धर्म-संस्कृति

महाप्रभु जगन्नाथ के मामा घर से आई विशेष औषधीय भेंट: बीमार भांजे के लिए पहुंचा अणसर भार, जानिए कटक के माधव मंदिर का नाता

स्नान पूर्णिमा के बाद बीमार पड़े महाप्रभु श्री जगन्नाथ के लिए उनके मामा घर (कटक के माधव मंदिर) से विशेष औषधीय 'अणसर भार' भेंट भेजी गई है। जानें इस अनूठी मानवीय लीला का पूरा सच।

Published by
Shivam Dixit

पुरी / कटक (ओडिशा)। ओडिशा के पावन श्री क्षेत्र धाम (पुरी) में एक बार फिर महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की अलौकिक और हृदयस्पर्शी मानवीय लीला का जीवंत रूप देखने को मिल रहा है. जेठ मास की स्नान पूर्णिमा पर 108 घड़ों के शीतल जल से भव्य स्नान करने के उपरांत महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा बीमार (ज्वर से पीड़ित) हो गए हैं.

इस दिव्य बीमारी के चलते वर्तमान में प्रभु के सार्वजनिक दर्शन पूरी तरह से बंद हैं और राजवैद्य समुदाय की देखरेख व सलाह से श्री मंदिर के गुप्त ‘अणसर गृह’ (Anasar Ghar) में उनका विशेष उपचार चल रहा है. इस बीच, महाप्रभु के बीमार होने की सूचना मिलते ही उनके मामा घर से भांजे-भांजियों का हालचाल जानने और उन्हें शीघ्र स्वस्थ करने के लिए विशेष औषधीय भेंट पुरी पहुंची है.

कटक के प्रसिद्ध माधव मंदिर से आई फल और कंदमूल की विशेष ‘अणसर भार’ भेंट

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कटक जिले के नियाली ब्लॉक में स्थित प्रसिद्ध माधव मंदिर को महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी का ‘मामा घर’ कहा जाता है. जब माधव मंदिर के सेवादारों और प्रबंधन को यह ज्ञात हुआ कि उनके भांजे-भांजी अस्वस्थ हैं और अणसर गृह में उपचाराधीन होने के कारण किसी भी प्रकार का सामान्य अन्न प्रसाद ग्रहण नहीं कर रहे हैं, तो मामा पक्ष की स्वाभाविक चिंता जाग उठी.

मामा घर के वैद्यों और सेवादारों ने तुरंत बीमार भांजे-भांजियों के लिए विशेष औषधीय पथ्य सामग्रियां, फल और कंदमूल एकत्र किए, जिसे स्थानीय ओड़िया संस्कृति और परंपरा में ‘अणसर भार’ (Anasar Bhaar) भेंट कहा जाता है. माधव मंदिर के सेवकों द्वारा यह विशेष भार पूरी निष्ठा के साथ पुरी स्थित श्री मंदिर पहुंचाया गया है.

मठ-मंदिरों का अटूट रिश्ता और जगन्नाथ संस्कृति की मानवीय लीला

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का ओडिशा और देश के विभिन्न प्रमुख मठ-मंदिरों के साथ सदियों पुराना और अटूट आध्यात्मिक रिश्ता है. महाप्रभु के दैनिक अनुष्ठानों से लेकर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा (Rath Yatra) तक में इन विभिन्न धार्मिक संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता होती है. इसी कड़ी में नियाली के माधव मंदिर से भेजी गई यह भेंट इस पवित्र अंतर्संबंध को और प्रगाढ़ करती है.

“महाप्रभु की इस मानवीय लीला की सबसे अनुपम विशेषता यह है कि भगवान को बीमार मानकर स्थानीय क्षेत्र के आम नागरिक और किसान भी अपने-अपने वाड़ी-बगीचों में प्राकृतिक रूप से उगाए गए केला, नारियल, अनानास सहित तरह-तरह के ताजे फल स्वतः ही मंदिर में भेंट करने चले आते हैं। भक्त खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें अपने आराध्य की बीमारी के समय सेवा का अवसर मिल रहा है।”

ऐसी सुदृढ़ धार्मिक मान्यता है कि मामा घर से भेजे गए इन पवित्र और औषधीय फल-कंदमूलों का सेवन करने के बाद प्रभु श्री जगन्नाथ जी का ज्वर (बुखार) बहुत जल्द शांत होगा और वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे. स्वस्थ होने के उपरांत प्रभु ‘नवयौवन दर्शन’ के माध्यम से भक्तों को पुनः दर्शन देंगे और फिर रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे.

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