
नई दिल्ली/जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में शनिवार को देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी का उद्घाटन कर इसे देश को समर्पित किया। यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। यह ग्रीनफील्ड रिफाइनरी 90 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाली है। इसे 79,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है।
राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिफाइनरी से टैंकरों हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। ये टैंकर पेट्रोल-डीजल लेकर रिफाइनरी से रवाना हुए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप तो मेरी कार्यशैली जानते हैं, जिसका शिलान्यास हम करते हैं, उसका लोकार्पण भी हम ही करते हैं। भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को लगातार बढ़ाया है। अमेरिका में पिछले 50 साल में एक भी नई रिफाइनरी नहीं बनी है। यूरोप में क्षमता कम हो रही है। भारत विश्व में चौथा सबसे ज्यादा रिफाइनरी की क्षमता वाला देश बन गया है। हम यहां रुकने वाले नहीं है। इन्हीं प्रयासों के कारण भारत इस संकट से उभरा है।
4,400 एकड़ क्षेत्र में फैली है ये रिफाइनरी…32 किमी में फैला परिसर
ग्रीनफील्ड रिफाइनरी उसे कहते हैं जिसे नई जगह पर शुरू से विकसित किया जाता है। इसका निर्माण 2018 में शुरू हुआ था। अब यह रिफाइनरी व्यावसायिक उत्पादन के लिए तैयार है। यह भारत की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है जिसे पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के साथ विकसित किया गया है। यह कॉम्प्लेक्स रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एक साथ जोड़ता है। इसकी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 2.4 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है। रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (एनसीआई) 17.0 है और इसकी पेट्रोकेमिकल यील्ड 26 प्रतिशत से अधिक है।
यह रिफाइनरी लगभग 4,400 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इसका परिसर करीब 32 किलोमीटर की दूरी तक फैला है। रिफाइनरी की कच्चा तेल प्रोसेसिंग क्षमता 90 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इसमें कुल 13 प्रसंस्करण इकाई हैं। इनमें नौ रिफाइनरी और चार पेट्रोकेमिकल इकाई शामिल हैं।
इस रिफाइनरी से ऐसे बदलेगी राजस्थान की तस्वीर
इस रिफाइनरी से राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। इसके निर्माण के दौरान करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह रिफाइनरी आगे भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेगी। यह ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी पश्चिमी भारत ईंधन उत्पादन और वितरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यह कई बड़े आर्थिक क्षेत्रों के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी। पेट्रोकेमिकल, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, प्लास्टिक, केमिकल और एमएसएमई जैसे सेक्टरों पर इसका असर देखने को मिलेगा। रिफाइनरी के संचालन के दौरान यह हाई-स्किल्ड जॉब्स के नए अवसर तैयार करेगी।
भारत में ही बनाए गए हैं इसके अधिकांश रिएक्टर और टैंक
इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) करीब 17 है। यानी यह देश की सबसे उन्नत और हाई-कन्वर्जन रिफाइनरियों में शामिल है। रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम और भारी टैंक आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत में ही बनाए गए हैं। कंट्रोल सिस्टम और हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए इसमें अमेरिका, जापान और यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। वेल्डिंग और फिनिशिंग की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के तकनीशियनों ने भी यहां काम किया।