भुवनेश्वर: विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 2026 के लिए अब केवल सात दिन शेष रह गए हैं और देश के सबसे बड़े एवं श्रद्धा से जुड़े धार्मिक आयोजनों में से एक की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। जहां परंपरागत कारीगर और सेवायत महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथों को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हुए हैं, वहीं ओडिशा पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व बहुस्तरीय सुरक्षा योजना तैयार कर ली है।
16 जुलाई को आयोजित होने वाली वार्षिक रथ यात्रा में भारत और विदेशों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगी हुई हैं।
रथ निर्माण अंतिम सप्ताह में, रथखला में तेज हुई गतिविधियां
श्री जगन्नाथ मंदिर कार्यालय के सामने ग्रैंड रोड (बड़दांड) स्थित पारंपरिक रथ निर्माण स्थल (रथ खला) में इन दिनों दिन-रात गतिविधियां जारी हैं। सेवायत निर्धारित समय सीमा के भीतर तीनों विशाल रथों के शेष कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं। रथ निर्माण के 79वें दिन मुख्य महाराणा के मार्गदर्शन में महाराणा सेवायतों ने निर्माण कार्य फिर से शुरू किया। इस दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए तीनों रथों के कुल 30 रथ मोड़ चक फाली (पहिया दिशा नियंत्रक लकड़ी के ब्लॉक) का निर्माण पूरा कर लिया गया।
प्रत्येक रथ के लिए 10-10 चक फाली तैयार किए गए हैं। ये विशेष रूप से तैयार किए गए लकड़ी के दिशा नियंत्रक रथ यात्रा के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशाल रथों को खींचते समय यदि कोई रथ अपने निर्धारित मार्ग से थोड़ा विचलित हो जाता है, तो अनुभवी रथ मार्गदर्शकों के निर्देश पर भोई सेवायत इन चक फालियों की सहायता से रथ के पहियों को सही दिशा में मोड़ते हैं और रथ को सुरक्षित रूप से निर्धारित मार्ग पर वापस लाते हैं। इन चक फालियों का निर्माण पूरा होना रथों की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। तीनों रथों को मिल रहा अंतिम कलात्मक स्वरूप रथों के निर्माण कार्य के साथ-साथ इनके सौंदर्यीकरण और सजावट का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

महाराणा सेवायतों ने तीनों रथों के वेदी (मंच) क्षेत्र की सफाई और अंतिम तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके बाद पवित्र बीजे चका (आसन चक्र) की स्थापना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जो रथ की धार्मिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं चित्रकार सेवायत तीनों रथों के आकर्षक प्रभा (सजावटी पिछला भाग) पर रंगाई और चित्रांकन को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रभा पर विभिन्न देवी-देवताओं की रंगीन आकृतियों को उकेरा जा रहा है। इसके अलावा रथों के पहिए, धुरा, दंड, ऊपरी संरचना, ब्रेक पुली, घोड़े, सारथी और अन्य लकड़ी के सजावटी हिस्सों पर भी रंगाई का कार्य तेजी से जारी है। पारंपरिक कला और जीवंत रंगों से सुसज्जित होने के बाद ये विशाल लकड़ी के रथ अपने प्रतिष्ठित धार्मिक स्वरूप में दिखाई देंगे, जिन पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा वार्षिक यात्रा पर निकलेंगे।
दर्जी और लोहार सेवायतों का पारंपरिक कौशल जारी
नंदीघोष रथ, जो महाप्रभु जगन्नाथ का रथ है, उसके शेष बची हुई बतकना वस्त्र सामग्री पर बिलास पट्टी सजावट का कार्य दर्जी सेवायतों द्वारा पूरा कर लिया गया है। अब दर्जी सेवायत तीनों रथों के द्वार बेड़ा और चंद्रशाला आवरणों पर आकर्षक फूलों की आकृतियां, बेल-पत्तियां, पोल मुद्रा और पोल चादर की सिलाई का कार्य कर रहे हैं।
रथ यात्रा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अस्थायी लोहार कार्यशाला में ओझा कमार सेवायत लोहे के आवश्यक उपकरण, कीलें, फिटिंग सामग्री और आपातकालीन उपयोग के लिए जरूरी सामान तैयार करने में जुटे हैं। वहीं पाही महाराणा सेवायतों ने रथ यात्रा में उपयोग होने वाली पूजा सामग्री और सेवा उपकरणों का निर्माण पूरा कर लिया है। अब वे गुंडिचा मंदिर में उपयोग किए जाने वाले आवश्यक लकड़ी के उपकरण तैयार कर रहे हैं।

