रुद्रप्रयाग: श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे की तीर्थ यात्रा को बार-बार निहंग सिखों बाधित किए जाने की खबरे सामने आ रही है। नंगी तलवारें लिए ये निहंग युवक कभी स्थानीय लोगों से लड़ते दिखाई दे रहे हैं तो कभी गुरुद्वारों के सेवादारों से। हिमाचल के बाद ये निहंग उत्तराखंड में उत्पात मचा रहे हैं।
निहगों द्वारा रुद्रप्रयाग के गुरुद्वारा नगरासु में कब्जा कर एक सिख तीर्थ यात्री को बंधक बना और दो दिनों तक पुलिस प्रशासन को तो परेशान किया ही साथ ही सिख तीर्थ यात्रियों में भी दहशत बनाए रखी।
कर्णप्रयाग की घटना
छ दिन पहले कर्णप्रयाग क्षेत्र में सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कहासुनी के बाद कुछ श्रद्धालुओं द्वारा तलवारें लहराने और हमला करने की घटना सामने आई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन करते हुए यातायात बाधित कर दिया। बाद में चमोली जिले की पुलिस ने चारों निहंग युवकों को गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद पूरे देश में सिख समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
श्री हेमकुंड साहिब से अपील
श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने पवित्र श्री हेमकुंट साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं से आपसी सद्भाव, अनुशासन और शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि श्री हेमकुंट साहिब यात्रा में अब तक हजारों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है। सभी श्रद्धालु यात्रा के महत्व और उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए श्रद्धा एवं मर्यादा के साथ यात्रा करें तथा ऐसा कोई कार्य न करें जिससे धार्मिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचे। यात्रा के दौरान वाद-विवाद से बचें और कानून व्यवस्था तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें।
अपील में कहा गया है कि सिख धर्म में शस्त्रों का महत्व धर्म की रक्षा के लिए है, न कि उनके दुरुपयोग के लिए। इसलिए श्रद्धालु यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से शस्त्र साथ न लाएं। विशेष रूप से यात्रा पर आने वाले छोटे बच्चों को किसी भी प्रकार के शस्त्र साथ रखने से बचाया जाए। ट्रस्ट की ओर से जारी संदेश में कहा कि उत्तराखण्ड एक शांतिप्रिय राज्य है, जिसकी पहचान देश-दुनिया में देवभूमि के रूप में है। यहां श्री बदरीनाथ धाम, श्री केदारनाथ धाम, मां गंगोत्री, मां यमुनोत्री सहित अनेक पवित्र तीर्थस्थल स्थित हैं। इन्हीं पावन स्थलों में श्री हेमकुंट साहिब का भी विशेष धार्मिक महत्व है।
उन्होंने कहा कि सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सरकार द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। अतः श्रद्धालु यात्रा को पूरी आस्था, श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न करें। किसी भी प्रकार के विवाद या समस्या की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन में किसी बाहरी का दखल नहीं
जानकारी के मुताबिक, पंजाब के शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी काई सालों से श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन को अपने हाथ में लेना चाहती है ,दिल्ली के गुरुद्वारों की तरह श्री हेमकुंड साहिब प्रबन्ध इनसे सम्बद्धता नहीं रखती। उल्लेखनीय है कि पंजाब शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी देश के कई हिस्सों में बने गुरुद्वारों को अपने प्रबंधन या कहें कब्जे में रहती रही है। हर साल पंजाब से आए निहगों के दल यहां गुरुद्वारों में कथित रूप से हिंसा फैलाते रहे हैं।
नगरासू गुरुद्वारे में स्थानीय सेवादारों के साथ रहने और लंगर खाने आदि को लेकर विवाद हुआ। सेवादारों ने उन्हें पहले तो समझाया फिर मामला बढ़ गया और निहगों द्वारा एक सिख तीर्थ यात्री को बंधक बना लिया और गुरुद्वारे पर एक तरह से कब्जा कर लिया। निहंग युवकों का ये आरोप था कि गुरुद्वारे के शस्त्र लिए सेवादारों ने उनके कृपाण रख लिए और उनके साथ मार पीट भी की। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से गुरुद्वारे के बाहर पुलिस और अर्ध सैनिक दस्ते को तैनात कर दिया। डीएम विशाल मिश्रा और एसपी नीहारिका। तोमर ने स्वयं मौके पर पहुंच कर निहंग युवकों से बातचीत की उनके द्वारा पांच मांगे रखी गई।
नगरासु में गुरुद्वारे में निहंग की कुल पांच मांगे रखी
- गुरुद्वारे में जो सेवादार है उसने हमारे साथ बदतमीजी की है उसके खिलाफ कार्रवाई हो।
- जिन लोगों ने हमारे चारों निहंग साथियों को मारा है उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो और कार्रवाई हो।
- हमारे चारों निहंग लोगों की जमानत कराई जाए।
- गुरुद्वारे के सेवादारों ने अपने पास दो नाली बंदूक रखी है उसके लाइसेंस की जांच कराई जाए।
- हमारे खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई न हो।जिला प्रशासन से आश्वासन वार्ता के बाद निहंग युवकों ने बंधक को छोड़ दिया। पुलिस प्रशासन ने उन्हें अपनी सुरक्षा में निहंग युवकों को ऋषिकेश पहुंचा दिया जहां से वो पंजाब के लिए रवाना हो गए।

















