पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में रहने वाले लोगों को गैर-कश्मीरी कहा है। उन्होंने कहा कि रावलकोट और मीरपुर में रहने वाले लोग कश्मीरी नहीं हैं। उनके इस बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान के बाद यूरोप और ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों में भारी नाराजगी है। पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई जिसके बाद पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इस्तीफे की मांग कर दी।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बिगड़े बोल
दरअसल, ख्वाजा आसिफ ने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में तर्क दिया था कि रावलकोट और मीरपुर के लोग कश्मीरी भाषा नहीं बल्कि पोटोहारी और पहाड़ी बोलते हैं। इसलिए वे कश्मीरी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का साथ देकर मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
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इस बयान ने दशकों से पाकिस्तान का समर्थन करने वाले विशाल मीरपुरी समुदाय को गहरा झटका दिया है। गौरतलब है कि सितंबर 1960 में सिंधु जल समझौते के बाद मंगला बांध के निर्माण के कारण करीब 150000 मीरपुरी बेघर हो गए थे, जिनके पूर्वजों के घर और मस्जिदें पानी में डूब गईं। इस त्याग के बावजूद खुद को ‘गैर-कश्मीरी’ कहे जाने पर वे हैरान हैं।
बिलावल भुट्टो ने साधा निशाना
इस विवाद के बाद पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से ख्वाजा आसिफ को कैबिनेट से निकालने की मांग की है। बिलावल ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि आसिफ, पीएम शरीफ के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
विवाद बढ़ता देख ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई देते हुए लिखा कि ‘कश्मीरियत जन्म प्रमाण पत्र से नहीं बल्कि पिछले आठ दशकों के संघर्ष और बलिदानों से तय होती है।’

















