पंजाब

Diljit Dosanjh की विवादित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, OTT पर दोबारा दिखाने वाली याचिका खारिज!

Diljit Dosanjh Satluj Movie Case: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिलजीत दोसांझ स्टारर विवादित फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिर से दिखाने की मांग वाली PIL पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

Published by
राकेश सैन

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ स्टारर विवादित फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिर से दिखाने की मांग वाली एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पिटीशन पर विचार करने से मना कर दिया।

एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह एक प्रॉक्सी लिटिगेशन लग रही है, जिसमें प्रोड्यूसर खुद चैलेंज के साथ आगे नहीं आए हैं।

बेंच ने कहा, “पीड़ित व्यक्ति को आगे आने दें।”

कोर्ट की टिप्पणी के बाद पिटीशनर ने पीआईएल वापस लेने का फैसला किया

कोर्ट की टिप्पणी के बाद, पिटीशनर की तरफ से सीनियर वकील ने पीआईएल वापस लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि डायरेक्टर खुद एक अलग पिटीशन के साथ कोर्ट जा सकते हैं।

स्वयंभू ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह की जिंदगी और मौत पर बनी फिल्म ‘खालरा’ को हाल ही में रिलीज़ होने के दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। इससे पहले, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने बिना बदलाव के थिएटर में रिलीज़ की मंजूरी देने से मना कर दिया था, जिसके बाद यह फिल्म तीन साल तक रुकी रही थी।

ऑनलाइन रिलीज़ के बाद ZEE5 से हटाई गई फिल्म, फिर सुर्खियों में आया मामला

ऑनलाइन रिलीज़ होने और बाद में ZEE5 से हटाए जाने के बाद से यह फिल्म सुर्खियों में बनी हुई है। आज कोर्ट एक लॉ स्टूडेंट और ZEE5 सब्सक्राइबर, शरवन सिंह की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने फिल्म को फिर से शुरू करने की मांग की थी। उनका कहना था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाए जाने से बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के बुनियादी अधिकार में रुकावट आ रही है।

याचिका में कहा गया है, “बिना किसी कानूनी आदेश, न्यायिक निर्देश या कानूनी अथॉरिटी के बताए फिल्म को अचानक हटाने से न सिर्फ भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1) के तहत जनता को जानकारी पाने और अपनी कला दिखाने का जो बुनियादी अधिकार मिला है, वह कम हुआ है, बल्कि इससे हजारों असली सब्सक्राइबर भी उस कंटेंट तक नहीं पहुंच पाए, जिसके लिए उन्होंने पहले ही पैसे दे दिए थे।”

केंद्र सरकार ने याचिका को बताया गैर-स्वीकार्य

लेकिन, यूनियन ऑफ इंडिया की तरफ से सीनियर एडवोकेट धीरज जैन ने कहा कि पिटीशन मेंटेनेबल नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि प्रोड्यूसर्स या ओटीटी प्लेटफॉर्म ने खुद बैन को चैलेंज नहीं किया था।

‘अन्याय के खिलाफ खड़े व्यक्ति की बायोपिक देखने का अधिकार है’

पिटीशनर की तरफ से सीनियर एडवोकेट गुरशरण कौर मान ने कहा कि उन्हें एक ऐसे आदमी की बायोपिक देखने का हक है, जो अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ।

कोर्ट ने अपनी अनिच्छा दिखाने के बाद, वकील ने कहा कि वे मूवी डायरेक्टर के टच में हैं और उनकी तरफ से भी पिटीशन फाइल कर सकते हैं।

एडवोकेट हाकम सिंह, अजयवीर सिंह रंधावा, श्रुति और अनमोल जीवन सिंह गिल ने भी पिटीशनर की तरफ से रिप्रेजेंट किया।

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