दुनिया के बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत अपनी सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रहा है। मिसाइल हो या फ्रिगेट, पनडुब्बी हो या दूसरे हथियार, सेना में नई-नई चीजें शामिल की जा रही हैं। इसी सिलसिले में भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) ने मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल यानी MPATGM को मंजूरी दे दी है।
यह पूरी तरह फायर एंड फॉरगेट वाली मिसाइल है, जिसे कंधे पर रखकर दागा जा सकता है। इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर, टॉप अटैक मोड और टैंडम वारहेड जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं। यह 200 मीटर से लेकर 4 किलोमीटर तक दूर के दुश्मन के टैंक या बख्तरबंद गाड़ियों को आसानी से निशाना बना सकती है। इससे हमारे पैदल सैनिकों की ताकत बहुत बढ़ जाएगी और विदेशी हथियारों पर निर्भरता भी कम होगी।
52 हजार करोड़ की खरीद में शामिल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में करीब 52 हजार करोड़ रुपये की बड़ी रक्षा खरीद को हरी झंडी दी। इसमें MPATGM के अलावा आकाश एंटी-ड्रोन सिस्टम, मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM), वी-शोराड्स एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन भी शामिल हैं।
MPATGM खासतौर पर पैदल सैनिकों के लिए बनाई गई है। आज के युद्ध में टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां बहुत बड़ी समस्या बन जाती हैं। यह मिसाइल इतनी हल्की और आसान है कि सैनिक इसे कंधे पर लेकर कहीं भी ले जा सकते हैं और जरूरत पड़ते ही फौरन इस्तेमाल कर सकते हैं।
DRDO ने बनाई ये तकनीक
यह मिसाइल पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई है। इसमें DRDO की कई लैब्स का योगदान है — रिसर्च सेंटर इमारत, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैब, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैब, इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और डिफेंस लैबोरेट्री जोधपुर। उत्पादन के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) मिलकर काम करेंगे।
फायर एंड फॉरगेट तकनीक
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत उसकी फायर एंड फॉरगेट तकनीक है। सैनिक को बस लक्ष्य पर लॉक करना है, मिसाइल दाग दी और फिर उसकी चिंता छोड़ दी। मिसाइल खुद ही लक्ष्य का पीछा करके उसे तबाह कर देगी। इससे सैनिक तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट हो सकता है और खुद को सुरक्षित बचा सकता है।
IIR सीकर से हर मौसम में कामइसमें इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर लगा है, जो टैंक से निकलने वाली गर्मी को आसानी से पहचान लेता है। धुआं, धूल, कोहरा या अंधेरा हो, फिर भी यह मिसाइल ठीक से काम करती है। यानी दिन हो या रात, किसी भी मौसम में इस्तेमाल की जा सकती है।
टैंकों का सबसे मोटा कवच आगे और साइड में होता है, लेकिन ऊपर का हिस्सा तुलनात्मक रूप से कमजोर रहता है। MPATGM टॉप अटैक मोड में ऊपर से हमला करती है। इसका टैंडम वारहेड पहले टैंक की एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को बेअसर करता है, फिर मुख्य कवच को भेदकर अंदर विस्फोट कर देता है।
मारक दूरी और लचीलापन
इसकी असरदार रेंज 200 मीटर से 4000 मीटर तक है। सैनिक इसे कंधे पर उठाकर चल सकता है। जरूरत पड़े तो ट्राइपॉड पर या वाहन से भी लॉन्च किया जा सकता है। पहाड़ी, रेगिस्तानी या मैदानी इलाके — हर जगह यह आसानी से काम आएगी।
टेस्टिंग में सफलता
DRDO ने इस मिसाइल के कई टेस्ट किए हैं। जुलाई 2021 में न्यूनतम और अधिकतम दूरी का टेस्ट सफल रहा। अप्रैल 2024 में पोखरण में वारहेड का ट्रायल सफल हुआ। जनवरी 2026 में महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में चलते-फिरते लक्ष्य पर टॉप अटैक मोड का सफल प्रदर्शन किया गया। इन सभी टेस्टों के बाद सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
















