कर्णावती/अहमदाबाद। गुजरात में मंगलवार से शाला प्रवेशोत्सव का प्रारंभ किया गया। इसके तहत राज्य के अंतिम छोर के इलाकों में रहने वाले अगरिया समुदाय के बच्चों को भी शिक्षा मिल सके, इसके लिए राज्य सरकार ने एक अनूठी पहल शुरू की है। जिसके तहत “School On Wheels” प्रोजेक्ट के अंतर्गत उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने 28 ‘रणशाला’ का लोकार्पण किया। ये रणशाला अब रेगिस्तान जैसे अंतिम छोर के इलाकों में रहकर नमक पकाने का काम करने वाले अगरिया समुदाय के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाएंगी।
गुजरात में तीन दिन के लिए शाला प्रवेशोत्सव का प्रारंभ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया। मुख्यमंत्री ने वडनगर से इस कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। गांधीनगर के पथिकाश्रम बस डिपो से उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गुजरात सरकार की इस अनूठी पहल के तहत 28 रणशाला को प्रस्थान करवाया। इस अवसर पर हर्ष सांघवी ने बताया कि, बिन-उपयोगी हो चुकी बसों से बच्चों के लिए आधुनिक क्लासरूम तैयार किए गए हैं। आने वाले दिनों में सरकार अभी और रणशाला शुरू करेगी जो मोबाइल क्लासरूम के रूप में काम करेंगी।
સ્કૂલ ઓન વ્હીલ્સ…#ShalaPraveshotsav2026 pic.twitter.com/vKbOuarvkS
— Harsh Sanghavi (@sanghaviharsh) June 23, 2026
क्या है रणशाला प्रोजेक्ट
रणशाला प्रोजेक्ट एक यूनिक प्रोजेक्ट है। ST विभाग की कंडम हो चुकी बसों का उपयोग करके उन्हें स्कूल में बदल दिया गया है। नमक के अग्र में काम करने वाले अगरियाओं को उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए गांवों में दूर तक न जाना पड़े, इसके लिए ये रणशाला शुरू की गई हैं जो बच्चों तक शिक्षा लेकर जाएंगी।
बच्चों की रणशाला कैसी होगी
हर मोबाइल स्कूल GSRTC की रिटायर्ड बसों को आधुनिक शिक्षा स्पेस में बदलकर बनाई गई है। ये बसें 3.8 KVA ऑफ-ग्रिड सोलर पावर प्लांट से लैस हैं, जो बिजली कनेक्शन के बिना भी 48 घंटे तक बस को चालू रख सकती हैं। इस सोलर संचालित क्लासरूम में 43 इंच का स्मार्ट टीवी, डिश टीवी कनेक्टिविटी से शैक्षणिक चैनल, FM रेडियो, डिजिटल घड़ी, LED लाइटिंग सिस्टम, वॉल फैन और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन शिक्षा को सपोर्ट करने वाले लर्निंग एड्स यानी शैक्षणिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
चुनौतीपूर्ण और विषम जलवायु के बीच भी बच्चे उत्साह से पढ़ाई कर सकें, इसके लिए क्लासरूम को आरामदायक बनाया गया है। इसमें पोर्टेबल स्टडी टेबल और बैठने की व्यवस्था, फोल्ड हो सकने वाले आउटडोर शेड्स – शेड नेट, अलग किए जा सकने वाले ब्लैकबोर्ड और व्हाइटबोर्ड, नोटिस बोर्ड, शुद्ध पीने के पानी की सिस्टम, वॉश बेसिन, वाटर स्टोरेज टैंक, शिक्षकों के लिए अलग केबिन और समर्पित लाइब्रेरी स्पेस शामिल है।
इसके अलावा, बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए, बस में इंडोर और आउटडोर मनोरंजन की सुविधाएं जैसे लूडो, सांप-सीढ़ी, समय की अवधारणाएं सीखने के लिए मॉडल क्लॉक, झूले, स्लाइड और बास्केटबॉल सेटअप शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल वेइंग स्केल, हाइट मेजरमेंट सिस्टम और BMI चार्ट भी रखे गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया
सुरक्षा और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। हर बस इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशामक उपकरण, फर्स्ट-एड किट, डस्टबिन और सैनिटाइजेशन किट से लैस है। इसके साथ ही बस के अंदर और बाहर आकर्षक शैक्षणिक ग्राफिक्स, आर्टवर्क, राष्ट्रीय प्रतीक और शिक्षाप्रद विजुअल डिस्प्ले लगाए गए हैं ताकि पढ़ाई का उत्साहजनक माहौल बनाया जा सके।
GSRTC और सर्व शिक्षा अभियान के संयुक्त उपक्रम से तैयार की गई ये रणशाला सुरेंद्रनगर जिले के पाटड़ी तालुका में सबसे ज्यादा 20, पाटण के सातलपुर में 4, कच्छ के अंजार में 2 तथा मोरबी के माळिया में 2, इस तरह कुल 28 बसें शिक्षा के यज्ञ में शामिल हुई हैं।

















