य
डॉ. भरतदास जी महाराज (रानोपाली) ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की मर्यादा को धूमिल करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए हम सभी संत महापुरुषों को एक साथ एक विचार का संवहन करने की आवश्यकता है। हमें सुनी-सुनाई बातों पर मनन करके ही अपने विचार व्यक्त करने चाहिए। हमें व्यक्ति के संबंध में जान-समझकर ही वक्तव्य देना चाहिए। हमारी पूजा पद्धति श्रीरामानंद पद्धति के अनुसार नए सदस्यों के आने से सतत चलती रहेगी।

महंत गिरीश दास जी महाराज का संबोधन
महंत गिरीश दास जी महाराज, डांडिया मंदिर ने कहा कि आज हमें श्रद्धालुओं एवं धर्मानुरागी व्यक्तियों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। यह हम अयोध्यावासियों की नैतिक जिम्मेदारी है। चम्पत राय जी परम संत हैं। उन पर लगाए गए आरोप मिथ्या हैं। उन्होंने स्वयं की प्रेरणा से त्यागपत्र दिया। वे निःस्वार्थ भाव से श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में विगत पचास वर्षों से लगे हुए हैं। उन्होंने जनभावनाओं के अनुकूल श्रीरामलला के आगमन का पथ प्रशस्त करने में महती भूमिका निभाई। सभी ट्रस्ट पदाधिकारियों से निवेदन है कि रामलला दर्शन हेतु अयोध्यावासियों के आधार कार्ड को ही आधार बनाया जाए।
महंत मनीष दास जी महाराज का वक्तव्य
महंत मनीष दास जी महाराज, पत्थर मंदिर ने अत्यंत ओजस्वी वक्तव्य देते हुए कहा कि आज की बैठक का विचार बहुत पहले आ जाना चाहिए। श्री अयोध्या के संतों को विषम परिस्थितियों में वक्तव्य देने के बजाय मौन हो जाना ही बेहतर होगा। हमें अपने इष्टधाम के प्रति कदापि गलतबयानी नहीं करनी चाहिए। संतोष दुबे जैसे लोग हमारे आराध्य के वैभव के संवाहक संतों पर गलतबयानी करते हैं, यह ठीक नहीं है। अयोध्या में वही होगा जो अयोध्या का संत समाज चाहेगा। हम अपने आराध्य देव के लिए विहिप, आरएसएस एवं भाजपा की सकारात्मक भूमिका को कभी भुला नहीं सकते।

श्रीमहंत जनार्दन दास जी का संबोधन
श्रीमहंत जनार्दन दास जी (तुलसीदास छावनी) ने कहा कि अयोध्या धाम श्रीराम जन्मभूमि की घटना को मीडिया ने अनावश्यक प्रचार-प्रसार से बढ़ा दिया। यह घटना उतनी बड़ी नहीं है। हम रामजी के अनुरागी हैं। राक्षस हर युग में रूप बदलकर साधुवेश में संतों की बदनामी कराते रहते हैं। हम धर्म की रक्षा के लिए रामजी की शरण में कहीं भी रहें, शस्त्र-शास्त्र का त्याग नहीं करते। ट्रस्ट के विधिवत संचालन में संत-महापुरुषों को गुण-दोषों के आधार पर रखना चाहिए। उत्सवों आदि के समय इनका विशेष सहयोग लेना चाहिए। हमारे संत समाज के महापुरुषों को धर्मसभा के माध्यम से अग्रणी भूमिका में रखना चाहिए।
अन्य संतों के विचार
महंत परशुराम दास जी महाराज (हनुमत किला) ने कहा कि हमें सनातन और हिंदुत्व को बदनाम करने वालों के प्रति सजग रहना चाहिए। तथाकथित धर्मगुरुओं के लिए एक समिति का गठन कर कार्रवाई करनी चाहिए। मीडिया पर बोलने के लिए हमें व्यक्ति का निर्धारण करना चाहिए।
जयराम दास जी महाराज (श्रीराम आश्रम) ने कहा कि श्री रामानन्दीय परंपरा के अनुसार श्रीरामलला सरकार के सभी उत्सव मनाए जाएंगे। पूज्य संतों को ट्रस्ट ने धार्मिक समिति में लिया, इसका स्वागत है।
महंत श्री सत्यनारायण दास ने कहा कि स्वयं प्रभु भगवान श्रीराम जी ने व्यक्ति रूप में जीवन जीने का तरीका सिखाया। दानवी प्रवृत्तियाँ अति उत्साह के साथ भगवान से प्रेरित होकर सद्वृत्ति की ओर अग्रसर हों। हम एक जैसी बात ही करें, इससे सभी का कल्याण होगा।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत गौरी शंकर दास जी ने कहा कि जिनका सनातन धर्म एवं मंदिर से कभी संबंध नहीं था, वे आज मंदिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा कर रहे हैं। हम सभी उस महापुरुष के साथ हैं। जो अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है, हम सब एकजुट होकर उसका पुरजोर विरोध करेंगे।
श्री रामानुज दास जी महाराज (सीताकांत सदन) ने कहा कि हमें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। हम गुरु-शिष्य परंपरा के संवाहक हैं। जो भी आदेश-निर्देश आचार्यों का हो, हमें उसका पालन करना चाहिए, मनमाना बयान नहीं देना चाहिए।

