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Explainer: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता बनेगा ‘गेम चेंजर’, इन क्षेत्रों में बढ़ेगा सबसे अधिक व्यापार

चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की विदेश नीति का केंद्र अब बहुत विस्तारित हो गया है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी — edited by Lalit Fulara
Jul 13, 2026, 01:00 pm IST
inविश्लेषण

चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की विदेश नीति का केंद्र अब बहुत विस्तारित हो गया है। आर्थिक कूटनीति, वैश्विक निवेश, तकनीकी सहयोग के साथ मुक्त व्यापार और विश्वसनीय सप्लाई चेन का निर्माण आज की जरूरत है, जिसके अनुरूप ही इन दिनों भारत की विदेशनीति कार्य करते हुए देखी जा सकती है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई वार्ता में रक्षा के साथ ही शिक्षा, कृषि और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों के साथ-साथ व्यापार और निवेश को जिस प्राथमिकता से स्थान मिला, उसने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच परस्पर तेज आर्थिक विकास होगा। आर्थिक मामलों के विश्लेषक, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रो. मनोज पूनिया इस यात्रा को लेकर कहते हैं, “प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा इसी परिवर्तन का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

चार दशक बाद हुई इस यात्रा में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया और वर्ष 2030 तक सहयोग का विस्तृत रोडमैप तैयार किया। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, कृषि, नवाचार, समुद्री सहयोग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे 18 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है।” प्रो. पूनिया इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित करते हैं कि भारत और न्यूज़ीलैंड के आर्थिक संबंध अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़े भविष्य की संभावनाओं की ओर स्पष्ट संकेत देते हैं। दिसंबर 2025 तक दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.95 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर तक पहुंच चुका था। इसमें न्यूज़ीलैंड का भारत को निर्यात 2.03 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर रहा। भारत आज न्यूज़ीलैंड के लिए तेजी से उभरते निर्यात बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में यह महत्व और बढ़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा, “दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक इस व्यापार को लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। निश्चित ही यह निर्णय दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक साझेदारी में बदलने की रणनीति है। आज भारत के पास राजनीतिक स्थिरता, विशाल घरेलू बाजार, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता, डिजिटल अवसंरचना और कुशल मानव संसाधन का ऐसा संयोजन है, जोकि वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। न्यूज़ीलैंड के साथ कृषि मूल्य शृंखला, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन और निर्यात अवसंरचना में सहयोग इस व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यदि दोनों देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हैं, तो भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।”

साथ में प्रो. मनोज पूनिया का मानना यह भी है कि लगभग ढाई लाख भारतीय मूल के लोग आज न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था का सक्रिय हिस्सा हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, वित्तीय सेवाओं और उद्यमिता में उनकी उल्लेखनीय भूमिका है। यही समुदाय दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और सांस्कृतिक विश्वास का सबसे प्रभावी सेतु भी बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों को भारत की विकास यात्रा का सहभागी बताया, जबकि प्रधानमंत्री लक्सन ने भी भारतीय समुदाय के योगदान की खुलकर सराहना की। स्पष्ट है कि आने वाले समय में यही समुदाय दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

मुक्त व्यापार समझौता बनेगा ‘गेम चेंजर’

मध्य प्रदेश उच्चशिक्षा विभाग में वित्त के प्रोफेसर डॉ. बीएमएस भदौरिया का कहना है, “भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बनी सहमति इस पूरी यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क में कमी या समाप्ति का प्रावधान है, जबकि बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान और प्रतिस्पर्धी पहुंच मिलेगी।”

उन्होंने कहा, “समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही न्यूज़ीलैंड के लगभग 57 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने का प्रावधान है, जबकि आगे चलकर यह दायरा और विस्तृत होगा। जिसमें कि भारतीय उद्योग जगत के लिए इसका महत्व अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इससे भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, रसायन, तैयार खाद्य पदार्थ, आईटी सेवाएं और लघु एवं मध्यम उद्योगों के उत्पादों को एक विकसित और उच्च क्रय-शक्ति वाले बाजार तक अधिक सहज पहुंच मिलेगी।”

किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सबसे अधिक व्यापार?

