
कासगंज / बहराइच। उत्तर प्रदेश की विशेष कार्य बल (UP STF) ने देश की सुरक्षा और नागरिकों की पहचान से खिलवाड़ करने वाले एक बेहद हाई-टेक और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ की टीम ने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के वैध ऑपरेटरों की आईडी और सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर अवैध रूप से फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड अकील सैफी को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी अकील सैफी को यूपी के कासगंज जनपद के सहावर थाना क्षेत्र से दबोचा गया है। यह गिरोह ऑपरेटरों के फिंगरप्रिंट का स्क्रीनशॉट लेकर और लैपटॉप की मैक आईडी (MAC ID) को क्लोन करके इस पूरे अवैध नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।
इस हाई-टेक धोखाधड़ी के तौर-तरीकों, वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक कड़ियों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| मामले का मुख्य आयाम | एसटीएफ जांच का आधिकारिक और तकनीकी विवरण |
|---|---|
| गिरफ्तार मुख्य मास्टरमाइंड | अकील सैफी (निवासी: सहावर, जनपद कासगंज, उत्तर प्रदेश) |
| गिरफ्तारी का मूल आधार (FIR) | 29 अक्टूबर 2025 को थाना मुर्तिहा, जनपद बहराइच में दर्ज मुकदमा। |
| सह-आरोपी की गिरफ्तारी | 12 दिसंबर 2025 को प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के बाद अकील का नाम सामने आया। |
| हैक करने की मुख्य तकनीक | SMBS BIOS ओवरराइट, MAC ID क्लोनिंग और थम्ब इम्प्रेशन कोडिंग। |
| अवैध दस्तावेज निर्माण | फर्जी सोर्स कोड के जरिए कूटरचित जन्म एवं निवास प्रमाण पत्र बनाना। |
| प्रति कार्ड कमीशन और लेन-देन | ₹600 प्रति कार्ड (₹300 स्वयं का हिस्सा, ₹300 असली ऑपरेटर का); लेन-देन SBI Yono Cash से। |
इस संगठित रैकेट का खुलासा तब शुरू हुआ जब 29 अक्टूबर 2025 को बहराइच के थाना मुर्तिहा में स्थानीय पुलिस द्वारा एक मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच में सामने आया था कि एक गिरोह फर्जी और कूटरचित जन्म एवं निवास प्रमाण पत्र तैयार कर रहा है और उन्हीं के आधार पर अवैध रूप से नए पहचान पत्र (आधार कार्ड) बनाए जा रहे हैं।
इसके बाद मामले की तकनीकी गहराई को देखते हुए एसटीएफ को जांच सौंपी गई। एसटीएफ ने 12 दिसंबर 2025 को इस गिरोह के एक सदस्य प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया। जब प्रमोद के डिजिटल उपकरणों और पोर्टल्स का फोरेंसिक व तकनीकी विश्लेषण किया गया, तब पता चला कि उसे यह पूरा अवैध सिस्टम और क्लोन की गई आईडी कासगंज के अकील सैफी ने उपलब्ध कराई थी।
एसटीएफ की पूछताछ में मुख्य आरोपी अकील सैफी ने जो खुलासे किए हैं, वे सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाने वाले हैं। अकील ने बताया कि उसने वर्ष 2015 में ही NSEIT की आधिकारिक परीक्षा पास कर ली थी, जिसके बाद उसे ‘वायम टेक’ (VAYAM TECH) कंपनी के माध्यम से आधार कार्ड ऑपरेटर का वैध काम मिला था। उसने सहावर में एक सीएससी (CSC) सेंटर भी खोला था जो 2017 में बंद हो गया।
“साल 2021 में मेरी नियुक्ति डीसी ऑफिस फरीदाबाद (हरियाणा) में आधार कार्ड ऑपरेटर के पद पर हुई। इसी दौरान मेरी मुलाकात योगेश नाम के एक शख्स से हुई। योगेश ने मुझे यूआईडीएआई (UIDAI) के सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में सेंध लगाना सिखाया। उसने मुझे सिखाया कि कैसे एक अधिकृत (व्हाइट लिस्टेड) लैपटॉप की यूनिक MAC ID को एक विशेष कोड के जरिए कॉपी करके दूसरे सामान्य लैपटॉप में SMBS BIOS ओवरराइट करके चलाया जा सकता है। इसके अलावा, आईडी को लॉगिन करने के लिए ऑपरेटर के अंगूठे के निशान (Thumb Impression) का स्क्रीनशॉट लेकर उसे कोड में बदलकर बाईपास करने की कोडिंग भी योगेश ने ही सिखाई थी।” – अकील सैफी का इकबालिया बयान
कोडिंग और क्लोनिंग की तकनीक में पूरी तरह माहिर होने के बाद अकील ने फरीदाबाद की नौकरी छोड़ दी। वर्ष 2024 में वह सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर के ऐसे आधार ऑपरेटरों के संपर्क में आया जो अपनी अधिकृत आईडी को क्लोन कराकर दूसरे लोगों को कमीशन पर देना चाहते थे। अकील ने इस काले कारोबार में अपने सगे भांजे शोएब को भी शामिल कर लिया।
इस तरह दिया जाता था धोखाधड़ी को अंजाम:
एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अभियुक्त अकील सैफी के पास से बरामद किए गए सभी हाई-टेक लैपटॉप, स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जब्त कर फोरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। इसके साथ ही उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी संदिग्ध बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स का गहन वित्तीय परीक्षण (Financial Audit) किया जा रहा है।
एसटीएफ को आशंका है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर फैले हैं और इसके जरिए कई संदिग्ध और अवैध नागरिकों के भी पहचान पत्र बनाए गए हो सकते हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों, असली ऑपरेटरों और सह-साजिशकर्ता योगेश व शोएब की धरपकड़ के लिए अलग-अलग राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही है।