पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POJK) में इन दिनों बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। संयुक्त आवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के नेतृत्व में लोग सड़कों पर हैं। पाकिस्तान सरकार पर आरोप है कि वह विरोध को दबाने के लिए खाने-पीने, ईंधन और दवाइयों की सप्लाई रोक रही है। स्थानीय लोग, ट्रक ड्राइवर और विपक्षी नेता इसकी शिकायत कर रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारी इन आरोपों से इनकार करते हैं, लेकिन अब खबर सामने आ रही है कि पाकिस्तानी सेना ने निर्दोष लोगों पर न केवल गोलियां बरसाई और फिर नौजवानों की शवों का अपहरण कर लिया।
क्या है विवाद की जड़?
POJK की विधानसभा में 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो भारतीय कश्मीर से आए थे। स्थानीय लोग कहते हैं कि पाकिस्तान इन सीटों का इस्तेमाल चुनाव प्रभावित करने और अपनी मनमाफिक सरकार बनाने के लिए करता है। JAAC इसी मांग को लेकर विरोध कर रहा है कि ये सीटें खत्म की जाएं। प्रदर्शन तेज होने पर पाकिस्तान ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और इसके समर्थकों पर कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन झड़पों में कम से कम 58 लोग मारे गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में JAAC का बंद चला, जिससे ट्रांसपोर्ट, बाजार और रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई।
खाने, दवा और ईंधन की भारी कमी
मुजफ्फराबाद (POJK की राजधानी) समेत कई इलाकों में दुकानें बंद हैं। 64 साल के मुहम्मद मसकीन ने AFP को बताया कि उन्होंने दवा ढूंढने के लिए बहुत कोशिश की, लेकिन बड़ी-बड़ी दुकानें भी बंद मिलीं। दूसरे रहने वाले सबर हुसैन ने कहा कि एक हफ्ते से ज्यादा समय से बाजार बंद हैं और खाने का सामान कम होता जा रहा है। नीलम घाटी, पूंछ, रावलाकोट और बाग इलाकों में भी यही हाल है। अलिफ दीन नाम के एक व्यक्ति ने BBC उर्दू को बताया कि 15 दिन से राशन डिपो में पैसे जमा कर रहे हैं, लेकिन आटा नहीं मिल रहा। बाजार में जो थोड़ा बहुत मिल रहा है, उसकी कीमत भी बहुत बढ़ गई है।
ईंधन की स्थिति और खराब है। Dawn अखबार ने लिखा कि पूंछ और मुजफ्फराबाद में पेट्रोल पंप बंद हैं। लोग ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर तेल खरीद रहे हैं।
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ट्रकों और गाड़ियों को रोका जा रहा है?
कई लोग पाकिस्तान के अंदर जाकर सामान खरीद रहे हैं – जैसे रावलपिंडी या इस्लामाबाद से आटा, चावल, दाल, दवा और पेट्रोल। लेकिन वापस POJK लाते समय चेकपोस्ट पर रोका जा रहा है। एक रहने वाले नावेद ने BBC उर्दू को बताया कि आजाद पट्टन के पास पुलिस ने उनकी गाड़ी रोकी। उन्होंने खाना, दवा और पेट्रोल फेंकने को कहा, वरना जाने नहीं दिया। नावेद ने कहा कि उनकी पत्नी गर्भवती है और घर में भूखे मरने जैसी स्थिति हो गई है, लेकिन पुलिस नहीं मानी।
ट्रक ड्राइवरों का भी यही कहना है। आजाद पट्टन और फगवारी चेकपोस्ट पर आटा, चावल, सब्जी वाले ट्रक रोके जा रहे हैं। कई ट्रक दिन-रात सड़क किनारे खड़े हैं, जिससे सामान खराब हो रहा है। PTI के POJK चैप्टर ने भी इसे “फिरौन जैसी ज्यादती” बताया है।
सरकार का पक्ष
POJK पुलिस चीफ और स्थानीय प्रशासन ने BBC Urdu को बताया कि कोई ब्लॉकेड नहीं है और जरूरी सामान की डिलीवरी जारी है। Dawn के एक रिपोर्ट में एक अज्ञात अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों तक सप्लाई रोकने की रणनीति अपनाई गई है ताकि बिना बल प्रयोग के सिट-इन खत्म हो सके। वहीं दूसरी ओर JAAC का आंदोलन बढ़ता जा रहा है। रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले दो हफ्तों में 70,000 से ज्यादा लोग जमा हुए हैं। JAAC नेता 1 लाख से ज्यादा लोगों के साथ मुजफ्फराबाद मार्च का ऐलान कर चुके हैं।












