अहमदाबाद ब्लास्ट केस: 7015 पन्नों का फैसला, 2 ट्रक सबूत और आतंकियों को फांसी, जज अंबालाल पटेल ने खोले चौंकाने वाले राज!
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अहमदाबाद ब्लास्ट केस: 7015 पन्नों का फैसला, 2 ट्रक सबूत और आतंकियों को फांसी, जज अंबालाल पटेल ने खोले चौंकाने वाले राज!

अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट ने 38 आतंकियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। जानिए तत्कालीन जज अंबालाल पटेल से इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे की पूरी कहानी।

Written byसोनल अनडकटसोनल अनडकट — edited by Shivam Dixit
Jul 7, 2026, 11:39 pm IST
inभारत, गुजरात
Ahmedabad Serial Blast Case High Court Justice Ambalal Patel Interview Death Sentence Terrorists

गुजरात समेत पूरे देश में हड़कंप मचा देने वाले अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट ने स्पेशल डेजिग्नेटेड कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस बम ब्लास्ट के 38 आरोपियों को फांसी की सजा और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। स्पेशल डेजिग्नेटेड कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसमें आज हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को दी गई सजा बरकरार रखी है। इस केस पर सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं।

साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट का यह केस बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक माना जा सकता है। यह केस अपनी कई विशेषताओं के कारण उल्लेखनीय और ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह ऐतिहासिक फैसला देने वाले तत्कालीन जस्टिस अंबालाल पटेल ने पंचजन्य से खास बातचीत की। जस्टिस अंबालाल पटेल ने ही यह ऐतिहासिक फैसला दिया था जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और हाईकोर्ट ने भी उनके फैसले को बरकरार रखा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश अंबाल पटेल अभी प्रोसिक्यूशन विभाग के डायरेक्टर हैं। इस ऐतिहासिक केस के संदर्भ में उन्होंने पंचजन्य से दिलचस्प बातें कीं।

हाईकोर्ट में डेढ़ साल तक डे टू डे बेसिस पर चली सुनवाई, लाइव स्ट्रीमिंग पर था प्रतिबंध

सीरियल बम ब्लास्ट केस में स्पेशल डेजिग्नेटेड कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी की सजा और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पूरे केस की संवेदनशीलता को देखते हुए जस्टिस अल्पेश कोगजे और समीर दवे की खंडपीठ ने पिछले साल 4 मार्च, 2025 से तेज सुनवाई करने के उद्देश्य से इस मैटर को पार्ट हर्ड किया था और केस की सुनवाई रोजाना करने का फैसला किया था। अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस की सुनवाई हाईकोर्ट में डे टू डे बेसिस पर डेढ़ साल चली थी। इतने लंबे समय तक डे टू डे सुनवाई चली हो ऐसा यह पहला केस है। यह केस अति संवेदनशील होने के कारण हाईकोर्ट ने उसकी लाइव स्ट्रीमिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

बम ब्लास्ट केस के 9 लाख से ज्यादा पन्ने, 100 से ज्यादा वकील

संवेदनशील और चर्चित इस केस में उल्लेखनीय बात यह है कि इस केस के 9 लाख से ज्यादा पन्ने हैं। अदालती केस में इतनी बड़ी मात्रा में कागज हों ऐसा भी यह पहला केस है। साथ ही इस केस में कुल 49 आरोपी हैं जिनके बचाव में 100 से ज्यादा वकील जुड़े रहे। इन वकीलों में मुंबई और मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों समेत कानूनी विशेषज्ञ, सीनियर काउंसिल और एडवोकेट समेत 100 के करीब वकीलों की फौज लगी रही।

दुनिया में सबसे ज्यादा बल्की रिकॉर्ड वाला ऐतिहासिक केस

तत्कालीन न्यायाधीश अंबालाल पटेल ने बताया कि अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट केस दुनिया भर में सबसे ज्यादा बल्की रिकॉर्ड वाला केस है। इस केस में 547 चार्जशीट फाइल की गई हैं। दो ट्रक भर जाएं इतने दस्तावेज और एक ट्रक भर जाए इतना मुद्दमाल जब्त किया गया था। हर आरोपी का फर्दर स्टेटमेंट लिया गया था जिसके तहत एक आरोपी का 5,000 पन्नों का फर्दर स्टेटमेंट हुआ था। इस तरह सिर्फ फर्दर स्टेटमेंट के ही 4 लाख कागज हुए थे। 1200 गवाहों की गवाही ली गई उसके भी इतने ही कागज हुए थे। 8,000 दस्तावेजी सबूतों को ध्यान में लिया गया था। सब मिलाकर केस पांच साल चला और बाद में जो फैसला आया वह फैसला 7015 पन्नों का था।

