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PoJK में बवाल पर भारत की हुंकार, MEA ने पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार; जानें पूरा मामला

पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) में पिछले कुछ समय से बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग महंगाई, बेरोजगारी, प्रशासन की लापरवाही और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।

Published by
Mahak Singh

पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) में पिछले कुछ समय से बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग महंगाई, बेरोजगारी, प्रशासन की लापरवाही और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। इसी बीच भारत ने इन हालात के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। भारत का कहना है कि वहां के लोगों पर लंबे समय से हो रहे अत्याचार और प्रशासनिक दमन के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

भारत ने पाकिस्तान को घेरा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि PoJK में हो रहे प्रदर्शन कोई अचानक हुई घटना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वहां के लोगों को कई वर्षों से बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है। उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर सख्ती की गई। भारत का आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। महिलाओं और बच्चों के साथ भी कठोर व्यवहार किया गया। इसके अलावा कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और जरूरी सामान जैसे खाद्य सामग्री और दवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। रिपोर्ट के अनुसार, कई लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार होता है। अगर लोगों की आवाज दबाई जाएगी तो हालात और बिगड़ सकते हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह PoJK में हो रही घटनाओं पर ध्यान दे और पाकिस्तान को इसके लिए जवाबदेह ठहराए। भारत का लंबे समय से यह कहना रहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान नहीं करता और उनकी आजादी को सीमित करता है। प्रेस वार्ता के दौरान भारत ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही जरूरी है। भारत का मानना है कि यह वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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