
प्रतीकात्मक तस्वीर
भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करता जा रहा है। इसी के तहत भारत अपने अगली पीढ़ी के बहु प्रतीक्षित फाइटर प्लेन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को और अधिक एडवांस्ड बनाने के लिए अलग ही तैयारी कर रहा है। इसके तहत डीआरडीओ AMCA में स्टील की जगह मजबूत और हल्के टाइटेनियम का इस्तेमाल करेगा। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, AMCA की बॉडी स्वदेशी टाइटेनियम से बनाई जा सकती है। लैंडिंग गियर भी टाइटेनियम का ही होगा, जो स्टील्थ जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा। इससे विमान का कुल वजन काफी कम रहेगा और यह तेज उड़ान भर सकेगा। F-35 में भी टाइटेनियम का इस्तेमाल हुआ है।
टाइटेनियम हल्का, बहुत मजबूत और जंग नहीं लगने वाला होता है। इससे विमान की स्टील्थ क्षमता बनी रहेगी, वजन कम होगा और पूरे सिस्टम को स्मार्ट बनाया जा सकेगा। पुरानी चौथी पीढ़ी के विमानों में ज्यादा मजबूती और लंबे समय तक चलने पर ध्यान रहता था, लेकिन AMCA में ये नई जरूरतें पूरी की जा रही हैं।
DRDO की डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी (DMRL) ने स्वदेशी बीटा टाइटेनियम (TI 10 V-2Fe-3AI) विकसित किया है। इसका इस्तेमाल पूरे विमान को हल्का रखने में मदद करेगा। अनुमान है कि AMCA का वजन 18 से 25 टन के बीच रहेगा। वजन कम होने से इसकी मारक क्षमता बढ़ेगी और दुश्मन के ठिकानों पर तेजी से पहुंच सकेगा। एक किलो वजन कम होने से भी फाइटर जेट की स्पीड और परफॉर्मेंस पर फर्क पड़ता है।
AMCA में सिर्फ लो रडार सिग्नेचर (स्टील्थ) पर ही ध्यान नहीं है। डिजाइन करने वाले (ADA और DRDO) उतना ही जोर रखरखाव को आसान बनाने पर दे रहे हैं। पश्चिमी स्टील्थ जेट्स, खासकर F-35 को अक्सर रखरखाव की दिक्कतें आती हैं। नाजुक रडार-अब्जॉर्बेंट कोटिंग, सॉफ्टवेयर बग और सप्लाई चेन की समस्या से F-35 की मिशन तैयार रहने की दर प्रभावित होती है।
भारतीय वायु सेना (IAF) स्क्वाड्रन की कमी और दो मोर्चों की चुनौती के कारण कम उपलब्धता बर्दाश्त नहीं कर सकती। इसलिए 2024 में कैबिनेट ने 15,000 करोड़ रुपये मंजूर किए। लक्ष्य है कि डिजिटल फ्लीट मैनेजमेंट से मिशन-कैपेबल उपलब्धता 75 प्रतिशत तक पहुंच जाए।
AMCA में इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट (IVHM) सिस्टम लगेगा। इसमें फ्लाइट डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (FDMS) ‘डिजिटल ट्विन’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा। AI उड़ान के डेटा का विश्लेषण करके पहले ही बता देगा कि कौन सा पुर्जा कब खराब होने वाला है।
उड़ान के दौरान सेंसर कंपन, तापमान बदलाव और बिजली के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करेंगे। AI घिसाव के शुरुआती संकेत पकड़ लेगा। अगर कोई पुर्जा, जैसे हाइड्रोलिक पंप, असामान्य व्यवहार करे तो सिस्टम ग्राउंड क्रू को तुरंत सूचना देगा। लैंडिंग से पहले ही रिप्लेसमेंट पार्ट तैयार रखा जा सकेगा। इससे टर्नअराउंड समय कम होगा।