नैनीताल (उत्तराखंड)। उत्तराखंड की पावन वादियों और सनातन आस्था के सुप्रसिद्ध केंद्र नैनीताल स्थित मां नयना देवी मंदिर से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। मंदिर परिसर में एक संदिग्ध युवक के छिपकर प्रवेश करने से श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन के बीच हड़कंप मच गया।
आधुनिक पी-कैप (सन कैप) पहनकर आए इस संदिग्ध युवक ने पहले हनुमान मंदिर में दर्शन किए और बकायदा माथे पर तिलक भी लगवाया। लेकिन जैसे ही मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियों को भांपकर उसकी टोपी हटवाई, तो वहां मौजूद सभी लोगों के होश उड़ गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा बलों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया था।
एक नज़र में समझें: नयना देवी मंदिर घटनाक्रम का पूरा विवरण
गूगल डिस्कवर और पाठकों की त्वरित समझ के लिए इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में संक्षेप में संकलित है:
| घटनाक्रम का मुख्य आयाम | आधिकारिक एवं जमीनी विवरण |
|---|---|
| मुख्य घटना स्थल | मां नयना देवी मंदिर, मल्लीताल, नैनीताल (उत्तराखंड) |
| युवक का मूल निवास | जौनपुर, उत्तर प्रदेश (UP) |
| संदिग्ध आचरण | पी-कैप के नीचे सफेद इस्लामिक गोल टोपी पहनना और गूंगा होने का नाटक करना। |
| पास से मिला मुख्य दस्तावेज | 17 जून का पुलिस ड्यूटी चार्ट (कोई अधिकारिक आई-कार्ड नहीं मिला) |
| पुलिस का आधिकारिक एक्शन | गहन पूछताछ के बाद कोई संदिग्धता नहीं मिलने पर रामनगर के लिए छोड़ा गया। |
पहले चप्पल उतारी, फिर तिलक लगवाया, टोपी खुलते ही खुला राज
प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, आज दोपहर एक लंबे ढील-डौल का युवक कुर्ता-पायजामा पहने और सिर पर सन कैप (पी-कैप) लगाए मंदिर पहुंचा। उसने मुख्य द्वार के बाहर पूरी मर्यादा के साथ अपनी चप्पलें उतारीं और सीधे हनुमान मंदिर के पास पहुंच गया। वहां उसने बकायदा माथे पर रोली का टीका लगवाया और काफी देर तक मंदिर परिसर की भौगोलिक बनावट को निहारने लगा।
युवक के हाव-भाव देखकर वहां तैनात सुरक्षा गार्ड्स को कुछ शक हुआ। जब गार्ड्स ने उससे उसका नाम और आने का कारण पूछा, तो युवक ने इशारे करते हुए गूंगा होने का नाटक शुरू कर दिया।
“यह बात जैसे ही परिसर में फैली, मुख्य गेट पर तैनात दूसरे गार्ड ने आकर पोल खोल दी कि यह युवक बाहर तो सामान्य रूप से बोल रहा था। इसके बाद जब सुरक्षाकर्मियों ने कड़ाई बरतते हुए उसके सिर से पी-कैप हटाई, तो अंदर सफेद रंग की पारंपरिक इस्लामिक गोल टोपी देखकर सब हैरान रह गए। युवक की तलाशी लेने पर कोई वैध पहचान पत्र तो नहीं मिला, लेकिन उसके पास से 17 जून का पुलिस ड्यूटी चार्ट जैसा संवेदनशील सरकारी दस्तावेज बरामद हुआ। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने तुरंत मल्लीताल कोतवाली पुलिस को सूचित किया।”
“मुझे नहीं पता था कि नैनीताल में आधार कार्ड चेक होते हैं”: युवक का बयान
सूचना मिलते ही मल्लीताल कोतवाली पुलिस की ‘चीता मोबाइल’ टीम तुरंत मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई। कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SSI) दिनेश जोशी ने बताया कि युवक से खुफिया और स्थानीय पुलिस विंग द्वारा कड़ी पूछताछ की गई।
पूछताछ में युवक ने अपना नाम और घर उत्तर प्रदेश का जौनपुर जिला बताया। उसने पुलिस को स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह यहां केवल घूमने आया था और उसे इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के लिहाज से पहचान पत्र (आधार कार्ड) की सघन चेकिंग की जाती है।
उसने बताया कि अब उसे आगे रामनगर जाना है। पुलिस के मुताबिक, उसकी पृष्ठभूमि और बयानों की तस्दीक करने के बाद कोई आपराधिक या आतंकी संदिग्धता नहीं पाई गई, जिसके बाद उसे विधिक चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
नयना देवी मंदिर में पहले भी हो चुका है विवाद: 26 जनवरी की घटना आई सामने
नयना देवी मंदिर परिसर में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस ताजा घटना के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों और तीर्थ पुरोहितों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने की मांग की है।
पुरानी घटनाओं का इतिहास:
- जूते पहनकर प्रवेश का वीडियो: इससे पहले बीते 26 जनवरी को भी मंदिर परिसर की मर्यादा को तार-तार करने का एक बड़ा मामला सामने आया था। तब तीन मुस्लिम परिवार प्रतिबंधित जूते पहनकर सीधे मंदिर के गर्भगृह और संवेदनशील परिक्रमा परिसर के अंदर घुस आए थे।
- सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल: जूते पहनकर मंदिर में घूमने का वह वीडियो सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल हुआ था, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने नयना देवी मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक शुद्धता को बनाए रखने के लिए सख्त नियमावली और प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर व आईडी चेकिंग अनिवार्य करने की मांग उठाई थी।
स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि नैनीताल एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ सामरिक और धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील है, इसलिए नयना देवी मंदिर जैसे आस्था के सर्वोच्च केंद्रों पर आने वाले प्रत्येक संदिग्ध व्यक्ति की गहन विधिक जांच होनी अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक या सुरक्षा गतिरोध उत्पन्न न हो।

















