
हैदराबाद (भारत)। भारत की मेजबानी में तेलंगाना के हैदराबाद शहर में आयोजित 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम (15th BRICS Trade Union Forum) का सफल समापन हो गया है. 14 से 16 जुलाई 2026 तक चले इस तीन दिवसीय वैश्विक फोरम में ब्रिक्स देशों के श्रमिक संगठनों ने बदलते तकनीकी परिवेश में मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मसौदा घोषणा (Draft Declaration) जारी की है.
इस वर्ष के फोरम का मुख्य केंद्रीय विषय “सहयोग और लचीलापन, नवाचार के लिए निर्माण” रखा गया, जिसके तहत ब्रिक्स राष्ट्रों में उत्पादकता, श्रम अधिकार, सामाजिक न्याय और मज़दूर कल्याण को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई.
फोरम में तेजी से बढ़ रही डिजिटल प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था (जैसे गिग और ऑनलाइन वर्कर्स) में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा. ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम ने सदस्य देशों की सरकारों से पुरजोर अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के स्थापित मानकों के अनुरूप इन श्रमिकों के लिए सम्मानजनक कार्य (Decent Work), ट्रेड यूनियन अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी और व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करें.
इसके साथ ही, फोरम ने प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में बेहतर और सुरक्षित कार्य स्थितियों से संबंधित ऐतिहासिक ILO कन्वेंशन 2026 का पुरजोर स्वागत किया है.
आठवीं औद्योगिक क्रांति के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और तेजी से होते डिजिटलाइजेशन के कारण कार्यक्षेत्र का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है. फोरम ने इस तकनीकी प्रगति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत तय करने की वकालत की है:
महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को लेकर घोषणा पत्र में समान काम के लिए समान वेतन, नेतृत्व के समान अवसर और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की मांग की गई है. इसके साथ ही कामकाजी महिलाओं के लिए सस्ती चाइल्डकेयर (शिशु गृह) और बुजुर्ग देखभाल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया. कार्यस्थल पर होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा और उत्पीड़न को पूरी तरह रोकने के लिए ILO कन्वेंशन 190 को कड़ाई से लागू करने की अपील की गई है.
सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर फोरम ने सभी प्रकार के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज (Universal Social Security Coverage) की मांग उठाई. इसमें विशेष रूप से प्रवासी, असंगठित क्षेत्र, स्व-रोजगार, प्लेटफॉर्म और कृषि से जुड़े मज़दूरों को शामिल करने को कहा गया है. इसके अलावा, सोशल सिक्योरिटी लाभों की पोर्टेबिलिटी (एक देश से दूसरे देश में मज़दूरों के सामाजिक अधिकारों को बनाए रखना) की आवश्यकता पर भी बल दिया गया.
भविष्य की बदलती अर्थव्यवस्था के लिए री-स्किलिंग (Re-skilling), अप-स्किलिंग (Up-skilling) और लाइफ-लॉन्ग लर्निंग (जीवनपर्यंत शिक्षा) को अनिवार्य बताते हुए फोरम ने महिलाओं, युवाओं, दिव्यांगों और कमजोर वर्गों के लिए समान कौशल अवसरों की मांग की है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक विशेष ‘BRICS कौशल विकास नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
“जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रीन जॉब्स, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास में निवेश बढ़ाने की अपील की गई है। हालांकि, फोरम ने स्पष्ट किया कि इन पर्यावरण नीतियों का आर्थिक बोझ केवल मज़दूरों और स्थानीय गरीब समुदायों पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए विकसित देशों को अपने ‘जलवायु वित्त’ (Climate Finance) की प्रतिबद्धताओं को ईमानदारी से पूरा करना होगा।”
घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) सहित विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक संघर्षों और युद्ध की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई. फोरम ने सभी वैश्विक विवादों का अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर केवल संवाद और शांतिपूर्ण माध्यमों से समाधान निकालने का आह्वान किया है. इसके साथ ही ‘ब्रिक्स प्लस’ (BRICS Plus) सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.
अंतिम अपील और निष्कर्ष
फोरम के समापन पर सदस्य देशों के ट्रेड यूनियनों, श्रम मंत्रालयों, सामाजिक सुरक्षा संस्थाओं, ILO और ISSA के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने की अंतिम अपील की गई. एआई, डिजिटल कार्य और कौशल विकास के क्षेत्रों में निरंतर काम करने के लिए ‘BRICS ट्रेड यूनियन नेटवर्क’ बनाने का पूर्ण समर्थन किया गया. घोषणा पत्र का अंत एक सशक्त संदेश के साथ हुआ कि-
“ट्रेड यूनियनों की सामूहिक ताकत के बल पर ही पूरी मानवता के लिए एक उज्ज्वल और साझा भविष्य वाले वैश्विक समुदाय का निर्माण किया जा सकता है।”