क्या अंग्रेजी भारतीय भाषा है? त्रिभाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, जानिए पूरा मामला
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क्या अंग्रेजी भारतीय भाषा है? त्रिभाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, जानिए पूरा मामला

सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया है। नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जबकि तीसरी भाषा अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषा हो सकती है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jul 15, 2026, 10:22 am IST
inभारत

देश में नई शिक्षा नीति के तहत लागू की गई सीबीएसई की त्रिभाषा नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस नीति को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी भाषा को सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा माना जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख तय कर दी।

भाषा नीति पर सवाल

सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया है। नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जबकि तीसरी भाषा अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषा हो सकती है। सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुभाषी बनाना, भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना और देश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी और छात्र अपनी पसंद के अनुसार भाषा का चयन कर सकेंगे। हालांकि, इस नीति के विरोध में कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में सभी भारतीय भाषाओं के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कई भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ऐसे में छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने का अधिकार तो मिलेगा, लेकिन संसाधनों की कमी उनके विकल्पों को सीमित कर सकती है। अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि जो छात्र वर्षों से किसी विशेष भाषा का अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें नई व्यवस्था के कारण भाषा बदलनी पड़ सकती है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी।

त्रिभाषा फॉर्मूले की अवधारणा नई नहीं है। इसे सबसे पहले 1964-66 के शिक्षा आयोग ने प्रस्तावित किया था और बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से इसे अपनाया गया। नई शिक्षा नीति 2020 ने इसी व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देते हुए भारतीय भाषाओं के संरक्षण और बहुभाषी शिक्षा को प्राथमिकता दी है। एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में सहायक होता है। साथ ही विभिन्न भाषाओं की समझ राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को भी मजबूत करती है। लेकिन इस उद्देश्य को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि सभी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, पर्याप्त अध्ययन सामग्री और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नीति पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन यह भी संकेत दिया है कि भाषा चयन, स्थानीय भाषाओं की परिभाषा और संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। आने वाले समय में अदालत का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि त्रिभाषा नीति किस स्वरूप में लागू होगी।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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