बेंगलुरु, कर्नाटक। शिक्षा जगत में भारतीय दृष्टिकोण को स्थापित करने और राष्ट्रीय शिक्षा पुनरुत्थान को गति देने के उद्देश्य से संचालित भारतीय शिक्षण मंडल की अत्यंत महत्वपूर्ण अखिल भारतीय बैठक बेंगलुरु में सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। बेंगलुरु स्थित सुप्रसिद्ध ‘आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर’ (Art of Living International Center) में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के विभिन्न प्रांतों से आए अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्यों और प्रमुख दायित्ववान कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।
इस महाबैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के विशेष परिप्रेक्ष्य में आने वाले वर्षों के लिए शिक्षा के भारतीयकरण, सांगठनिक विस्तार और भावी कार्ययोजनाओं का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया।
बैठक में मौजूद रहा शीर्ष नेतृत्व: एक नज़र में
शिक्षा के क्षेत्र में युगांतकारी परिवर्तन लाने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में भारतीय शिक्षण मंडल के शीर्ष सांगठनिक नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को भविष्य का पाथेय दिया। बैठक के मुख्य मार्गदर्शकों और पदाधिकारियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| पदाधिकारी एवं शिक्षाविद का नाम | अखिल भारतीय सांगठनिक दायित्व (Role) |
|---|---|
| प्रो. सच्चिदानंद जोशी (Prof. Sachchidanand Joshi) | अखिल भारतीय अध्यक्ष |
| प्रो. सुहास पेडणेकर (Prof. Suhas Pednekar) | कार्यकारी अध्यक्ष |
| प्रो. भरतशरण सिंह (Prof. Bharatsharan Singh) | अखिल भारतीय महामंत्री |
| बी. आर. शंकरानंद (B. R. Shankaranand) | अखिल भारतीय संगठन मंत्री |
पंच परिवर्तन और विजन-2030
दो दिवसीय गहन सांगठनिक मंथन के दौरान मंडल के पदाधिकारियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ-साथ समाज में शिक्षा के प्रति भारतीय दृष्टि को जगाना अनिवार्य है। बैठक के मुख्य वैचारिक और क्रियान्वयन बिंदु निम्नलिखित रहे:
- संघ शताब्दी वर्ष कार्ययोजना: आरएसएस के शताब्दी वर्ष के निमित्त शिक्षण मंडल ने पूरे देश के शैक्षणिक संस्थानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच व्यापक संपर्क अभियान चलाने की विशेष कार्ययोजना स्वीकृत की है।
- पंच परिवर्तन के विविध आयाम: समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण उत्थान के लिए तय किए गए ‘पंच परिवर्तन’ के लक्ष्यों को शिक्षा के माध्यम से धरातल पर उतारने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।
- उन्मेष आनंदशालाओं का प्रभावी आयोजन: बच्चों और किशोरों में बचपन से ही भारतीय संस्कारों और मूल्यों को बीजारोपित करने के लिए ‘उन्मेष आनंदशालाओं’ के दायरे को बढ़ाने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
- विजन-2030 के वैश्विक लक्ष्य: वर्ष 2030 तक भारतीय शिक्षण मंडल के शैक्षणिक और सामाजिक विस्तार के जो लक्ष्य तय किए गए हैं, उनकी समीक्षा की गई और नए अभ्यास वर्गों (Workshops) के आयोजन का खाका खींचा गया।
“भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा का प्रसार केवल एक अकादमिक विधा नहीं है, बल्कि यह देश के राष्ट्रीय पुनरुत्थान की आत्मा है। हमें समाज के प्रत्येक स्तर तक— सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर बड़े विश्वविद्यालयों तक— शिक्षा के वास्तविक भारतीय दृष्टिकोण को पहुँचाना होगा। इसके लिए कार्यकर्ता विकास और सांगठनिक सुदृढ़ीकरण को सर्वोपरि प्राथमिकता दी जाएगी।”
– सांगठनिक आह्वान
राष्ट्रीय शिक्षा पुनरुत्थान के संकल्प की पुनरावृत्ति
बैठक के समापन सत्र में सभी उपस्थित अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक नई ऊर्जा और सुस्पष्ट दिशा के साथ अपने-अपने प्रांतों में लौटने का निश्चय किया। भारतीय शिक्षण मंडल ने आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सनातन ज्ञान संपदा, लोक-संस्कृति और वैज्ञानिक चेतना से ओतप्रोत शिक्षा पद्धति को समाज में मुख्यधारा में लाने के अपने संकल्प को पुनः दोहराया।
आगामी शैक्षणिक सत्रों में मंडल द्वारा देश भर के प्रबुद्ध वर्ग, कुलपतियों, प्राचार्यों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि विजन-2030 के लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर हासिल किया जा सके।