244 सेवायत और कारीगर निर्माण कार्य में जुटे
तीनों रथों का निर्माण कार्य सदियों पुरानी परंपराओं, धार्मिक विधियों और पारंपरिक तकनीकों के अनुसार किया जा रहा है। वर्तमान में कुल 244 सेवायत और कारीगर इस पवित्र निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। इनमें 78 महाराणा सेवायत, 76 भोई सेवायत, 4 करातिया सेवायत, 21 रूपकार सेवायत, 20 ओझा कमार सेवायत, 2 पहिया छेद करने वाले कारीगर, 2 पाही महाराणा, 40 चित्रकार सेवायत और एक रथखला सहायक शामिल हैं। ये सभी सेवायत पूरी श्रद्धा, समर्पण और पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए रथों के प्रत्येक हिस्से को निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार कर रहे हैं। रथ यात्रा के दिन महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न सिंहासन से निकलकर भव्य रूप से सुसज्जित रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।
ओडिशा पुलिस ने तैयार किया अभेद्य सुरक्षा घेरा, तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू
सुरक्षा तैयारियों को लेकर डीजीपी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक रथ यात्रा 2026 के सफल, सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए ओडिशा पुलिस ने व्यापक सुरक्षा रणनीति तैयार कर ली है। इसी क्रम में राज्य पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), भारतीय तटरक्षक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। डीजीपी ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और रथ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की चूक को रोकने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया।
रथ यात्रा के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया। इसके तहत जमीन, समुद्र और हवाई मार्ग से चौबीसों घंटे निगरानी रखने की योजना बनाई गई है। सुरक्षा योजना में भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को प्रमुखता दी गई है। रथ यात्रा के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) टीमों और एनएसजी क्विक रिस्पांस टीमों (क्यूआरटी) की तैनाती और उनकी रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा की गई। डीजीपी खुरानिया ने ओडिशा पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और भारतीय तटरक्षक बल को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्देश दिया। आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए विशेष इंतजाम रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की संभावित उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित आतंकवादी खतरे से निपटने के लिए विशेष तैयारी की है। समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस की समुद्री पुलिस संयुक्त रूप से समुद्री क्षेत्र में गश्त करेंगी।

समुद्री मार्ग से किसी भी खतरे की स्थिति से निपटने के लिए नौकाओं पर क्विक रिस्पांस टीमों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ड्रोन निगरानी और अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए जाएंगे। यह प्रणाली अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने में सक्षम होगी। सभी संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर एंटी-सबोटाज जांच को और अधिक कड़ा किया जाएगा। संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए बम निरोधक दस्ते और प्रशिक्षित स्निफर डॉग टीमों को पूरे आयोजन के दौरान हाई अलर्ट पर रखा जाएगा। मंदिर और बड़दांड क्षेत्र में बढ़ाई जाएगी सुरक्षा श्री जगन्नाथ मंदिर और ग्रैंड रोड (बड़दांड) क्षेत्र में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। मंदिर के आसपास सुरक्षा वाहनों की तैनाती के साथ-साथ के-9 स्क्वाड, एनएसजी प्रशिक्षित स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और स्पेशल टैक्टिकल यूनिट (एसटीयू) की टीमें भी तैनात रहेंगी।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए भगदड़ जैसी परिस्थितियों को रोकने के लिए विशेष भीड़ नियंत्रण योजना तैयार की गई है। बैठक में सुरक्षा बलों के रहने की व्यवस्था, व्यवस्थित रथ खींचने की प्रक्रिया, बैरिकेड व्यवस्था, जिला प्रशासन के साथ समन्वय, आपात समस्याओं के त्वरित समाधान और श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। अपराध नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रथ यात्रा के दौरान अपराध नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। डीजीपी ने रेलवे स्टेशनों और चलती ट्रेनों में जेबकतरी, चोरी और लूट जैसी घटनाओं में शामिल आदतन अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। चिह्नित अपराधियों की तस्वीरें प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों और रेलवे पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शित की जाएंगी। इन तस्वीरों को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के साथ भी साझा किया जाएगा ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। पुलिस महानिदेशक ने पुरी शहर के सभी थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके तहत होटल, लॉज, मठ, मंदिर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, श्रमिक आवास और धर्मशालाओं में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
पुरी रेलवे स्टेशन पर आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल
रथ यात्रा से पहले सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए पुरी रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक व्यापक आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। पुरी रेलवे स्टेशन रथ यात्रा के दौरान सबसे अधिक भीड़ वाले स्थानों में से एक होता है, जहां देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस अभ्यास का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल में विशेष टैक्टिकल यूनिट (एसटीयू), पुरी पुलिस, सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), अग्निशमन सेवा, ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ओडीआरएएफ) और चिकित्सा टीमों ने भाग लिया।
अभ्यास के दौरान आतंकी हमले जैसी आपात स्थिति का सिमुलेशन किया गया, जिसमें तलाशी अभियान, बचाव कार्य, निकासी प्रक्रिया और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली का परीक्षण किया गया।
एसपी प्रतीक सिंह ने तैयारियों की दी जानकारी
पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने कहा कि रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस का मुख्य ध्यान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने पर है। उन्होंने बताया कि एनएसजी कर्मियों और स्पेशल टैक्टिकल यूनिट जैसी विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया गया है, जो किसी भी सुरक्षा चुनौती या आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम हैं। एसपी ने कहा कि जिले में प्राथमिक प्रतिक्रिया की जिम्मेदारी जिला पुलिस की होगी, जबकि रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा और समन्वय का कार्य जीआरपी और आरपीएफ संभालेंगे।

उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, प्रतिक्रिया समय और संचालन संबंधी कमियों का आकलन किया जा रहा है ताकि रथ यात्रा के दौरान किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। होटल, बड़दांड क्षेत्र और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी इसी प्रकार के अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं।
भव्य रथ यात्रा के लिए अंतिम उलटी गिनती शुरू
महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा की पवित्र यात्रा के लिए अब केवल कुछ दिन शेष रह गए हैं। पुरी में पारंपरिक रथ निर्माण और आधुनिक सुरक्षा तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। जहां सेवायत सदियों पुरानी परंपरा और श्रद्धा के साथ दिव्य रथों को अंतिम रूप दे रहे हैं, वहीं सुरक्षा एजेंसियां भी विश्व प्रसिद्ध आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियों में जुटी हैं। रथ यात्रा 2026 में परंपरा, आस्था और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जिससे लाखों श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में महाप्रभु के दर्शन और भव्य यात्रा का अनुभव कर सकेंगे ।

















