आज का श्लोक : सम्पदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे न भीरुत्वम्
सुभाषितम् में पढ़ें आज का श्लोक
Published by
Panchjanya
Jul 6, 2026, 06:00 am IST
सम्पदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे न भीरुत्वम् तं भुवन-त्रय-तिलकं जनयति जननी सुतं विरलम् ॥
भावार्थ-
सम्पत्ति में जो हर्षित नहीं होता है, विपत्ति में जो विषाद नहीं करता है, युद्ध में जो कायरता नहीं दिखाता है, ऐसे तीनों लोकों के तिलक स्वरुप, विरले पुत्र को ही माता उत्पन्न करती है।