
प्रतीकात्मक तस्वीर
भारत सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र को और तेजी से आगे बढ़ाने के लिए PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) की तकनीक निजी कंपनियों को ट्रांसफर करने की योजना बना रही है। इसका मकसद छोटे उपग्रहों के लॉन्च को आसान बनाना, घरेलू रॉकेट बनाने की क्षमता बढ़ाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
इन-स्पेस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) के चेयरमैन पवन गोयनका ने बताया कि PSLV टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी कर दिया गया है। सिर्फ वे भारतीय कंपनियां ही इसमें हिस्सा ले सकेंगी जिनमें बहुसंख्यक स्वामित्व और नियंत्रण भारतीयों का हो।
PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहन है। यह छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में भेजने के लिए जाना जाता है और इसका ट्रैक रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। इस टेक्नोलॉजी के निजी हाथों में जाने से कंपनियां खुद PSLV क्लास के रॉकेट बना और लॉन्च कर सकेंगी। इससे ISRO और दूसरे सरकारी संगठनों पर बोझ कम होगा।
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2019 में सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था। उसके बाद कई स्टार्टअप्स आए और बड़े कॉर्पोरेट्स भी उपग्रह और संचार से जुड़ी परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं। अब PSLV टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर भारत को छोटे उपग्रह लॉन्च के वैश्विक हब बनाने में मदद करेगा, जहां लागत कम रखते हुए बार-बार लॉन्च की जरूरत है।
PSLV की विश्वसनीयता बहुत ऊंची मानी जाती है। हालांकि पिछले साल दो मिशन असफल रहे थे, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ये अस्थायी समस्या थीं। पहले के 60 से ज्यादा लगातार सफल लॉन्च इसकी ताकत दिखाते हैं। निजी क्षेत्र के आने से और सुधार की उम्मीद है।