आज कोई भी देश सीमा पर खड़े शत्रु से अकेले नहीं लड़ता, उसकी लड़ाई मानव तस्कर , संगठित अपराध नेटवर्क, साइबर अपराधी, ड्रग कार्टेल , हवाला तंत्र और आतंकवादी संगठनों से होती है जो अब बंदूकों की बजाय अवैध वित्तीय नेटवर्को का प्रयोग करते है। यह गतिविधिया , किसी भी राष्ट्र की आर्थिक नीति को कमजोर करने के साथ ही उस राष्ट्र की सभी प्रकार की संरचना को खोखला कर देती है। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए 1989 में वैश्विक संस्था का उदय हुआ फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स और भारत के लिए गौरव का क्षण जून 2026 में आया जब भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का उपाध्यक्ष चुना गया। विवेक अग्रवाल 1994 बैच के आईएएस अधिकारी है , जो मध्य प्रदेश कैडर के हैं। वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय के सचिव कार्यरत है वह अब विवेक अग्रवाल ब्रिटेन के जाइल्स थॉमसन की जगह लेंगे.
FATF क्या है
1989 में पेरिस में आयोजित G7 सम्मेलन में FATF की स्थापना की गई, प्रारंभ इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना था, लेकिन 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले के बाद इसका कार्य क्षेत्र आतंकवाद के वित्तपोषण को भी रोकना शामिल कर दिया गया है, बाद में परमाणु जैविक रासायनिक हथियारों के प्रसार के वित्त पोषण को भी इसमें जोड़ा गया है। इस संस्था के मानकों का पालन 200 से अधिक देशों में किया जा रहा है।
FATF की संरचना
FATF का मुख्यालय पेरिस में है और इसका सचिवालय ओईसीडी मुख्यालय में कार्य करता है। वर्तमान में FATF के 38 सदस्य हैं एवं दो क्षेत्रीय संगठन है। इसका सदस्य वही बन सकता है जो FATF के मानकों के अनुरूप कानून बनाते हैं, व्यवस्था स्थापित करते हैं और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट जैसी संस्था स्थापित करते हैं और सभी सदस्य देशों की सहमति के बाद वह देश सदस्य बन जाता है। भारत 2006 में ऑब्जर्वर बना और 2010 को पूर्ण सदस्य बन गया।
FATF की सर्वोच्च संस्था पेलेनरी (Plenary) है , वर्ष में तीन बार इसकी बैठक आयोजित होती है। सभी महत्वपूर्ण निर्णय यही लिए जाते हैं, ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट पर निर्णय लिए जाते हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन किया जाता है, इसी संस्था ने भारत के विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष चुना है।
FATF की ग्रे एंड ब्लैक लिस्ट
ब्लैक सूची का आधिकारिक नाम है, कार्रवाई हेतु आवाहन के अधीन उच्च जोखिम वाले अधिकार क्षेत्र (High-Risk Jurisdictions Subject to a Call for Action) इस सूची में वे देश शामिल किये जाते है, जिनकी धन शोधन, आतंकवादी पोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के वित्त पोषण को रोकने संबंधी व्यवस्था में अत्यंत गंभीर रणनीतिक कमियां दिखाई है।
ग्रे सूची में का आधिकारिक नाम है बढ़ी हुई निगरानी के अधीन अधिकार क्षेत्र (Jurisdictions Under Increased Monitoring) इस सूची में वे देश शामिल होते है जिनकी धन शोधन निरोधक और आतंकवाद वित्त पोषण निरोध, व्यवस्था में रणनीतिक कमियां तो होती हैं,परंतु भी कहीं ना कहीं वे इसके लिए कार्य योजना पर काम कर रहे होते हैं।
इनका निर्धारण करने के लिए एक विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया होती इसमें देखा जाता है कि क्या वह देश FATF की 40 सिफारिश के अनुरूप कानून बनाए हैं ? क्या वहां धन शोधन और आतंकवाद वित्त पोषण विरोधी कानून प्रभावी रूप से लागू है ?क्या वे कानून वास्तव में परिणाम दे रहे हैं ? अपराधियों को दंड दे रहे हैं ? क्या अवैध संपत्तियों जप्त हो रही है ? FATF किसी देश का मूल्यांकन 11 प्रमुख परिणाम के आधार पर भी करता है। यदि किसी देश में गंभीर कमियां पाई जाती है तो उसे ग्रे या सूची या ब्लैक सूची में शामिल किया जाता है।
FATF और भारत
