Explainer : शाहबानो से UCC तक, भाजपा शासित राज्यों में कैसे आगे बढ़ रही समान नागरिक संहिता की राह? मुस्लिम भी पक्ष में
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Explainer : शाहबानो से UCC तक, भाजपा शासित राज्यों में कैसे आगे बढ़ रही समान नागरिक संहिता की राह? मुस्लिम भी पक्ष में

भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में बड़े कदम। पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में UCC बिल की तैयारी। मुस्लिम महिलाओं सहित 93% लोगों का समर्थन। सुप्रीम कोर्ट और PM मोदी का UCC पर मजबूत रुख।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Jun 27, 2026, 10:48 am IST
inभारत, विश्लेषण
UCC

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत के पंथनिरपेक्ष देश होने के बावजूद हर धर्म के लिए अलग-अलग कानून है। कई भाजपा शासित राज्यों ने अब इस जंजीर को तोड़ने के लिए कदम बढ़ा दिया है और राज्यों में समान नागरिक संहिता के आहट की गूंज सुनाई दे रही है। यह गूंज एक देश, एक पहचान और एक कानून के लिए है। यह समाज के हर वर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह कानून कभी सिर्फ संविधान की किताबों और बंद कमरों की बहसों तक में सीमित था। इस कानून को दशकों तक सिर्फ केस मुकदमे की फाइलों में कैद रखा गया था।

वर्त्तमान में यूसीसी लागू करने वाले तीनों राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम भाजपा शासित ही हैं। यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में  हर मजहब की महिलाएं अपने अधिकारों के लिए किसी बंदिश की मोहताज नहीं रहेंगी। यूसीसी लागू करने की दिशा में पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। कई अन्य भाजपा शासित प्रदेशों के इस श्रेणी में जल्द ही शामिल होने की संभावना है।

यूसीसी लाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार यूसीसी को लेकर ऐतिहासिक कदम उठाने की दहलीज पर खड़ी है और 29 जून को विधानसभा में यूसीसी बिल पेश होने की संभावना है। भाजपा सरकार के पास प्रदेश में प्रचंड बहुमत है। अतएव इस बिल के पास होने में कोई भी रुकावट नहीं है। विधानसभा चुनावों में भाजपा ने वादा किया था कि राज्य की सत्ता में आने के 6 महीने के अंदर यूसीसी लागू करेगी।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार गुजरात और असम की तरह ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करेगी।

मध्य प्रदेश में मानसून सत्र में पेश किया जाएगा UCC विधेयक

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र में यूसीसी विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इसका प्रारूप तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने आम लोगों से 12 प्रश्नों पर सुझाव मांगे थे। प्रारूप तय करने वाली समिति को व्यक्तिगत श्रेणी में 9 लाख से भी अधिक सुझाव ऑनलाइन मिले। सुझाव देने वालों में 42% पुरुष, 58% महिलाएं और 100 से भी अधिक उभयलिंगी में शामिल हैं। इनमें से 93% ने यूसीसी का समर्थन किया है। 4 लाख महिलाओं में से तीन लाख  80 हजार यानी 95% और 5.5 लाख पुरुषों में से 5 लाख 10000 यानी 92% ने सुझाव दिया कि यूसीसी को लागू किया जाए।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि मध्य प्रदेश की बड़ी आदिवासी आबादी (करीब 1.53 करोड़) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और संस्कृति का पालन करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र रहेंगे।

मुस्लिमों ने भी किया यूसीसी का समर्थन

यूसीसी को मुस्लिम समुदाय का बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है। मध्य प्रदेश में 44,000 मुस्लिमों ने यूसीसी को लेकर सुझाव दिए हैं। इनमें से 21,000 यानी करीब 49% ने यूसीसी का समर्थन किया है। खास बात यह भी है कि यूसीसी को समर्थन के मामले में मुस्लिम समुदाय की महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। सुझाव देने वाली 71% मुस्लिम महिला चाहती हैं कि यूसीसी लागू हो। वहीं 38% मुस्लिम पुरुष इसके समर्थन में हैं। मुस्लिम वर्ग में थोड़ा बहुत विरोध नजर आ रहा है क्योंकि वह अपनी पुरातन व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं। इनमें ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी भी शामिल हैं, जिन्होंने इस्लामिक देशों की न्याय व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि यूसीसी का उन्होंने विरोध किया है। यह बताता है कि यूसीसी को धर्म के चश्मे से देखने की राजनीति भी हो रही है।

