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पंजाब फार्मेसी पेपर लीक कांड: 3.5 से 13 लाख में बिक रहे थे पेपर, 35 गिरफ्तार

पंजाब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा। 3.5 से 13 लाख रुपये लेकर उम्मीदवारों को वायरलेस डिवाइस से रियल-टाइम जवाब दिए गए। पुलिस ने 35 लोगों को गिरफ्तार किया, मास्टरमाइंड गुरमीत सिंह समेत अंतर-राज्यीय गैंग का भंडाफोड़।

Published by
राकेश सैन

पंजाब में फार्मेसी पेपर लीक कांड में खुलासा हुआ है कि यहां 3.5 से लेकर 13 लाख रूपए में फार्मेसी की परीक्षा के पेपर बीके थे। पंजाब पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसने कथित तौर पर रविवार को हुई फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों की मदद की थी। कुल 35 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें सात कथित आयोजक और 28 उम्मीदवार शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि यह ग्रुप परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों की मदद के लिए एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लाइव कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करता था। अधिकारियों के मुताबिक, बैटरी से चलने वाले 27 वायरलेस माइक्रो डिवाइस बरामद किए गए हैं। यह परीक्षा फरीदकोट और फिरोजपुर के केंद्रों पर आयोजित की गई थी। पुलिस ने बताया कि फिरोजपुर में परीक्षा देने वाले आयुष नाम के एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर प्रश्न पत्र की तस्वीरें लेने के लिए छिपे हुए पेन कैमरे का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि ये तस्वीरें व्हाट्सएप के जरिए हरियाणा के भिवानी में साजन को भेजी गई थीं।

जांचकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद साजन ने प्रश्न पत्र दीपक के साथ शेयर किया, जो फरीदकोट के सोसाइटी नगर में एक घर के अंदर बनाए गए अस्थायी कंट्रोल रूम से काम कर रहा था। दीपक और एक अन्य आरोपी मंजीत सिंह ने कथित तौर पर वायरलेस डिवाइस के जरिए परीक्षा केंद्रों के अंदर मौजूद उम्मीदवारों को जवाब भेजे। मास्टरमाइंड की पहचान हुई, पेपर लीक का कोई सबूत नहीं पंजाब पुलिस के अनुसार, फाजिल्का के संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज के कर्मचारी गुरमीत सिंह की पहचान इस पूरे ऑपरेशन के मुख्य व्यक्ति के तौर पर की गई है।

पुलिस ने बताया कि यह ग्रुप परीक्षा पास कराने में मदद का वादा करके उम्मीदवारों से 3.5 लाख रुपये से 13 लाख रुपये तक वसूलता था। कुछ उम्मीदवारों ने सिक्योरिटी के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए थे। अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी का यह ऑपरेशन बहुत अच्छी तरह से प्लान किया गया था। परीक्षा की सुबह, ग्रुप के सदस्य कथित तौर पर फरीदकोट-कोटकापुरा रोड पर एक होटल में इकट्ठा हुए, जहां उन्होंने उम्मीदवारों को वायरलेस डिवाइस बांटे। पुलिस ने फरीदकोट और फिरोजपुर से 28 उम्मीदवारों के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से नेटवर्क के सात संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में लिया है।

मामले से जुड़े अन्य लोगों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी जारी है। जांचकर्ताओं का कहना है कि अब तक प्रश्न पत्र लीक होने या परीक्षा अधिकारियों की मिलीभगत का कोई सबूत नहीं मिला है। जांच के अनुसार, धोखाधड़ी परीक्षा शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को रियल-टाइम में जवाब भेजकर की गई थी। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जा रही है। जांच जारी है।

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