पाञ्चजन्य इवेंट

हमारी नाल संघ से जुड़ी है.. : वृतचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन, दत्तात्रेय जी और जोशी जी ने बताएं अनसुने प्रसंग

पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र 'अमिट अटल' (The Unforgettable Atal) का हुआ भव्य प्रदर्शन; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले और प्रख्यात विचारक डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने साझा किए संस्मरण। जानिए सरस्वती वंदना और अटल जी से जुड़े वो ऐतिहासिक किस्से।

Published by
Shivam Dixit

नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026 । राष्ट्रभक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के संवाहक साप्ताहिक पत्र ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (Documentary) ‘अमिट अटल’ का भव्य प्रदर्शन नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी और विशिष्ट अतिथि के रूप में देश के प्रख्यात विचारक एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी उपस्थित रहे।

पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर सहित कई प्रबुद्ध जन, लेखक और पत्रकार भी इस अवसर पर मौजूद थे।

अटल जी का जीवन और पत्रकारिता एक साधना: श्री दत्तात्रेय होसबाले

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने पाञ्चजन्य टीम को इस उत्कृष्ट वृत्तचित्र के निर्माण के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा, “यह वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) अत्यंत प्रासंगिक और मर्मस्पर्शी है, जिसे देखकर अटल जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाएं और संस्मरण जीवंत हो उठे हैं।”

श्री होसबाले ने अटल जी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि मात्र 27 वर्ष की आयु में श्रद्धेय भाऊराव देवरस जी की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के मार्गदर्शन में अटल जी को पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक के रूप में दायित्व सौंपा गया था।

उन्होंने कहा कि अटल जी ने लेखन, कविता और प्रभावी भाषणों के माध्यम से देश में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ पहली बार पाञ्चजन्य में ही प्रकाशित हुई थी।

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अटल जी के संकल्प को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पाञ्चजन्य के प्रथम संपादकीय का शीर्षक था “जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे” और अटल जी इस संकल्प पर जीवन के अंतिम क्षण तक अडिग रहे। श्री होसबाले ने पत्रकारिता के मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि अटल जी पत्रकारिता को एक व्रत और तपस्या मानते थे। वे दैनिक समाचार को ‘सूचना’, साप्ताहिक को ‘प्रचार’ और मासिक को ‘विचार’ का माध्यम कहते थे। उन्होंने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पाञ्चजन्य के वर्तमान स्वरूप की सराहना की और कहा कि यह प्रयास नई पीढ़ी को भारत के सच्चे सेवक और एक महान राष्ट्रनायक के जीवन से परिचित कराएगा।

विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया: डॉ. मुरली मनोहर जोशी

विशिष्ट अतिथि और अटल जी के दीर्घकालिक सहयोगी डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने वर्ष 1948 से अटल जी और पंडित दीनदयाल जी के साथ बिताए अपने भावुक संस्मरणों को साझा किया। उन्होंने जनता पार्टी सरकार के दौर को याद करते हुए कहा कि तमाम राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एकमात्र अटल जी ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने दलीय संकीर्णता से ऊपर उठकर कार्य किया। वे पहले ऐसे भारतीय नेता थे जिन्होंने चीन की धरती पर जाकर निर्भीकता से उसकी गलत नीतियों का विरोध किया था।

डॉ. जोशी ने संघ के साथ अटल जी के प्रगाढ़ संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब कुछ राजनीतिक तत्वों ने संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तो अटल जी ने दो टूक शब्दों में कहा था कि “हमारी नाल संघ से जुड़ी है, हम संघ से अलग कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने संसद में भी स्पष्ट कर दिया था कि वे ऐसी किसी सरकार को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेंगे जो विचारों से समझौता करने पर मजबूर करे।

शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का एक प्रसंग साझा करते हुए डॉ. जोशी ने बताया कि जब स्कूलों में ‘सरस्वती वंदना’ को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई, तब प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाते हुए कहा था कि “सरस्वती वंदना हमारी सरकार में नहीं होगी तो फिर किस सरकार में होगी? यह अवश्य होनी चाहिए।” इसी प्रकार विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी की पुनर्स्थापना और शोध कार्य के लिए भी वे सदैव प्रतिबद्ध रहे। डॉ. जोशी ने कहा कि आज के समय में सबको साथ लेकर, एक मजबूत संकल्प और विचार के साथ आगे बढ़ने की कार्यशैली की देश को अत्यधिक आवश्यकता है।

वृत्तचित्र के बारे में

पाञ्चजन्य द्वारा प्रस्तुत वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के एक स्वयंसेवक, प्रचारक, ओजस्वी कवि, प्रखर पत्रकार, दूरदर्शी संपादक और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के सफर के अनछुए पहलुओं को प्रामाणिकता के साथ उजागर करता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने इस वृत्तचित्र की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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