कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने बागी टीएमसी विधायक रितब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के रूप में नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे स्पीकर का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा।
मामला क्या है
टीएमसी की आधिकारिक गुट ने स्पीकर के फैसले को चुनौती दी थी। वे चाहते थे कि सोभनदेब चट्टोपाध्याय को LoP बनाया जाए, जो ममता बनर्जी की पसंद थे। लेकिन स्पीकर ने रितब्रत बनर्जी को यह पद दिया था। जस्टिस कृष्ण राव ने अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अगली सुनवाई तक कागजात दाखिल करने होंगे।
अगली सुनवाई कब
कोर्ट ने रिस्पॉन्डेंट्स (जिनमें स्पीकर पक्ष शामिल है) को तीन हफ्ते के अंदर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता (टीएमसी आधिकारिक गुट) को उसके बाद दो हफ्ते मिलेंगे। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। फिलहाल रितब्रत बनर्जी ही विपक्ष के नेता बने रहेंगे।
क्या है विद्रोह की पृष्ठभूमि
यह सब टीएमसी में बड़े राजनीतिक संकट से शुरू हुआ। रितब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके बाद वे विद्रोह के चेहरे बन गए। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ 58 विद्रोही टीएमसी विधायक हैं। इन लोगों ने एक अलग गुट बनाया। इस गुट का कहना है कि वे ममता बनर्जी को पार्टी का नेता मानते हैं, लेकिन उनके भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अश्विनी बनर्जी की भूमिका को स्वीकार नहीं करते।
स्पीकर का फैसला
पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस ने विद्रोही गुट के दावे को मान लिया। उन्होंने रितब्रत बनर्जी को LoP नियुक्त कर दिया। इससे आधिकारिक टीएमसी गुट नाराज हो गया। उनका तर्क था कि स्पीकर ने आधिकारिक पार्टी को नजरअंदाज किया और संवैधानिक नियमों का उल्लंघन किया।
टीएमसी गुट की दलील
ममता बनर्जी के गुट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा कि स्पीकर का फैसला गलत है। उन्होंने दलील दी कि विधानसभा में पार्टी की आधिकारिक मान्यता को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। बहरहाल अभी कोर्ट का यह फैसला सिर्फ अंतरिम है। पूरा मामला 28 जुलाई को आगे सुना जाएगा। तब तक रितब्रत बनर्जी LoP के रूप में काम करते रहेंगे। यह टीएमसी के अंदरूनी विवाद को और उजागर करता है, जहां एक तरफ ममता बनर्जी का आधिकारिक नियंत्रण है और दूसरी तरफ उनके भतीजे की भूमिका को लेकर असंतोष है।

















