भक्तों ने किए नवयौवन रूप में महाप्रभु के दर्शन, 15 दिन की प्रतीक्षा हुई समाप्त, भक्तों की आंखें हुई नम
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भक्तों ने किए नवयौवन रूप में महाप्रभु के दर्शन, 15 दिन की प्रतीक्षा हुई समाप्त, भक्तों की आंखें हुई नम

वार्षिक रथयात्रा से पूर्व होने वाली इस महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा के तहत लंबे इंतजार के बाद महाप्रभु के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 15, 2026, 05:38 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर। स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक चले अणसर (अणवसर) काल के उपरांत मंगलवार को महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और श्रीसुदर्शन ने अपने दिव्य नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। वार्षिक रथयात्रा से पूर्व होने वाली इस महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा के तहत लंबे इंतजार के बाद महाप्रभु के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। नियमित रूप से श्रीमंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह 15 दिनों का विरह मानो वर्षों की प्रतीक्षा जैसा रहा। जैसे ही गर्भगृह के द्वार खुले, महाप्रभु के नवयौवन स्वरूप के दर्शन कर अनेक भक्तों की आंखें नम हो गईं।

केवल दो घंटे 15 मिनट मिला नवयौवन दर्शन का अवसर
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद नवयौवन दर्शन के लिए केवल दो घंटे 15 मिनट का समय ही उपलब्ध हो सका। सीमित समय के कारण मंदिर परिसर और सिंहद्वार के बाहर बैरिकेड्स पर घंटों से प्रतीक्षा कर रहे हजारों श्रद्धालु दर्शन से वंचित रह गए।

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने दोपहर 2 बजे दर्शन प्रारंभ करने की योजना बनाई थी, लेकिन चतुर्दशी की नीतियों में विलंब होने के कारण कार्यक्रम लगभग तीन घंटे देर से शुरू हुआ। शाम 5 बजे परिमाणिक (विशेष) दर्शन प्रारंभ हुआ, जबकि लगभग आधे घंटे बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोला गया। शाम 7:15 बजे तक दर्शन जारी रहा, जिसके बाद नियमित मंदिर नीतियां प्रारंभ कर दी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जय-विजय द्वार खोला गया तथा भीतर काठ के निकट परिमाणिक दर्शन और साहाणमेला दर्शन की व्यवस्था की गई।

बारिश के बावजूद उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
दिनभर रुक-रुक कर बारिश होने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। अनुमान है कि सीमित अवधि के भीतर 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन किए। हालांकि, समय समाप्त होने के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। सामान्य दर्शन शुरू होने की घोषणा होते ही तीनों रथों के निकट एकत्र श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक सिंहद्वार बैरिकेड की ओर उमड़ पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।

भावुक कर देने वाला रहा महाप्रभु का पुनः दर्शन
नवयौवन दर्शन के साथ ही 15 दिनों तक चले अणसर काल का समापन हुआ। मंदिर परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के महाअभिषेक के बाद महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और अणसर गृह में विश्राम एवं उपचार करते हैं। श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के प्रथम दर्शन को अत्यंत भावुक क्षण बताया। कई भक्तों का कहना था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो महाबाहु स्वयं अपने भक्तों को आलिंगन देने के लिए बाहें फैलाए खड़े हों।
सुबह से देर शाम तक चली विशेष धार्मिक नीतियां

दिनभर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहा। सुबह 8:45 बजे झुण बाहर की नीति पूरी होने के बाद दत्त महापात्र सेवक सुबह 9:15 बजे बनकलागी सेवा के लिए मंदिर में प्रवेश किए। दोपहर 1:35 बजे खड़ी प्रसाद बीजे की नीति संपन्न हुई। इसके बाद चका अपसर, मंगल आरती, मैलम, अवकाश पूजा तथा दशावतार ठाकुर की बाहुड़ा बीजे जैसी परंपराएं संपन्न हुईं। शाम लगभग 4:45 बजे अणसर ताटी खोले जाने के बाद दक्षिण द्वार से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। सार्वजनिक दर्शन समाप्त होने के बाद मंदिर की नियमित दैनिक नीतियां पुनः प्रारंभ कर दी गईं।