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन की वार्ता के दौरान जिन क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई, वे आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की दिशा तय करेंगे। कृषि और खाद्य प्रसंस्करण सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। न्यूज़ीलैंड डेयरी तकनीक, पशुपालन, बागवानी और कृषि अनुसंधान में विश्व के अग्रणी देशों में है, जबकि भारत विशाल कृषि बाजार और खाद्य प्रसंस्करण क्षमता रखता है।

वानिकी और लकड़ी उद्योग पहले से ही दोनों देशों के व्यापार का बड़ा हिस्सा हैं। वर्ष 2025 में न्यूज़ीलैंड से भारत को वानिकी उत्पादों का निर्यात लगभग 399 मिलियन न्यूज़ीलैंड डॉलर रहा। इसके अलावा सेब, कीवीफ्रूट, ऊन, एल्यूमिनियम और लौह-इस्पात भी प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल रहे। दूसरी ओर भारत से न्यूज़ीलैंड को फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स, रसायन और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। एफटीए के बाद इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार की संभावना व्यक्त की जा रही है।

भारत बाजार से आगे निवेश का गंतव्य है

प्रोफेसर अनिल शिवानी, वाणिज्य एवं प्रबंधन उच्च शिक्षा मध्य प्रदेश का कहना है, “प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण संदेश वैश्विक निवेशकों के लिए भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूज़ीलैंड के उद्योग जगत को भारत के अवसंरचना विकास, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, जल प्रबंधन, विमानन, स्मार्ट शहरों और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी पूरे विश्व में भारत का परचम लहरा रहे हैं। उनकी इन विदेश यात्राओं का आर्थिक महत्व होने के साथ बहुत अधिक कूटनीतिक महत्व भी है।”

वे कहते हैं, “आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। विशाल घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था और लगातार सुधरता कारोबारी वातावरण उसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहा है। यही कारण है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और नवाचार का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

प्रोफेसर अनिल शिवानी यह भी कहते हैं, “प्रधानमंत्री मोदी संपूर्ण विश्व में भारत का परचम फहरा रहे हैं। वे जहां भी जा रहे हैं, वहां भारत का मस्तक ऊंचा नहीं हो रहा बल्कि उस देश में रह रहे अप्रवासी भारतीय भी अपने देश के प्रधानमंत्री को अपने नजदीक पाकर के गर्व महसूस कर रहे हैं। वे जिस तरह से सोचते हैं, उसका परिणाम यह है कि विश्व समुदाय में उनके प्रति आदर-सम्मान से अधिक श्रद्धा का भाव प्रवल हुआ है। भारत आज हर विपदा में दुनिया के प्रत्येक देश के लिए मदद के लिए खड़ा हो जाता है, यह मोदीजी के नेतृत्व का ही परिणाम है। निश्चित ही उनके कार्यों से भारत की विश्व स्वीकार्यता निरंतर बढ़ रही है।”

कृषि, डेयरी और एग्री-टेक में खुलेगा अरबों डॉलर का नया बाजार

इसी संदर्भ में जीवाजी विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफेसर एसके सिंह का कहना है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग होने के बावजूद एक-दूसरे की पूरक हैं। न्यूज़ीलैंड विश्वस्तरीय डेयरी तकनीक, पशुधन प्रबंधन, कृषि अनुसंधान, बागवानी और खाद्य गुणवत्ता मानकों के लिए जाना जाता है, जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक, विशाल कृषि बाजार और तेजी से बढ़ते खाद्य प्रसंस्करण उद्योग वाला देश है। दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि कृषि अनुसंधान, जल प्रबंधन, डेयरी विज्ञान, जैव सुरक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि नवाचार में संस्थागत सहयोग बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादकता और निर्यातोन्मुख खेती का लाभ मिल सकता है। दूसरी ओर न्यूज़ीलैंड की कंपनियों को भारत जैसे विशाल बाजार तक पहुंच मिलेगी। यह साझेदारी कृषि को परंपरागत उत्पादन से आगे बढ़ाकर वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है।

इन क्षेत्रों में भी हुए हैं, प्रभावी अनुबंध

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बन चुकी है। यूपीआई, डिजिटल भुगतान प्रणाली, आधार आधारित सेवाएं, स्टार्टअप इकोसिस्टम और फिनटेक नवाचार ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यही कारण है कि न्यूज़ीलैंड ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिनटेक और नवाचार आधारित उद्योगों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में विशेष रुचि दिखाई है।

इसके साथ ही नई साझेदारी के तहत उच्च शिक्षा, कौशल विकास, शोध, व्यावसायिक प्रशिक्षण और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था, सुरक्षित समुद्री मार्गों और निर्बाध व्यापार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसका सीधा लाभ वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को मिलेगा।

भारत की वैश्विक आर्थिक छवि को मिली नई मजबूती

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि भारत अब विश्व मंच पर भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में स्थापित हो रहा है। न्यूज़ीलैंड जैसे विकसित और उच्च आय वाले देश का भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक निवेशक और विकसित अर्थव्यवस्थाएं भारत को भविष्य की विकास गाथा का प्रमुख केंद्र मान रही हैं। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विभिन्न वैश्विक आर्थिक संस्थानों द्वारा लगातार भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया जा रहा है। ऐसे समय में न्यूज़ीलैंड के साथ यह नई साझेदारी भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को और मजबूत करती है।

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डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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