चेन्नई, तमिलनाडु। राष्ट्रीय सेवा भारती की दो दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण अखिल भारतीय बैठक का भव्य आयोजन तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 20-21 जून 2026 को अमृता विश्व विद्यापीठम् परिसर में आयोजित इस बैठक में देश भर से सेवा कार्यों से जुड़े शीर्ष नेतृत्व, विचारकों और कार्यकर्ताओं का समागम हुआ।
दो दिनों तक चले इस गहन वैचारिक मंथन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्वयंसेवकों को समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुटने का पाथेय दिया।

उद्घाटन सत्र और सांगठनिक प्रतिनिधित्व
बैठक के विभिन्न सत्रों में संघ और सेवा भारती के शीर्ष सांगठनिक पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस महाबैठक के मुख्य मंचासीन अतिथियों और उपस्थित वरिष्ठ नेतृत्व का विवरण निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है-
| सत्र एवं सांगठनिक भूमिका | उपस्थित शीर्ष नेतृत्व एवं अधिकारी |
|---|---|
| उद्घाटन सत्र (मंचासीन अतिथि) | • आलोक कुमार जी (सह सरकार्यवाह, RSS) • पराग अभ्यंकर जी (अखिल भारतीय सेवा प्रमुख, RSS) • सुनील सप्रे जी (अध्यक्ष, राष्ट्रीय सेवा भारती) • रेणु पाठक जी (महामंत्री, राष्ट्रीय सेवा भारती) • डॉ. वी. जयकुमार जी (प्रधानाचार्य, अमृता विश्व विद्यापीठम्) |
| प्रमुख सांगठनिक उपस्थिति | • राजकुमार मटाले जी (सह सेवा प्रमुख, RSS) • सेंथिल जी (सह सेवा प्रमुख, RSS) • सुधीर कुमार जी (अखिल भारतीय संगठन मंत्री, राष्ट्रीय सेवा भारती) • विजय पुराणिक जी (संयुक्त महामंत्री, राष्ट्रीय सेवा भारती) |
| अखिल भारतीय सहभागिता | देश भर के सभी प्रांतों के अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री, न्यास मंडल के सदस्य, अखिल भारतीय विषय प्रमुख, प्रांतीय सदस्य एवं महिला कार्यकर्ता। |
गौरवशाली सेवा परंपरा और ‘राष्ट्रीय सेवा साधना–2026’ का विमोचन
बैठक की औपचारिक शुरुआत करते हुए राष्ट्रीय सेवा भारती की महामंत्री रेणु पाठक जी ने दो दिवसीय बैठक की विस्तृत प्रस्तावना और कार्यसूची प्रस्तुत की। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथि डॉ. वी. जयकुमार जी ने समाज में चल रहे विभिन्न सेवाकार्यों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार इन सेवा प्रकल्पों के माध्यम से सुदूर ग्रामीण और वंचित समाज में सकारात्मक एवं दूरगामी सामाजिक परिवर्तन आ रहे हैं।
“भारत की सेवा परंपरा केवल एक औपचारिकता या मदद नहीं है, बल्कि यह हमारी आध्यात्मिक चेतना का अभिन्न अंग है। ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के मूल मंत्र को अपनाकर ही हम समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को गले लगा सकते हैं। सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में समरसता और शक्ति का संचार करना ही हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।” – पराग अभ्यंकर जी, अखिल भारतीय सेवा प्रमुख
छात्रावास विषय पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण
उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय सेवा भारती के बहुप्रतीक्षित वार्षिक विशेषांक ‘राष्ट्रीय सेवा साधना–2026’ का गरिमामय विमोचन किया गया। इस वर्ष का विशेषांक पूरी तरह से ‘छात्रावास’ (Hostels) विषय पर केंद्रित है। इस पुस्तिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं सेवा भारती द्वारा देश भर के जनजातीय, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे छात्रावासों की सफलता की कहानियां संकलित हैं। इसमें विभिन्न आलेखों के माध्यम से दर्शाया गया है कि कैसे ये छात्रावास वंचित वर्ग के बच्चों में उच्च संस्कार देकर चरित्र निर्माण कर रहे हैं, जो अंततः राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत कर रहा है।

भावी कार्यविस्तार की समीक्षा और विदाई संकल्प
इस द्वि-दिवसीय बैठक के विभिन्न संगठनात्मक सत्रों में देश के अलग-अलग प्रांतों में चल रहे सेवा कार्यों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक संस्कार) की वर्तमान स्थिति की सूक्ष्म समीक्षा की गई। बैठक में आगामी तीन वर्षों की कार्य योजनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ तथा नए क्षेत्रों में सेवा कार्यों के विस्तार का रोडमैप तैयार किया गया।
समापन सत्र में राष्ट्रीय सेवा भारती के अध्यक्ष सुनील सप्रे जी ने सभी कार्यकर्ताओं के सम्मुख अपना संगठनात्मक मनोगत व्यक्त किया। तत्पश्चात, आरएसएस के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी का मुख्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बदलते समय की चुनौतियों को पहचानते हुए अधिक पेशेवर और संवेदनशील होकर समाज की सेवा में जुटें।
बैठक के समापन पर देश भर से आए सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने एक नई ऊर्जा, सांगठनिक उत्साह और नए संकल्प के साथ अपने-अपने नियत कार्यक्षेत्रों में सेवा कार्यों को और अधिक गति देने के लिए प्रस्थान किया।