श्री सत्येन्द्र दास जी (श्री सीताराम निवास कुंज) ने धर्म समिति के चयनित सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। अयोध्या में इस तरह की कुचर्चा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आज मीडिया के माध्यमों से अयोध्या को बदनाम किया जा रहा है। संत मंडल संगोष्ठी की बैठक पूर्व में ही होनी चाहिए थी।
महंत संजय दास (अखाड़ा परिषद अध्यक्ष) ने कहा कि मंदिर आंदोलन में प्रारंभकाल से ही श्री चम्पत राय के संघर्ष को आज तक भुलाया नहीं जा सकता। संतों की संगोष्ठी दो-तीन माह में होती रहनी चाहिए। अनर्गल प्रलाप करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
महंत मुरलीदास जी महाराज (हनुमानगढ़ी) ने मानस की चौपाई का संदर्भ देते हुए कहा—
“जिनकर मन इन सन नहिं राता। ते जनु बंचित किए बिधाता।”
जिनको श्रीराम जी से प्रेम नहीं, वे अभागे हैं। हमें हमारे जीवन में ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन प्राप्त हुए। इसके लिए संघ और विहिप के विचार परिवार को साधुवाद।
श्री राजकुमार दास जी महाराज, अधिकारी श्रीरामवल्लभ कुंज ने आह्वान करते हुए कहा कि हमें सनातन विरोधियों के बहकावे में नहीं जाना चाहिए। हमें सनातन के मान-बिंदुओं की सदैव रक्षा हेतु अग्रसर रहना चाहिए। हमने रामविरोधी विचारधारा का समय भी देखा है। संगठन ने समाज को जोड़ा है। मिथ्या आरोप से बचने की आवश्यकता है। जो चोर हैं, वे सलाखों के पीछे हैं। हमें भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए।

आचार्य मिथिलेशनन्दिनी शरण जी, श्री सिद्धपीठ श्री हनुमंत निवास ने कहा कि कहीं अग्निकांड होने पर यह पता किया जाता है कि अग्निशमन मंत्र काम कर रहा था या नहीं। हिंदू विरोधी शक्तियाँ सतत सक्रिय हैं। जब यह प्रवाद फैला तो तत्काल हम उसके प्रतिकार में सामने नहीं आ सके, जिससे मिथ्या प्रचार को बढ़ावा मिला। दुष्प्रचार से पूर्व हमें दृढ़ता से प्रतिवाद करना था। उन्होंने हाल ही में दिए अनुपम खेर के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि “चोरी होने पर चोर पकड़े जाते हैं, मालिक नहीं। परंतु राम मंदिर में सेवादारों पर ही आरोप लगाने का नाटक हो रहा है।” हमें छद्मवेश वाले धूर्तों से सावधान रहते हुए प्रवाद से बचना चाहिए। दान की वस्तु दाता की नहीं रह जाती, वह पाने वाले की हो जाती है। किंतु दुष्प्रचार के कारण दाताओं का चित्त व्याकुल हो गया और वे हिसाब माँगने का पाप करने लगे। असल में प्रतिकूलता केवल बल का ही नहीं, बल्कि विवेक का भी हरण करती है। संत श्रीराम जी की मर्यादाओं का अनुसरण करते हैं। धार्मिक समिति बनने से पूजा पद्धति में सुचारुता आएगी। मीडिया को भाव और वेश का अंतर नहीं पता है। वे बस कंटेंट खोजते हैं। एक नैरेटिव वार चल रहा है। उसकी पहचान होना आवश्यक है। हमें अयोध्या के स्वरूप की रक्षा हेतु समसामयिक विषयों पर मासिक बैठक कर विचार-विमर्श करना चाहिए। अयोध्या का एक स्वर होना चाहिए। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अयोध्या का पक्ष रखते हुए हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन
महंत कमलनयन दास जी महाराज, श्री मणिराम दास छावनी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जो हमेशा न्यायालय में रामजी के विरोध में साक्ष्य देते थे, वही आज राम मंदिर में चोरी के प्रति चिंतित हैं। चोरी नहीं हुई, विश्वासघात हुआ है। उन सभी को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। समय के साथ दूध का दूध और पानी का पानी होगा। समय आ गया है, हमें दुष्प्रचार पर ध्यान देकर स्वयं बचना और समाज को बचाना है। विदेशों से दुष्प्रचार और सनातन की असुरक्षा हेतु फंडिंग हो रही है। हमें संगठित होकर, विचार-विमर्श करके इस कुचक्र को विफल करना होगा।

संतों ने दुष्प्रचार के खिलाफ एकजुटता का आह्वान किया
श्रीराम जन्मभूमि में सामने आए चोरी के प्रकरण को लेकर देशभर में फैले दुष्प्रचार का पूज्य संतों ने पुरजोर प्रतिवाद किया। इस बारे में मीडिया एवं सोशल मीडिया में अनर्गल प्रलाप करने वाले वक्ताओं को आड़े हाथों लिया। संगोष्ठी में अयोध्या की एकता और सद्भाव का आह्वान करते हुए संतों ने मिथ्यारोप लगाने वालों को पहचानने और उनका बहिष्कार करने की बात भी कही। इस विशाल संत-सभा में सैकड़ों संत-महंत सम्मिलित हुए।











