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Shyama Prasad Mukherjee की मौत की जांच से Nehru क्यों डरे?

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि स्वतंत्र भारत की राष्ट्रवादी चेतना के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे।

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Panchjanya

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि स्वतंत्र भारत की राष्ट्रवादी चेतना के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे। बंगाल के विभाजन से लेकर कश्मीर के पूर्ण एकीकरण तक, उनके विचारों और संघर्षों ने भारत की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। उनकी पुण्यतिथि पर To The Point के इस विशेष एपिसोड में पाञ्चजन्य की कंसल्टिंग एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव ने प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर कपिल कुमार के साथ इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों पर तथ्यपूर्ण और गहन चर्चा की है। इस चर्चा में प्रमुख विषय:

🔸 बंगाल की राजनीति में डॉ. मुखर्जी की भूमिका

🔸 प्रजा कृषक पार्टी, मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा की संयुक्त सरकार का संदर्भ

🔸 1942 में वायसराय को लिखे गए उनके महत्वपूर्ण पत्र

🔸 आज़ाद हिंद फौज के प्रति उनका दृष्टिकोण 🔸 नोआखली हिंदू नरसंहार के समय उनके प्रयास

🔸 अंतरिम सरकार और विभाजन के दौर में उनकी भूमिका

🔸 पश्चिम बंगाल को पाकिस्तान में जाने से रोकने का संघर्ष

🔸 कश्मीर, अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय एकीकरण पर उनके विचार

🔸 कश्मीर की जेल में हुई उनकी मृत्यु से जुड़े प्रश्न

🔸 उनकी माता योगमाया देवी द्वारा जांच की मांग और नेहरू सरकार का रुख

🔸 अनुच्छेद 370 की समाप्ति और डॉ. मुखर्जी के संकल्प की प्रासंगिकता

🔸 वर्तमान बंगाल की राजनीति और डॉ. मुखर्जी के सपनों का मूल्यांकन क्या डॉ. मुखर्जी की कश्मीर संबंधी चेतावनियाँ समय के साथ सही साबित हुईं? क्या पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखने में उनकी भूमिका निर्णायक थी? और उनकी मृत्यु से जुड़े प्रश्न आज भी अनुत्तरित क्यों हैं?

इन सभी विषयों पर सुनिए यह विशेष संवाद।

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