
जैनम जैन
‘सपनों की कोई उम्र नहीं होती, बस उन्हें देखने का हौसला चाहिए’। यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के पुणे में जन्मे 14 वर्षीय जैनम जैन ने इसे अपनी जिंदगी में सच साबित कर दिया है। जिस उम्र में अधिकांश बच्चे मोबाइल गेम, सोशल मीडिया और मनोरंजन की दुनिया में खोए रहते हैं, उसी उम्र में जैनम दुबई की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की 141वीं मंजिल से अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप ‘मेंगो इंजन’ का संचालन कर रहे हैं। जैनम जैन की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रही है। यह कहानी सिर्फ एक बालक की सफलता नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए संदेश है जो अक्सर यह सोचकर अपने सपनों को टाल देते हैं कि अभी सही समय नहीं आया।
जैनम जब पांच साल के थे, तब उनका परिवार दुबई चला गया। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके घर का माहौल किताबों वाला, हमेशा सीखने और नए प्रयोग करने वाला रहा। उनके माता-पिता उन्हें और उनकी छोटी बहन को बिना असफलता से डरे सपने देखने व उनको पूरा करने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने उनको एक एक बात सिखाई, ‘कोशिश करते रहो, गिरो तो उठो, लेकिन कोशिश कभी मत छोड़ो’। जैनम महज छह साल के थे, जब वह अपने पिता के साथ एक बिजनेस मीटिंग में गए। वहां वह सिर्फ देखने और समझने गए थे, लेकिन उसी दिन उनके भीतर बिजनेस और टेक्नोलॉजी में रुचि बढ़ी। यही छोटी सी शुरुआत उनके अंदर कुछ बड़ा करने का जुनून जगा गई।
सात साल की उम्र में जैनम और उनकी छोटी बहन जिविका ने JJ Fun Time नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया। शुरुआत में दोनों खिलौनों के अनबॉक्सिंग वीडियो बनाते थे। बाद में उन्होंने साइंस एक्सपेरिमेंट्स से जुड़े वीडियो बनाना शुरू किया। देखते ही देखते तीन महीने में उनके 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हो गए। अब दो छोटे बच्चे केवल कंटेंट नहीं बना रहे थे, बल्कि स्कूलों में जाकर दूसरे बच्चों से अपने अनुभव साझा कर रहे थे। उन्हें सीखने, बोलने और नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित भी कर रहे थे।
जैनम की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी आदतें हैं। उन्होंने हर साल अपने लिए एक कठिन लक्ष्य तय किया। उन्होंने 50 दिनों में 50 नेटवर्किंग इवेंट्स में शामिल होने, 50 दिनों में 50 किताबें पढ़ने और 50 दिनों में 50 नए कौशल सीखने का भी लक्ष्य बनाया। वर्ष 2024 में जैनम ने महाराष्ट्र में 50 दिनों के भीतर 120 मोटिवेशनल कार्यक्रम किए। इस दौरान 6,000 किलोमीटर की यात्रा की और 50,000 से अधिक लोगों तक पहुंचे। इन कार्यक्रमों में दोनों भाई-बहन ने स्कूलों, कॉलेजों, एनजीओ और कई संस्थानों में जाकर उद्यमिता, पब्लिक स्पीकिंग और सेल्फ-कॉन्फिडेंस जैसे विषयों पर लोगों को प्रेरित किया।
जैनम कहते हैं, “हम बीमार भी पड़े, थके भी, लेकिन उन 50 दिनों ने हमें सिखाया कि जो असंभव लगता है, वह सिर्फ इसलिए असंभव लगता है क्योंकि किसी ने अभी तक उसे किया नहीं है।”
12 साल की उम्र में जैनम ने यह पता लगाना शुरू किया कि क्या स्कूल की पढ़ाई कम समय में पूरी की जा सकती है? इसके बाद उन्होंने जल्दी स्कूल पूरा करने का फैसला किया और कैम्ब्रिज IGCSE परीक्षा की तैयारी की और करीब 105 दिनों की तैयारी के बाद 13 साल की उम्र में 10वीं पास कर ली। उनकी छोटी बहन जिविका ने यह उपलब्धि सिर्फ 10 साल की उम्र में हासिल की। इसी दौरान जैनम और उनकी बहन उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने दिल्ली के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर से जियो हॉटस्टार डोमेन खरीद लिया था।
दसवीं पूरी करने के बाद जैनम ने नौकरी नहीं, बल्कि अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने ‘मेंगो इंजन’ (Mengo Engine) नाम से एक एआई प्लेटफॉर्म बनाया, जो कंपनियों से जुड़े कई कामों को आसान बनाने का दावा करता है। यह मार्केटिंग, कंटेंट तैयार करने, ग्राहक से संवाद और सेल्स जैसे कामों को ऑटोमेटिक करने पर काम कर रहा है। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म बीटा चरण में है और करीब 100 से अधिक कंपनियां वेटिंग लिस्ट में हैं। कानूनी कारणों से उनके पिता डॉ. धीरज जैन कंपनी के को-फाउंडर हैं, लेकिन जैनम का कहना है कि वह खुद ही कंपनी के ज्यादातर काम संभालते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने AI की कोई पढ़ाई नहीं की। उन्होंने यूट्यूब, लगातार प्रयोग और अपनी जिज्ञासा के दम पर यह सफर तय किया।
आज के दौर में अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि संसाधन नहीं हैं, अवसर नहीं हैं या सही समय नहीं मिला। जैनम जैन की कहानी इन सभी बहानों को चुनौती देती है। उन्होंने साबित किया कि इंटरनेट केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय भी हो सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उसे समय बिताने के लिए इस्तेमाल करता है और कोई अपने भविष्य को बनाने के लिए। हर युवा के भीतर एक जैनम छिपा है। जरूरत केवल उस पहली चिंगारी को पहचानने, लगातार सीखने और बिना हार माने आगे बढ़ते रहने की है। क्योंकि सफलता उम्र नहीं पूछती, वह सिर्फ मेहनत, अनुशासन और जुनून पहचानती है।