पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मरदान जिले में एक गुरुद्वारे के अंदर सिख सेवादार दंपति (जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को लेकर दिल्ली तक के सिखों में बहुत आक्रोश है।
मृतक 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती गुरुद्वारे की देखभाल करने का काम लगभग बीस वर्षों से कर रहे थे। बुधवार को इस बुजुर्ग दम्पत्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसकी निंदा सिख संगठनों ने भी की थी।
एसजीपीजी के प्रमुख हरजिन्दर सिंह धामी ने इस हत्याकांड को पाकिस्तान में धार्मिक आजादी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर गंभीर हमला बताया था और यह कहा था कि इन हत्याओं से एक पवित्र स्थान की पवित्रता का उल्लंघन हुआ है।
सोशल मीडिया पर भी इस घटना की आलोचना हुई थी और लोगों ने कहा था कि इस घटना से पाकिस्तान की छवि को नुकसान हुआ है। पाकिस्तान यह दावा करता है कि वह अपने यहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है, मगर असलियत में ऐसा नहीं है। तभी तो एक गुरुद्वारे में काम करने वाले एक वृद्ध दम्पत्ति की हत्या कर दी गई।
हमला करने के बाद भाग गए हमलावर
पुलिस के अनुसार हमलावरों ने गुरुद्वारे में घुसकर गोलियां चलाई थीं, जिसके चलते जगन्नाथ और उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। उसके बाद वे लोग वहाँ से भाग गए थे।
लोगों का कहना था कि आज तक ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई थी। लोगों में आपसी भाईचारे की भी बात कही गई। यह भी कहा गया कि मरदान के इतिहास में हिंसा की इस प्रकार की पहली घटना थी। हर किसी को हैरानी है कि आखिर यह कैसे हो गया?
बुजुर्ग दम्पत्ति के रिश्तेदारों के अनुसार जिस समय यह घटना हुई थी, उस समय केवल तीन ही लोग गुरुद्वारे में मऐजूद थे।
इस घटना के बाद वहाँ पर रह रहे सिख समुदाय के लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया है।
मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार
इस हत्याकांड के मुख्य संदिग्ध शेरशाह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मरदान जिले के पुलिस अधिकारी (DPO) मसूद अहमद बंगश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य संदिग्ध की गिरफ़्तारी की पुष्टि की। संदिग्ध की पहचान अमेज़ुगारी के रहने वाले शेर शाह के तौर पर हुई है। मुख्य संदिग्ध एक पुलिस कांस्टेबल है जिसने पहले गुरुद्वारे में कई महीनों तक सुरक्षा ड्यूटी की थी
उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (JIT) बनाई गई है, जिसमें पुलिस अधिकारी, आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) के कर्मचारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
अल्पसंख्यकों पर हो रहे लगातार हमले
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले होते रहते हैं। हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों की लड़कियों का दिन दहाड़े अपहरण कर लिया जाता है। जबरन मतांतरण और निकाह भी आम हैं। ऐसे में यह हमला और भी बड़े प्रश्न उठाता है।
यह भी गौरतलब है कि पाकिस्तान की ड्रामा इंडस्ट्री में कोई भी ड्रामा पाकिस्तान के हिंदुओं या सिखों पर नहीं है। यदि किसी हिन्दू या ईसाई चरित्र को लिया भी जाता है तो अधिकतर काम वाली या ऐसे ही किसी चरित्र के रूप में दिखाया जाता है। हिन्दू या सिख कलाकार भी ड्रामा इंडस्ट्री में हैं या नहीं ये भी पता नहीं है।
लगातार वहाँ से अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव की खबरें आती रहती हैं।
ऐसे में अब इस हत्या के बाद लोगों में और भी रोष है क्योंकि इसमें हत्यारोपी और कोई नहीं बल्कि वह है, जिस पर सुरक्षा का जिम्मा था। यही कारण है कि पाकिस्तान मे ईसाई संगठनों ने यह मांग की है कि इसकी जांच हाई कोर्ट के जज से कराई जाए, क्योंकि आरोपी तो पुलिस से ही है। इसलिए पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कर भी पाएगी या नहीं, यह पता नहीं है। वाहें पुलिस का यह भी कहना है कि इसमें किसी भी तरह का कोई आतंकी एंगल नहीं दिख रहा है।
















