जकार्ता (इंडोनेशिया)। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ ऐतिहासिक और एक हजार साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने पूजा-अर्चना की और कहा कि मुझे हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का अवसर मिला।
इंडोनेशिया की न्यूज एजेंसी अंतारा की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और सुबियांतों ने प्रम्बानन मंदिर की संरक्षण-जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना पर काम करने के लिए मंगलवार को दोनों देशों ने आशय पत्र का आदान-प्रदान किया। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना से संबंधित वीडियो में प्रधानमंत्री कह रहे हैं, ”मुझे किसी न किसी रूप में हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद प्रम्बानन मंदिर के विकास का मौका मिलना मेरा सौभाग्य है।”

प्रम्बानन मंदिर की खासियत, विश्व धरोहर का दर्जा
नौवीं सदी में निर्मित प्रम्बानन विशाल हिन्दू मंदिर परिसर है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया है। यह मंदिर ब्रह्मा, विष्णु, महेश को समर्पित है। इस मंदिर का मूल संस्कृत नाम शिवगृह है। यहां का मुख्य शिव मंदिर 47 मीटर ऊंचा है। इसकी दीवारों और पत्थरों पर रामायण के दृश्यों को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। इसके मुख्य प्रांगण में आज भी रामायण का मंचन किया जाता है। इसे दक्षिण-पूर्व एशिया में शास्त्रीय हिंदू वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक माना जाता है। इस स्थल को 1998 में इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपत्ति भी घोषित किया जा चुका है।
इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय! pic.twitter.com/AuHupT2vSO
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
जावा में 2006 में आए विनाशकारी भूकंप से मंदिर को नुकसान पहुंचा है।
मंदिर के जीर्णोद्धार में सहायता करेगा भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इस 1000 साल पुराने मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में सहायता करने की घोषणा की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर इस धरोहर को संरक्षित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रम्बानन मंदिर दोनों देशों की साझा विरासत का प्रतीक है। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है। यह परियोजना भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐतिहासिक और नागरिक संबंधों को मजबूत करना है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार दोनों देश मिलकर करेंगे।


दुनिया भर में मंदिरों का संरक्षण कर रहा भारत
भारत 2014 के बाद एशिया के कई देशों में साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वियतनाम के यूनेस्को सूचीबद्ध माई सन मंदिर परिसर का पुनरुद्धार, श्रीलंका के तिरुकेथीश्वरम मंदिर का संरक्षण, म्यांमार के बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों की मरम्मत और नेपाल में 28 सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण जैसी परियोजनाएं इसी अभियान का हिस्सा हैं। बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर, बांग्लादेश के रामना काली मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण में भी भारत ने वित्तीय और तकनीकी मदद प्रदान की है।













