पुणे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारकों की कर्तव्यपरायणता, त्याग और उनकी स्नेहपूर्ण देखभाल के लिए समर्पित केंद्र ‘कौशिक आश्रम’ का नया और भव्य स्वरूप सामने आया है।
पुणे की मित्रमंडल सोसाइटी में स्थित इस पावन केंद्र के पुनर्निर्माण के सुअवसर पर एक विशेष ‘कृतज्ञता सत्कार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस गरिमामयी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केंद्रीय कार्यकारी समिति के वरिष्ठ सदस्य माननीय भैयाजी जोशी ने भावुक और प्रेरक विचार रखे।
उन्होंने कहा कि एक निश्चित आयु के पश्चात परिवार और समाज के बुजुर्ग सदस्यों की सेवा करना केवल एक सामान्य सेवा कार्य नहीं, बल्कि हमारा सबसे पवित्र और सर्वोच्च कर्तव्य है। कौशिक आश्रम इसी सांगठनिक व सामाजिक प्रतिबद्धता का एक जीता-जागता और अनुपम उदाहरण है।
“यहाँ कार्यालय जैसी औपचारिकता नहीं, घर जैसा अपनापन मिलेगा”
भैयाजी जोशी ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि ‘कौशिक आश्रम’ को किसी पारंपरिक वृद्धाश्रम या विश्राम गृह की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसकी मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा-
“मनुष्य को सच्चा संतोष और आत्मिक शांति केवल पारिवारिक स्नेह के बीच ही मिल सकती है। संघ के जिन प्रचारकों ने राष्ट्र-निर्माण और समाज-सेवा के लिए अपना संपूर्ण जीवन और अपनी जवानी निस्वार्थ भाव से समर्पित कर दी, वे जीवन के इस उत्तरार्ध (पड़ाव) पर पूर्ण अपनापन, परम संतोष और सम्मानजनक खुशी के हकदार हैं। इस नई इमारत का रूप-रंग, अहसास या कार्यशैली किसी कार्यालय जैसी रूखी नहीं होगी, बल्कि यह एक सच्चा घर है। मुझे पूरा विश्वास है कि यहाँ वह माहौल बना रहेगा जहाँ सचमुच घर जैसा महसूस हो।”
इस कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी महाराष्ट्र प्रांत के संघचालक प्रो. नानासाहेब जाधव और संस्था के सम्मानित ट्रस्टी दिवाकर पांडे मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। समारोह में उन सभी विशिष्ट योगदानकर्ताओं और सहयोगियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस भवन के पुनर्निर्माण में अग्रणी और उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
RSS Pracharaks give their youth for community service. But where do they go when they are in their sunset years?
I found the answer to this question in a quaint old bungalow in Pune’s historic Mitramandal colony named the Kaushik Ashram. Founded in 1984, Kaushik Ashram… pic.twitter.com/NF5uuZM4fS
— Shefali Vaidya. 🇮🇳 (@ShefVaidya) June 29, 2023
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गौरव
पुणे की ऐतिहासिक मित्रमंडल कॉलोनी में स्थित यह पुराना बंगला उन राष्ट्र-आराधकों का विश्राम स्थल रहा है, जिन्होंने दशकों पहले देश की सेवा के लिए अपने सगे घर-परिवार का परित्याग कर दिया था। कौशिक आश्रम के इतिहास और विशिष्टताओं का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
| कौशिक आश्रम का ऐतिहासिक आयाम | विवरण एवं महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| मूल स्थापना वर्ष | वर्ष 1984 |
| दो पूर्व सरसंघचालकों का अंतिम घर | • परम पूज्य बालासाहेब देवरस (यहाँ लगभग 4 वर्ष रहे) • प्रो. राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया |
| पुनर्निर्माण हेतु भूमि-पूजन तिथि | 1 जुलाई 2024 |
| मुख्य रेनोवेशन आर्किटेक्ट | पलाश देओलंकर (भवन के रेनोवेशन डिज़ाइनर) |
| आश्रम की मूल उपयोगिता | 75 वर्ष से अधिक आयु के सेवानिवृत्त प्रचारकों की प्यार से देखभाल। |
सादगी की अनूठी मिसाल: पीएम मोदी और वाजपेयी जी भी रहे हैं साक्षी
कुछ समय पूर्व विख्यात लेखिका और पब्लिक इंटेलेक्चुअल शेफाली वैद्य ने इस आश्रम का दौरा कर इसकी सादगी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया था। उनके संस्मरणों के अनुसार, यह कोई फाइव-स्टार सुख-सुविधाओं वाला केंद्र या आम ओल्ड-एज होम नहीं है, बल्कि एक अत्यंत शांत, पवित्र और चिंतनशील साधना स्थली है।
- सीनियर सदस्यों का संचित अनुभव: आश्रम में रहने वाले वरिष्ठ सदस्यों (जैसे 82 वर्षीय मुकुंदराव गोरे जिन्होंने भारतीय मज़दूर संघ को सींचा, तात्या जोगलेकर, पंत फड़के, सुहासराव हिरेमठ और रत्नाकर पाटिल) के पास संगठन गढ़ने और समाज सेवा का कुल मिलाकर लगभग 200 वर्षों का सामूहिक अनुभव है।
- असाधारण सादगी: यहाँ का तथाकथित ‘वीआईपी कमरा’ (जहाँ बालासाहेब देवरस जी रुकते थे) भी बेहद सादा है। प्रत्येक सदस्य के पास एक साधारण कमरा है, जिसमें केवल बेसिक फ़र्नीचर और एक साधारण सीलिंग फ़ैन लगा है।
- वैश्विक नेताओं का आगमन: इस सादे से दिखने वाले वैचारिक गृह में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ राजनेता एल.के. आडवाणी समेत देश की कई शीर्ष और जाने-माने नीति-निर्माता हस्तियां आकर ऊर्जा प्राप्त कर चुकी हैं।
समाज को ‘मैत्री’ का शाश्वत संदेश देता रहेगा यह केंद्र
शनिवार को आयोजित हुए इस मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वक्ताओं और अतिथियों द्वारा ‘भारत माता’ के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन व पूजन के साथ हुई। कार्यक्रम के दौरान डॉ. जगदीश करमलकर ने अपने सारगर्भित विचार समाज के सामने रखे, जबकि पूरे मंच का कुशल और अनुशासित संचालन नागेश पाटिल द्वारा किया गया।
मुख्य समारोह के प्रारंभ होने से पूर्व, भैयाजी जोशी ने मित्रमंडल सोसाइटी के सभी स्थानीय पदाधिकारियों और निवासियों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने इस बात पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की कि यह पवित्र आश्रम समाज और स्थानीय कॉलोनी के बीच एक अटूट हिस्से के रूप में रच-बस गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘कौशिक आश्रम’ एक ऐसा जीवंत केंद्र है जो समाज को लगातार निःस्वार्थ प्रेम, समरसता और सच्ची दोस्ती (मैत्री) का शाश्वत संदेश देता आया है और भविष्य में भी एक प्रकाश स्तंभ के रूप में यह संदेश देता रहेगा।

















