लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जहां तापमान में गिरावट लाकर लोगों को सुकून दिया, वहीं दूसरी ओर जलभराव, सड़क धंसने, पेड़ गिरने, वज्रपात और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में हालात ऐसे बन गए कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।
कई राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त
दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में गुरुवार सुबह हुई तेज बारिश ने शहरों की व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे लंबा जाम लग गया और लोगों को घंटों तक परेशान होना पड़ा। दिल्ली के भोगल अंडरपास में पानी भरने से एक लग्जरी कार फंस गई, जबकि ईस्ट ऑफ कैलाश और रोहिणी में पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। गाजियाबाद में बारिश के बीच दो दर्दनाक हादसों ने सभी को झकझोर दिया। घर के बाहर जमा पानी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई, जबकि इंदिरापुरम में ट्रांसफार्मर में करंट उतरने से एक चौकीदार की जान चली गई। वहीं वसुंधरा सेक्टर-13 में सड़क धंसने से एक कार गड्ढे में समा गई और कई सोसायटियों में जलभराव के कारण सैकड़ों वाहन खराब हो गए।
उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और वज्रपात से कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग ने लखनऊ सहित 60 से अधिक जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया। उत्तराखंड में भी भारी बारिश के चलते कई जगह भूस्खलन हुआ, जिससे 84 से अधिक संपर्क मार्ग बंद हो गए। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं, लेकिन मौसम अब भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और प्रशासन भी जल निकासी, सड़क सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत बनाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।















