भुवनेश्वर: पूर्वी भारत के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को सीआईआई ईस्टर्न रीजनल काउंसिल सम्मेलन-2026 के दौरान ‘गो ईस्ट’ (Go East) प्लेटफॉर्म की घोषणा की। इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिकीकरण को गति देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके तहत निवेशकों को नीति समर्थन, संस्थागत सहयोग और परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
‘गो ईस्ट’: निवेश को गति देने वाला नया मंच
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘Go East’ का पूरा नाम Government of Odisha – Eastern Investment Accelerator and Special Task Force है। इस मंच का उद्देश्य पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योग समूहों को अपने-अपने राज्यों में औद्योगिक आधार और बाजार को सुरक्षित रखते हुए ओडिशा में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि यह पहल उद्योगों और सरकार के बीच एक रणनीतिक साझेदारी का मॉडल होगी, जिसके माध्यम से निवेशकों को बेहतर अवसर, त्वरित स्वीकृतियां, नीतिगत सहयोग और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पिछले दो वर्षों में ओडिशा के औद्योगिक विकास ने नई गति प्राप्त की है और आने वाले पांच वर्षों में राज्य पूर्वी भारत का सबसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन जाएगा। उन्होंने कहा, “हम केवल निवेश आकर्षित नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं जो निवेश परियोजनाओं को रिकॉर्ड समय में धरातल पर उतार सके।”

उच्च स्तरीय टास्क फोर्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था
निवेश परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार एक उच्च स्तरीय विशेष टास्क फोर्स का गठन करेगी। यह टास्क फोर्स विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर औद्योगिक परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति और क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही राज्य की निवेश प्रोत्साहन संस्था आईपीआईसीओएल (IPICOL) में एक समर्पित ‘गो ईस्ट सेल’ की स्थापना की जाएगी, जो निवेशकों को परियोजना के प्रत्येक चरण में सहयोग प्रदान करेगी। निवेश प्रस्तावों और अनुमोदन की स्थिति की रियल-टाइम निगरानी के लिए ‘गो स्विफ्ट’ (Go Swift) नामक विशेष मॉड्यूल भी विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संस्थागत सुधारों से प्रक्रियागत विलंब में उल्लेखनीय कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।
सीमावर्ती एवं पिछड़े जिलों में औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
‘गो ईस्ट’ पहल का एक प्रमुख उद्देश्य समावेशी औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आकर्षित किए जाएंगे तथा नए औद्योगिक विकास केंद्र (Industrial Growth Centres) स्थापित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे उन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी जो अब तक औद्योगिक विकास की मुख्यधारा से बाहर रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय आधारभूत संरचना का विकास होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित क्षेत्रीय विकास राज्य की औद्योगिक रणनीति का प्रमुख आधार रहेगा।
औद्योगिक नीति 2022 में बड़े संशोधन
सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार ने औद्योगिक नीति संकल्प (IPR)-2022 में महत्वपूर्ण संशोधनों की भी घोषणा की। संशोधित नीति के तहत बलांगीर, कालाहांडी, नुआपाड़ा, कंधमाल, बौद्ध, गजपति सहित कुल 15 जिलों को गैर-खनिज आधारित उद्योगों के विकास के लिए ‘थ्रस्ट सेक्टर’ का दर्जा दिया गया है।
सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को केवल खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करेगा तथा रोजगार सृजन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देगा। साथ ही इससे क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।
पूर्वी भारत बनेगा देश की नई विकास धुरी
उद्योग जगत को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों से भारत का आर्थिक विकास मुख्यतः पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों पर केंद्रित रहा है। हालांकि अब देश के विकास की अगली बड़ी कहानी पूर्वी भारत में लिखी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रचुर खनिज संसाधन, व्यापक कृषि क्षमता, लंबी समुद्री तटरेखा, बेहतर संपर्क व्यवस्था और युवा कार्यबल पूर्वी भारत को तीव्र औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने ‘समृद्ध ओडिशा-2036’ के विजन को ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि ओडिशा पूर्वी भारत का सबसे निवेशक-अनुकूल राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सुधारों से परियोजना स्वीकृति का समय हुआ कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए डीरेग्युलेशन 1.0 और डीरेग्युलेशन 2.0 सुधारों के कारण औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना में लगने वाला समय लगभग 400 दिनों से घटकर 160 दिनों से भी कम हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य भविष्य में इस अवधि को 100 दिनों से कम करना है, जिससे ओडिशा देश के सबसे तेज़ परियोजना स्वीकृति वाले राज्यों में शामिल हो सके।
निवेश परियोजनाओं में रिकॉर्ड प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य सरकार ने लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 477 औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से लगभग छह लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इनमें से 3.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 12 प्रमुख परियोजनाओं का ग्राउंडिंग कार्य पूरा हो चुका है और वे उद्घाटन के चरण में पहुंच चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि ओडिशा केवल निवेश आकर्षित ही नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक धरातल पर भी उतार रहा है।
खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ रहा है ओडिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा अब केवल खनिज आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। राज्य इस्पात, एल्युमिनियम, रसायन, पारादीप पेट्रोकेमिकल हब के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और भविष्य की प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह विविधीकरण रणनीति वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में ओडिशा की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेगी।
कौशल विकास पर सरकार का विशेष जोर
राज्य के उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ओडिशा की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा और कुशल मानव संसाधन है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही है ताकि निवेशकों को प्रशिक्षित एवं दक्ष कार्यबल उपलब्ध हो सके। उनके अनुसार, ‘गो ईस्ट’ पहल सीमावर्ती और पिछड़े जिलों में औद्योगिकीकरण के एक नए युग की शुरुआत करेगी।
निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया औद्योगिक विकास का खाका
कार्यक्रम के प्रारंभ में उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ओडिशा के औद्योगिक विकास और निवेश उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने राज्य की सुदृढ़ सिंगल विंडो प्रणाली, विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे, बेहतर हवाई एवं बंदरगाह संपर्क तथा परियोजनाओं के तेज़ क्रियान्वयन को निवेशकों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इन पहलों के कारण ओडिशा आज केवल पूर्वी भारत ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
उद्योग जगत से साझेदारी का आह्वान
सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने देश के उद्योग जगत से ओडिशा के विकास अभियान में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने उद्योगों से ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में सहयोग करने का आग्रह करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में ओडिशा पूर्वी भारत के औद्योगिक पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

