देश विरोधी थी आरोपियों की मानसिकता: अंबालाल पटेल

तत्कालीन न्यायाधीश अंबालाल पटेल ने बताया कि, पांच साल तक केस चला तब रोजाना आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाता था। उनकी मानसिकता देश और समाज विरोधी थी। चल रही सुनवाई में वे व्यवधान पैदा करने के लिए रोजाना उन्हें जेल में होने वाली असुविधाओं के बारे में कोर्ट में बात करते थे ताकि हमें उनके वकीलों को सुनना पड़े। जिसके पीछे कोर्ट में रोजाना आधा घंटा उनकी  दलीलें सुनने में बीतता था। ट्रायल केस को फैसले तक लाने का काम बहुत मुश्किल था। फैसले में डिफेंस लॉयर के सभी मुद्दों के विस्तृत जवाब दिए गए हैं। जब आतंकियों को फांसी और उम्रकैद की सजा सुनाई गई तब भी उनके चेहरे पर कहीं अफसोस की एक लकीर भी नहीं दिखी। जंगली जानवरों जैसा उनका व्यवहार रहा था।

आरोपियों ने न्यायाधीश को धमकी और गालियां दीं

न्यायाधीश अंबालाल पटेल ने बताया कि आरोपियों ने कोर्ट में मुझे गालियां दीं और धमकियां तो केस सौंपे जाने के समय से ही मिलने शुरू हो गई थीं। जिसके चलते मुझे कमांडो की सुरक्षा भी दी गई थी।

जिहाद पर पूरे एक दिन दलील चली

स्पेशल डेजिग्नेटेड कोर्ट के सामने जब केस की हियरिंग चल रही थी तब डिफेंस के वकील की ओर से जिहाद के बारे में कोर्ट में दलील दी गई थी। उनका कहना था कि जिहाद कुरान का पवित्र शब्द है लेकिन मीडिया और समाज ने उसे गलत तरीके से पेश किया है। जिसके जवाब में तत्कालीन न्यायाधीश अंबाल पटेल ने कुरान की आयतों का सहारा लिया था और वास्तविक जिहाद क्या है यह मुद्दा कोर्ट में रखा था। इस तरह जिहाद पर एक पूरा दिन कोर्ट में दलील हुई थी जिसके चलते केस के फैसले में जिहाद के बारे में भी 25 पन्नों में उल्लेख किया गया है।

आरोपियों ने केरल और पावागढ़ के जंगलों में ट्रेनिंग ली थी

आरोपियों ने बम ब्लास्ट करने से पहले केरल और गुजरात के पावागढ़ में स्थित जंगलों में ट्रेनिंग ली थी। उस समय पावागढ़ में जंगल में स्थित एक दरगाह में आरोपी रुके थे जिसे दरगाह के मौलवी इदरीस ने पहचानकर बताया था। आतंकवादी रोजाना सुबह जंगल जाते और शाम को वापस आ जाते थे। उस समय पास के गांव से गाय-भैंस चराने आने वालों ने भी आरोपियों को देखा था जिन्हें कोर्ट के सामने गांव वालों ने पहचानकर बताया था।

पूरे केस में सिर्फ 8 से 10 गवाह ही होस्टाइल हुए

पूरे केस के दौरान 1,163 गवाहों के बयान लिए गए थे जिनमें से सिर्फ 8 से 10 गवाह ही होस्टाइल हुए, ऐसा अंबाल पटेल ने बताया। उन्होंने कहा कि जिन 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई उनके खिलाफ साजिश में शामिल होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें उम्रकैद देनी पड़ी।

Topics: Panchjanya newsnational security newsगुजरात हाईकोर्ट ऐतिहासिक फैसला
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