भारत लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। केंद्र सरकार लगातार रोजगार सृजन के लिए काम कर रही है। इसी क्रम में देश के संचनात्मक सुधारों को और अधिक बूस्ट देने और निजी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए 1.5 अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) के फंड को मजूरी दे दी है।
यह मदद ‘बूस्टिंग जॉब क्रिएशन इन द प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग’ नाम के कार्यक्रम के तहत दी जा रही है। विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने इसकी मंजूरी दे दी।
इस कार्यक्रम का मकसद क्या है?
इस पहल का मुख्य लक्ष्य निजी क्षेत्र को मजबूत करके ज्यादा रोजगार के मौके पैदा करना है। विश्व बैंक के मुताबिक, अगले 20 साल में करीब 11 करोड़ युवा काम की उम्र में आएंगे। इन्हें अच्छे रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सुधारों को सपोर्ट किया जाएगा।
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कार्यक्रम में खासतौर पर ये बातें शामिल हैं:
- उद्यमिता (बिजनेस शुरू करना) की राह में आने वाली अड़चनों को कम करना
- महिलाओं की नौकरी बाजार में भागीदारी बढ़ाना
- व्यापार और निवेश की प्रक्रियाओं को आसान बनाना
- कंपनियों को पूंजी (कैपिटल) आसानी से उपलब्ध कराना
पहले से किए गए सुधारों को आगे बढ़ाएगा
यह वित्तपोषण भारत सरकार के हाल के कदमों को और मजबूत करेगा। इनमें कर प्रणाली को सरल बनाना, व्यापार को एक जगह लाना, नियम-कानूनों में सुधार और कारोबार करने में आसानी बढ़ाना शामिल है। सरकार ने नवंबर 2025 में 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं लागू की थीं। इनका उद्देश्य कंपनियों के लिए नियमों का पालन आसान करना, पुरानी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाना और कामगारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उद्योगों को बेहतर माहौल देना है।
रोजगार के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में रोजगार 2017-18 में 45.2 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 60.4 करोड़ हो गया। यानी इस दौरान 15 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियां जुड़ीं। बेरोजगारी की दर 6 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई। साथ ही करीब 90 लाख महिलाएं नियमित वेतन वाली नौकरियों से जुड़ीं।
विश्व बैंक का बयान
विश्व बैंक ने कहा कि यह फंडिंग उसके भारत के साथ 2026-31 के कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के मुताबिक है। यह 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य को भी मदद पहुंचाएगा। दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के उपाध्यक्ष जोहान्स जट ने कहा कि मुश्किल वैश्विक हालात के बावजूद भारत निजी पूंजी आकर्षित करने और रोजगार बढ़ाने के लिए सुधारों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कहा जा रहा है कि यह 1.5 अरब डॉलर की मदद भारत को निजी क्षेत्र को मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं के लिए ज्यादा अवसर पैदा करने और लंबे समय तक आर्थिक विकास को गति देने में सहायक साबित होगी।

















