Explainer: डेनमार्क सरकार 'लाउडस्पीकर से अजान' पर पूर्ण प्रतिबंध की क्यों कर रही तैयारी?
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Explainer: डेनमार्क सरकार ‘लाउडस्पीकर से अजान’ पर पूर्ण प्रतिबंध की क्यों कर रही तैयारी?

डेनिश सरकार देश की तमाम मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी रास्ते और संभावनाओं को तलाश रही है।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Mahak Singh
Jun 26, 2026, 01:04 pm IST
inविश्व
अजान न पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी (AI Generated Image)

अजान न पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी (AI Generated Image)

यूरोप के स्कैंडेनेवियाई क्षेत्र में बसा खूबसूरत देश डेनमार्क इन दिनों चर्चा में है। वजह है अजान। वहां अजान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

डेनिश सरकार देश की तमाम मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी रास्ते और संभावनाओं को तलाश रही है। सरकार के इस कदम को जहां एक तरफ लोग सांस्कृतिक संरक्षण मान रहे हैं, वहीं देश के विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इसे मजहबी आजादी पर हमला करार दिया है। क्या है इस विवाद की पूरी जड़ और आखिर क्यों डेनिश सरकार अजान पर बैन लगाना चाहती है चलिए जानते हैं।

क्या है पूरा विवाद और डेनिश सरकार की योजना?

ताजा विवाद डेनमार्क सरकार के उस फैसले से शुरू हुआ है जिसके तहत वह देश में एक नया कानून लाने की योजना बना रही है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों खासतौर पर मस्जिदों की छतों से लाउडस्पीकर के जरिए दी जाने वाली अजान की आवाज पर हमेशा के लिए रोक लगाना है। सरकार का तर्क है कि अजान की गूंज और इस तरह के मजहबी प्रदर्शन सार्वजनिक स्थानों पर डेनमार्क की मूल सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और परंपराओं का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए इन्हें रोका जाना बेहद जरूरी है।

इमिग्रेशन मंत्री का बयान

डेनमार्क के इमिग्रेशन एंड इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने भी एक बयान जारी किया। डेनिश समाचार एजेंसी रिट्जाउ को दिए गए इंटरव्यू में मंत्री ने कहा, ‘अजान की आवाज डेनमार्क की छतों के ऊपर बिल्कुल भी सुनाई नहीं देनी चाहिए। हमारे देश की संस्कृति में इस तरह की चीजों के लिए कोई स्थान नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर घूमते समय हमारे नागरिकों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में घूम रहे हैं या फिर पाकिस्तान के इस्लामाबाद के किसी उपनगर में पहुंच गए हैं।’ मोर्टन बोडस्कोव का मानना है कि यूरोपीय समाज की सार्वजनिक जिंदगी में बढ़ती इस्लामीकरण की प्रवृत्ति और प्रभाव को समय रहते रोकना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ सरकार अब फिर से इस बात की कानूनी समीक्षा और जांच शुरू कर रही है कि देश के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के दायरे में रहते हुए सार्वजनिक अजान पर देशभर में वैध पाबंदी कैसे लगाई जा सकती है।

डेनमार्क सरकार के तर्क

डेनमार्क सरकार का मानना है कि अजान का सार्वजनिक प्रसार डेनमार्क के धर्मनिरपेक्ष और पारंपरिक ताने-बाने पर हावी हो रहा है। इसको रोकना उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए जरूरी है।

प्रतिबंध का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवियों और राजनेताओं का तर्क है कि आज स्मार्टफोन, ऐप्स और डिजिटल अलार्म का दौर है। हर किसी के पास नमाज के समय के रिमाइंडर अपनी जेब में मौजूद हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर भारी-भरकम लाउडस्पीकरों के जरिए आवाज फैलाना धार्मिक आवश्यकता नहीं बल्कि ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर एक विशेष संस्कृति को थोपने जैसा है। यही नहीं डेनमार्क के कई हिस्सों में पहले से ही स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लागू हैं। जैसे राजधानी कोपेनहेगन में ध्वनि प्रदूषण के कड़े नियमों के कारण मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर अजान नहीं दी जाती है। यहां तक कि कोपेनहेगन की ग्रैंड मस्जिद का भी स्थानीय प्रशासन के साथ एक स्वैच्छिक समझौता है कि वे बाहर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सरकार अब इन नियमों की जगह एक स्पष्ट राष्ट्रव्यापी कानून बनाना चाहती है।

पहले भी किया गया है प्रयास

दिलचस्प बात यह है कि डेनमार्क में मस्जिदों से दी जाने वाली अजान की आवाज को बंद करने की यह कोई पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले भी डेनिश संसद और सरकार के भीतर इस मुद्दे को उठाया जा चुका है। 2020 डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टियों ने संसद में अजान के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन तब कानूनी अड़चनों और कड़े विरोध के कारण यह आगे नहीं बढ़ सका।

पिछले साल यानी 2025 में भी सोशल डेमोग्रेट्स और अन्य सहयोगी दलों ने इस पर कानून बनाने की वकालत की थी, लेकिन यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी नियमों के चलते मामला बीच में लटक गया। अब मोर्टन बोडस्कोव इस दिशा में आक्रामक कदम उठाने वाले तीसरे सोशल डेमोक्रेट मंत्री बन गए हैं जो किसी भी कीमत पर इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए अड़े हुए हैं।

डेनमार्क में कितनी है मुस्लिम आबादी?

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और आंकड़ों के अनुसार डेनमार्क में मुस्लिम समुदाय की कुल आबादी लगभग 2 लाख 95 हजार है। यह संख्या डेनमार्क की कुल आबादी का करीब 4.5 प्रतिशत है। पिछले कुछ दशकों में युद्धग्रस्त देशों से आए शरणार्थियों, इमिग्रेशन और नई पीढ़ी के जन्म के कारण मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। वह धीरे-धीरे वहां के रंग में रंग गए हैं।

दूसरी तरफ विपक्षी दलों का कहना है कि यदि आज अजान पर रोक लगती है तो कल चर्च की घंटियों या अन्य मजहबों की प्रार्थनाओं पर भी संकट आ सकता है, जो डेनमार्क के लोकतांत्रिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

Topics: Denmark Azan BanMorten BodskovMuslim Denmarkअजान पर बैनइमिग्रेशन मंत्री मोर्टन बोडस्कोवpanchjanya explianerमस्जिदों में लाउडस्पीकरमुस्लिमeuropeयूरोपडेनमार्क
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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