महाराष्ट्र सरकार भी यूसीसी को लागू करेगी

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में समान नागरिक संहिता को हर हाल में लागू किया जाएगा। महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने यूसीसी के अध्ययन के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाने का आधिकारिक तौर पर ऐलान भी कर दिया है। राजस्थान की भाजपा सरकार भी यूसीसी लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। 22 जून को राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेघम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में यूसीसी लागू करने के लिए 5 सदस्यीय एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी UCC के लिए गठित की समिति

छत्तीसगढ़ में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में विष्णु देव साईं सरकार ने बड़ा कदम उठा लिया है। राज्य सरकार ने यूसीसी का अध्ययन, सुझाव और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए पांच सदस्य उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एम के राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में वर्तमान विधिक स्थिति का अध्ययन करेगी और विवाह, तलाक, भरण पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और संबंधित विषयों पर समाहिता के लिए सुझाव देगी।

सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है यूसीसी का समर्थन

कई बार सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के कई हाईकोर्ट यूसीसी का समर्थन कर चुके हैं। 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट को लागू करने की वकालत की थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी की थी और कहा था कि यदि अदालत शरिया उत्तराधिकार कानून को रद्द कर देती है, तो इससे एक कानूनी शून्य पैदा हो जाएगा, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई संवैधानिक कानून नहीं है। महिलाओं के अधिकारों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही थी। इस मुद्दे का स्थाई समाधान समान नागरिक संहिता ही है। यूसीसी कई विषमताओं को खत्म करेगा। लेकिन इसे लागू करने का फैसला संसद को लेना होगा।

शाहबानों केस में भी SC ने की थी UCC की बात

1985 में शाहबानो केस और 1995 में सरला मुद्गल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता को लेकर जो टिप्पणियां की थी, उसके बाद इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था। 1973 के ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले में 13 न्यायाधीशों की खंडपीठ का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन चीफ जस्टिस एस.एम. सीकरी ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत) के तहत यह राज्य का कर्तव्य है कि वह पूरे भारत में अपने नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करें।

मुस्लिम महिलाओं के भरण पोषण से संबंधित 1985 के चर्चित शाहबानो मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह अफसोस की बात है कि संविधान का अनुच्छेद 44 डेड लेटर बना हुआ है कहकर सरकार को फिर याद दिलाया कि गेंद उसी के पाले में है और उसे इसे लागू करने के लिए कदम उठाना चाहिए। 1994 में सर्वमित्रा सिंह बनाम वेंकटेश्वर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यूसीसी लागू करना संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों के मुताबिक है।

वहीं 1995 के सरला मुद्गल मामले में तो सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने सरकार को यूसीसी लागू करने की सीधी हिदायत भी दी थी। जस्टिस कुलदीप सिंह ने सरकार से अनुच्छेद 44 पर नए सिरे से विचार करने और समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास करने के लिए कहा था। 2003 के जॉन वल्लमट्टम  केस में मुख्य न्यायाधीश वी एन खरे ने कहा था कि अनुच्छेद 44 को अब तक लागू नहीं कर पाना संविधान की विफलता है। वहीं 2017 में ट्रिपल तलाक यानी तलाक बिद्दत के मामले में फैसला सुनाते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता की आवश्यकता का जिक्र किया था। 2019 में जोस पोलो कॉन्टिन मामले में जस्टिस दीपक गुप्ता ने इस बात को लेकर नाराजगी भी जताई थी कि संविधान निर्माताओं की आशाओं और उम्मीदों के बावजूद यूसीसी लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

PM मोदी का संकल्प है UCC

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर यूसीसी को लागू करने का संकल्प जता चुके हैं। 15 अगस्त 2024 पीएम मोदी लाल किले से, दिसंबर 2024 में भी संसद में उन्होंने यूसीसी को लेकर संकल्प दोहराया था। इसी साल 6 अप्रैल को भी उन्होंने यूसीसी लागू करने की जरूरत बताई थी। यूसीसी को लेकर जारी राज्यों के यह कदम साफ इशारा कर रहा है कि अब देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी की मंजिल ज्यादा दूर नहीं है । पूरे देश में जल्द ही समान नागरिक संहिता का नया सवेरा होने वाला है।

Topics: UCCशाहबानो केसशुभेंदु अधिकारी UCCसरला मुद्गल केससमान नागरिक संहिता
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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