भारत में FATF की आवश्यकता सबसे पहले आतंकवाद के संदर्भ में महसूस की गई थी , 2006 में भारत FATF का पर्यवेक्षक बना और 2010 में पूर्ण सदस्य्ता प्राप्त की और 2026 में FATF के उपाध्यक्ष पद तक पहुंचना भारत की कूटनीतिक यात्रा की बड़ी सफलता है। भारत ने FATF के अनुरूप भारत का वैश्विक ढांचा तैयार किया,FATF के मानकों के अनुरूप प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (PMLA ) , गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), फेमा , बेनामी प्रॉपर्टी एक्ट आदि कानून तैयार किये। इसके लिए भारत ने संस्थागात ढांचा में प्रवर्तन निदेशालय, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ,आरबीआई द्वारा बैंकिंग निगरानी, सेबी द्वारा पूंजी बाजार निगरानी ,आईआरडीएआई के द्वारा बीमा क्षेत्र की निगरानी और एनआईए द्वारा आतंकवाद वित्त पोषण जांच की जाती है। 2017 में भारत सरकार ने राजस्व विभाग में FATF सेल बनाया गया , भारत को रेगुलर फॉलो अप कैटेगरी में रखा गया, यह भारत की अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। और FATF ने भारत की विभिन्न मामलों में प्रशंसा की।
हालांकि भारत के सामने वैश्विक चुनौतियां भी हैं, क्रिप्टोकरंसी, डार्क वेब, ए -आई आधारित अपराध, सीमा पार आतंकवादी वित्त पोषण आदि आने वाली दशक की चुनौती होगी।
भारत के लिए उपलब्धि महत्वपूर्ण क्यों है
भारत 2010 में FATF का सदस्य बना और 16 वर्ष बाद पहली बार किसी भारतीय अधिकारी को उपाध्यक्ष चुना गया,जिससे प्रदर्शित होता कि दुनिया भारत की वित्तीय पारदर्शिता और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर विश्वास करती है।
भारत लंबे समय से कहता रहा है कि आतंकवाद और उसका वित्त पोषण एक ही सिक्के के दो पहलू है, अब इस विचार कोभारत वैश्विक नीति निर्माण में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। भारत लगातार लश्कर-ए- तैयबा, जैश -ए – मोहम्मद, हवाला नेटवर्क, सीमा पर आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त करता रहा है, आज भारत की उपस्थिति इन मुद्दों को अधिक गंभीरता से उठाने में सहायक होगी।
भारत केवल अपने प्रतिनिधि हितों का प्रतिनिधि करेगा, वह एशिया अफ्रीका विकासशील देशों की वित्तीय चुनौतियों को, इस मंच पर प्रभावी रूप से रख सकेगा। इस प्रकार वह ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरने का कार्य करेगा।
भारत की वित्तीय क्षमता की ताकत को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलेगी, ग्लोबल फाइनेंशियल गवर्नेंस में भारत की भूमिका बढ़ेगी और डिजिटल पेमेंट, क्रिप्टोकरंसी निगरानी, सीमा पर वित्तीय अपराधों के संबंध में भारत अब अंतर्राष्ट्रीय मानक बनाने में मदद करेगा।
इससे भारत की डिजिटल पेमेंट की सफलता को पहचान मिलेगी, यूपीआई अब वैश्विक पहचान बन जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण विदेशी निवेशकों का भारत पर विश्वास बढ़ेगा कि भारत भारत की वित्तीय व्यवस्था विश्वसनीय है और भारत वैश्विक वित्तीय मानकों का पालन करता है। इससे भारत की वित्तीय प्रतिष्ठा मजबूत होगी और भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा और साथ ही वैश्विक वित्तीय संस्थान भी भारत के साथ सहयोग करेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि FATF का उपाध्यक्ष बनना, भारत की वित्तीय, कूटनीतिक और रणनीतिक विश्वसनीयता पर वैश्विक मुहर है , जो देश आज से 20 वर्ष पहले भारत FATF का सदस्य बनने का प्रयास कर रहा था, वही आज FATF के नेतृत्व में बैठकर वैश्विक वित्तीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और डिजिटल वित्तीय शासन दिशा तय करने वाली शक्तियों में शामिल हो गया है।
आज 21वीं सदी में सारी दुनिया भारत की ओर देख रही है कि भारत एक ऐसी व्यवस्था के निर्माण में सहयोग दे सकता है, जहां वित्तीय पारदर्शिता हो, आतंकवाद की कोई जगह ना हो,अवैध धन के स्रोत सूख जाए और प्रत्येक नागरिक भय मुक्त, गरिमा पूर्ण जीवन जी सके यही भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का सार होगा।
















