मूर्खों की संगति, टॉक्सिक कल्चर और झूठे दोस्तों से परेशान हैं? मानसिक शांति का अचूक मंत्र है यह श्लोक
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मूर्खों की संगति, टॉक्सिक कल्चर और झूठे दोस्तों से परेशान हैं? मानसिक शांति का अचूक मंत्र है यह श्लोक

सुभाषितम् में पढ़ें आज का श्लोक

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 14, 2026, 06:00 am IST
inधर्म-संस्कृति

सुख-सुविधाओं से भरे महल में मूर्खों के साथ रहने से बेहतर है कि एकांत में रहें। जीवन की दिशा भौतिक सुखों से नहीं, बल्कि वैचारिक संगति से तय होती है। इस पर पढ़ें आज का श्लोक

वरं पर्वत-दुर्गेषु भ्रन्तं वनचरैः सह।
न मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेष्वपि ।।

भावार्थ-

पहाड़ों के स्थानों में वनचरों (जंगली जानवरों) के साथ घूमना अच्छा है, किन्तु मूर्खों के साथ इन्द्र के महलों में भी रहना अच्छा नहीं है।

आज क्यों है इसका महत्व

आज के डिजिटल,आभासी और कॉरपोरेट के युग में यह श्लोक प्रासंगिक है। सोशल मीडिया की ट्रोलरों की भीड़ (वर्चुअल मूर्खता) और दफ्तरों के टॉक्सिक वर्क कल्चर में घिरे रहने से बेहतर है कि एकांत चुनें और प्रकृति के करीब रहें। इससे मानसिक शांति तो मिलेगी ही, नए विचार भी आएंगे। भोग-विलास कभी भी कुसंगति का जहर कम नहीं कर सकता है।

Topics: आज का श्लोकइन्द्रवनचरमूर्खमहलमानसिक शांतिमूर्खों की संगतिजंगली जानवरपहाड़प्रकृति
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