15 दिनों तक चली महाप्रभु की गुप्त उपचार परंपरा
नीलाद्रि महोदय ग्रंथ के अनुसार उपचार के लिए कई गुप्त धार्मिक नीतियां संपन्न की जाती हैं। इनमें फूलुरी तेल, ओष लागी, दशमूल लागी, सर्वांग चंदन, राजप्रसाद बीजे, खली बीजे और खड़ी प्रसाद बीजे जैसी विशेष सेवाएं शामिल हैं। मंदिर परंपरा के अनुसार ये सभी अनुष्ठान स्नान पूर्णिमा के बाद महाप्रभु के स्वास्थ्य लाभ के प्रतीक माने जाते हैं। देर रात दत्त महापात्र सेवकों द्वारा संपन्न की जाने वाली बनकलागी सेवा के साथ रोष होम, यात्रांगी महास्नान, मैलम और तड़पलागी जैसी प्राचीन परंपराओं का भी विधिवत पालन किया गया।

नवयौवन दर्शन के सफल आयोजन के साथ अब रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। रथयात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा श्रीमंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर की वार्षिक यात्रा पर प्रस्थान करेंगे, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे।

रथयात्रा से पहले ओडिशा पुलिस की श्रद्धालुओं से विशेष अपील
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एस.के. प्रियदर्शी ने कहा कि महाप्रभु के नवयौवन दर्शन का आयोजन ओडिशा पुलिस और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन के समन्वित प्रयासों से शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि इस सफल आयोजन ने पुलिस और मंदिर प्रशासन की प्रभावी योजना और समन्वय को प्रदर्शित किया है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है। रथयात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की संभावना को देखते हुए उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने तथा केवल आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी प्राप्त करने की अपील की।

प्रियदर्शी ने कहा कि महाप्रभु के नवयौवन दर्शन का आयोजन ओडिशा पुलिस और मंदिर प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रथयात्रा को देखते हुए श्रद्धालु ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें तथा ओडिशा पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, चैटबॉट, मोबाइल ऐप और एसएमएस अलर्ट के माध्यम से ही प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करें। आपका सहयोग सभी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुगम और निर्बाध रथयात्रा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगा। ओडिशा पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन संबंधी निर्देशों का पालन करने तथा रथयात्रा से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील की है।

रथयात्रा के लिए पुरी प्रशासन ने तैयार की तकनीक आधारित यातायात प्रबंधन योजना
रथयात्रा के दौरान सुचारु यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुरी जिला प्रशासन ने इस वर्ष व्यापक तकनीक आधारित यातायात प्रबंधन योजना लागू की है। इस पहल का उद्देश्य ओडिशा सहित देशभर से रथयात्रा में शामिल होने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है।

यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन ने पुरी शहर में 30 निर्धारित पार्किंग स्थल चिह्नित किए हैं, जिनमें छह नए पार्किंग स्थल भी शामिल हैं। इन पार्किंग सुविधाओं का उद्देश्य रथयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों को व्यवस्थित रूप से समायोजित करना तथा शहर में यातायात का दबाव कम करना है। यातायात की प्रभावी निगरानी के लिए प्रशासन ने तीन प्रमुख स्थानों पर ड्रोन निगरानी की व्यवस्था की है। ड्रोन के माध्यम से यातायात की वास्तविक समय (रियल टाइम) में निगरानी की जाएगी, जिससे अधिकारियों को जाम की स्थिति का तत्काल पता लगाने, यातायात को नियंत्रित करने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी।

पुरी जिला पुलिस ने यातायात विभाग के साथ मिलकर अपनी डिजिटल व्यवस्था को भी और मजबूत किया है। इसके तहत एक समर्पित मोबाइल एप, केंद्रीकृत ट्रैफिक कंट्रोल रूम, व्यापक सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चैटबॉट तथा बल्क एसएमएस अलर्ट प्रणाली शुरू की गई है। इन तकनीकी माध्यमों के जरिए श्रद्धालुओं को रियल टाइम ट्रैफिक अपडेट, वैकल्पिक मार्गों की जानकारी, पार्किंग संबंधी सूचना और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

जिला प्रशासन ने विशेष रूप से भुवनेश्वर से पुरी आने वाले श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले जारी यातायात परामर्श (ट्रैफिक एडवाइजरी) का अध्ययन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं से निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करने, यातायात नियमों का पालन करने तथा पुलिस और प्रशासन का सहयोग करने का आग्रह किया गया है, ताकि रथयात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध बनी रहे।अधिकारियों ने विश्वास जताया है कि अत्याधुनिक तकनीक और समन्वित यातायात प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी उपयोग से भीड़ और यातायात का बेहतर प्रबंधन संभव होगा तथा रथयात्रा में शामिल होने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

Topics: Odisha NewsOdishaJAGANNATH PURI rath yatraPuri Rath Yatra 2026
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